हसन नस्रुल्लाह के विशेष प्रतिनिधि

तकफीरी आतंकवादी शिया, सुन्नी मतभेदों को हवा दे रहे हैं।

  • News Code : 653615
  • Source : अबना
Brief

राजनीतिक वाणिज्य दूतावास के चेयरमेन और हिज़्बुल्लाह के महासचिव के विशेष प्रतिनिधि अल्लामा सैयद इब्राहीम अमीन अल-सैयद ने “मुस्लिम उलमा की दृष्टि से अतिवादी और तकफीरी विचारधाराओं पर विश्व सम्मेलन को सम्बोधित किया।

अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक वाणिज्य दूतावास के चेयरमेन और हिज़्बुल्लाह के महासचिव के विशेष प्रतिनिधि अल्लामा सैयद इब्राहीम अमीन अल-सैयद ने “मुस्लिम उलमा की दृष्टि से अतिवादी और तकफीरी विचारधाराओं पर विश्व सम्मेलन को सम्बोधित किया।
उन्होंने कहाः अल्लाह का आभारी हूँ कि मुझे इस सम्मेलन में भाग लेने की अवसर मिला। साथ ही आप सभी लोगों और विशेष कर आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी और आयतुल्लाह जाफ़र सुबहानी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ कि जिन्होंने इस सम्मेलन का आयोजन किया।
यह सम्मेलन हमें उस जिम्मेदारी का एहसास दिलाता है जिसे इस्लाम ने मुसलमानों के कंधों पर रखा है और वह है इस्लाम की रक्षा। आज यह सम्मेलन इसलिए आयोजित किया गया है कि तकफ़ीरी विचारधारा और चरमपंथ का मुक़ाबला किया जा सके।
मैं सारांशिक रूप में इस विचारधारा के जोखिम और ख़तरों को आपके सामने पेश करना चाहता हूँ:
आईएसआईएल (दाइश) के आतंकी तत्वों की कोशिश यह रही है कि वह इस्लाम की छवि को बदनुमा कर दें। मौजूदा समय में हमें यह जानने की जरूरत है कि उनकी सारी कोशिशें इसलिए हैं कि वास्तविक इस्लाम के चेहरे को छिपा दिया जाए। आज फिर इस्लाम के ऐतिहासिक चरित्र को पुनर्जीवित करने की जरूरत है।
हमें यह समझने की जरूरत है कि तकफीरी आतंकवादी विचारधारा इस बात पर कमर कसे हुए है कि मुसलमानों की साझा आस्थाओं और अक़ीदों को नीस्तोनाबूद कर दिया जाए और उनके संयुक्त पक्ष को कमरंग कर दिया जाए। शिया सुन्नी मतभेद को दिन प्रतिदिन हआ देकर तेज़ किया जाए ताकि विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे मुसलमानों के नरसंहार को आसानी से वैध ठहराया जा सके।
इस सम्मेलन का महत्व इसलिए और ज़्यादा है कि इस सम्मेलन का उद्देश्य है कि तकफीरी टोलों की सही तस्वीर को उजागर करके पैगम्बरे अकरम (स.) के द्वारा पेश किये जाने वाले सही इस्लाम को दुनिया के सामने पेश किया जाये।
इस्लाम राष्ट्र के बड़े क़ीमती लक्ष्य और उद्देश्य हैं, वह मुसलमानों की ताक़त और उनके गठबंधन को कमज़ोर करना चाहते हैं। वह इस्लाम दुश्मनों के साथ मिलकर मुसलमानों में पैदा होने वाली क्रांतियों को ख़राब करना चाहते हैं और यह इस्लामी जगत के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।
तकफीरी आतंकवादी ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध के खिलाफ़ प्रचार करते हैं। वह नियमित रूप से अंतर-राष्ट्रीय आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। वह चाहते हैं कि इस्लामी और अरबी देशों को अपने मुक़ाबले पर लाकर खड़ा कर दें।
इस प्रकार की क्रांतियों से मुकाबला एक ठोस, बुनियादी और इस्लामी विचारधारा पर आधारित होना चाहिए। वह सभी मुसलमानों को निशाना बनाना चाहते हैं। तमाम विद्वानों, मराजे, उल्मा और इस्लामी केन्द्रों की जिम्मेदारी है कि लोगों को जागरूक करें।
हम आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी के बयान का समर्थन करते हैं और दुनिया के अन्य क्षेत्रों मैं इस प्रकार की बैठकों के आयोजन का स्वागत करते हैं।
हम सभी इस्लामी समूहों के गठबंधन पर जोर देते हैं और उम्मीद करते हैं कि इस सम्मेलन द्वारा एकता का संदेश दूसरों तक पहुंचे। साथ ही हम ताकीद करते हैं कि इस्लामी मुकद्देसात और मुसलमानों की मर्यादा का सम्मान किया जाना चाहिए और उनके अपमान को हराम और ग़लत करार देकर उससे मुकाबला किया जाए।


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