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मेना दुर्घटना के चश्मदीद गवाह की प्रतिक्रिया।

  • News Code : 712756
  • Source : अबना
Brief

मेना दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि पुलिस वाले हाजियों को निकलने के केवल एक रास्ते की ओर जाने के लिए निर्देशित कर रहे थे और इसी वजह से इतनी बड़ी घटना हुई जो सैकड़ों लोगों की मौत का कारण बनी।

अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार मेना दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि पुलिस वाले हाजियों को निकलने के केवल एक रास्ते की ओर जाने के लिए निर्देशित कर रहे थे और इसी वजह से इतनी बड़ी घटना हुई जो सैकड़ों लोगों की मौत का कारण बनी।
आइवरी कोस्ट से संबंधित प्रत्यक्षदर्शी वालतारा मूसा ने कहा कि मेना में सऊदी पुलिस, बचाव दल और अन्य सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद त्रासदी को रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया।
आइवरी कोस्ट से संबंधित एक और हाजी याकूब ने बताया है कि मेना दुर्घटना असहनीय घटना थी क्योंकि सऊदी बलों ने कोई खास मदद नहीं की। आइवरी कोस्ट के ही कली बाली उस्मान ने कहा कि, रमी जमरात के रस्म में अव्यवस्था पहले से ही स्पष्ट थी। प्रशासनिक दोष बहुत से थे यह बात किसी तरह तार्किक नहीं कि हाजियों का बड़ा समूह एक दिशा में हरकत कर रहा हो और उसका रास्ता बंद कर दिया, जबकि पीछे से भी हाजियों का रेला चलता चला आ रहा हो।
एक अफ़गानी प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, घटना के दिन कुछ ईरानी जो उसके आगे थे, मदद का अनुरोध कर रहे थे लेकिन सऊदी पुलिस वाले अरबी में कह रहे थे कि अगर ईरानी हैं तो छोड़ दो, उन्हें मरने दो, कई लोग लाशों के नीचे दबे हुए थे और जीवित थे लेकिन सऊदी पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की।
मेना दुर्घटना में प्रभावित होने वाली एक ईरानी महिला का कहना है कि पुलिस वाले मेना दुर्घटना के दौरान कोई मदद नहीं कर रहे थे, कई लोग शवों तले जीवित थे और जब हम उनसे सहायता का अनुरोध करते तो कहते कि अभी हमारे लंच का समय है।
ईरानी हज काफिले के एक डॉक्टर हुसैन हक़ीक़ी ने बताया कि मैंने सऊदी पुलिस वालों को देखा जो सौ मीटर की दूरी पर वाहनों के माध्यम से एक रास्ता बंद कर रहे थे जिस पर एक लाख से अधिक तीर्थयात्री चलते चले जा रहे थे। जब रास्ता नहीं मिला तो हाजी एक दूसरे पर गिरते चले गए।
उन्होंने बताया कि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कोई मदद नहीं की और वहां से गुजरने वाले हेलीकॉप्टर भी लोगों को बचाने के बजाय मात्र उड़ता रहा।
उक्त ईरानी डॉक्टर का कहना था कि लोग धूप और प्यास की शिद्दत से दम तोड़ रहे थे और यह सिर्फ़ संयोग नहीं बल्कि एक अपराध है, क्योंकि रास्ते को बंद करना और सहायता प्रदान न करना, डॉक्टरों का न आना सब डिफ़ॉल्ट था, यहां तक तीन घंटे बाद जब वे सहायता के लिए आए, तब भी मार्गों को नहीं खोला गया।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को मेना में रमी जमरात के अवसर पर होने वाली त्रासदी में सैकड़ों की संख्या में तीर्थयात्री मारे गए हैं, इस त्रासदी में अब तक की जानकारी के अनुसार एक सौ पैंसठ ईरानी तीर्थयात्रियों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, पाकिस्तान के चौबीस जबकि उन्तीस भारतीय हाजियों के मारे जाने की खबर है।


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