सुप्रीम लीडर के बयान की रौशनी में

क़ुद्स दिवस क्यों महत्वपूर्ण है?

  • News Code : 448205
  • Source : विलायत डाट इन
Brief

क़ुद्स दिवस मुस्लिम राष्ट्रों के एक महान परीक्षा का दिन है। यह वह दिन है जब मुस्लिम राष्ट्र अपने शासकों से परे डायरेक्ट दुनिया से अपनी बात कहते हैं।

क़ुद्स दिवस मुस्लिम राष्ट्रों के एक महान परीक्षा का दिन है। यह वह दिन है जब मुस्लिम राष्ट्र अपने शासकों से परे डायरेक्ट दुनिया से अपनी बात कहते हैं।ईरानियन रिपोर्टर क्लब पॉलीटेकल डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार www.khamenei.ir वेबसाइट ने क़ुद्स दिवस के महत्व के बारे में इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई के बयान को फिर से प्रकाशित किया है। नीचे उनका हिन्दी अनुवाद पाठकों की सेवा में पेश किया जा रहा है:क़ुद्स दिवस, असत्य के मुक़ाबले में सत्य के प्रतिरोध की निशानीवर्षों से असत्य के मुक़ाबले में सत्य के प्रतिरोध की निशानी क़ुद्स दिवस के महत्व को कम करने की कितनी ज़्यादा कोशिशें की जा रही हैं। क़ुद्स दिवस हक़ व बातिल और न्याय व अन्याय के बीच शानदार संघर्ष का प्रतीक है। क़ुद्स दिवस केवल फ़िलिस्तीन दिवस नहीं बल्कि पूरी इस्लामी उम्मत का दिन है, यह जायोनिज़्म जैसे घातक कैंसर के खिलाफ मुसलमानों के गगनभेदी विरोधी नारों का दिन है। वही जायोनिज़्म जो अपने प्रशिक्षित आक्रामक अतिग्रहिणीयों, घुसपैठियों और साम्राज्यवादी शक्तियों के बूते पर हाथ धोकर इस्लामी उम्मत के पीछे पड़ा है। क़ुद्स दिवस को कम न समझिए, यह एक विश्व दिवस है, अपने अंदर विश्व संदेश लिए हुए है, यह दिन इस बात को दर्शाता है कि इस्लामी उम्मत कभी अन्याय के आगे झुक नहीं सकती चाहे अत्याचार को दुनिया की बड़ी और सुपर पावर हुकूमतों का समर्थन ही क्यों न हासिल हो। क़ुद्स दिवस का महत्व कम करने की कितनी कोशिशें की जाती रही हैं, इस साल सबसे ज़्यादा प्रयास हुए, लेकिन इस्लामी ईरान, भव्य शहर तेहरान में मनाए गए क़ुद्स दिवस ने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि क्रांति और ईरानी राष्ट्र की दिशा क्या है, ईरानी राष्ट्र का संकल्प और इरादा किया है, साबित कर दिया कि (दुश्मनों के) षड्यंत्र, हथकंडे, पैसे और राजनीतिक धोखे, बेईमानी, ईरानी राष्ट्र की भावनाओं को प्रभावित नहीं कर सकतीं।क़ुद्स दिवस, फ़िलिस्तीन को दुनिया के नक्शे से मिटाने में रुकावटक़ुद्स दिवस वास्तविक अर्थ में एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामी दिन है, यह वह दिन है जब ईरानी राष्ट्र दूसरे जोशीले राष्ट्रों के सहयोग से कि जिनकी संख्या अब अल-हम्दो लिल्लाह कम नहीं है एक हक़ बात को खुल्लम खुल्ला कह सकती है। वही सत्य जिसे छिपाने और जिसकी आवाज खामोश करने के लिए साम्राज्यवादी मशीनरी साठ साल से निवेश कर रही है, हालांकि कम से कम साठ साल से यानी जब से अतिग्रहणकारी सरकार का गठन हुआ अन्यथा तैयारियां शुरू किए तो शायद सौ साल से भी अधिक हो गए हैं। साठ साल से फ़िलिस्तीन को दुनिया के नक्शे से मिटाने की कोशिश हो रही है। काफी हद तक सफल भी हो गए थे लेकिन इस्लामी क्रांति ने उनके सारे किए धरे पर पानी फेर दिया। इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था के गठन, क़ुद्स दिवस के ऐलान और तेहरान में अतिग्रहणकारी ज़ायोनी दूतावास का फ़िलिस्तीनी दूतावास में तब्दील होना उक्त साम्राज्यवादी योजना को एक चेतावनी, रूकावट और हमला साबित हुआ। (यह एक आंदोलन की शुरुआत थी जो) आज अल्हम्दो लिल्लाह और आम हो चुकी है।क़ुद्स दिवस ईरान से विशिष्ट नहीं है, यह पूरी इस्लामी दुनिया का दिन है। यही कारण है कि पूरी इस्लामी दुनिया में मुसलमानों ने अपने फिलिस्तीनी भाइयों के समर्थन में प्रदर्शन किये हैं। इस दिन मुसलमानों ने मज़लूम और ख़ून में डूबे फिलिस्तीन के खिलाफ अमेरिकी और इस्राइली षड्यंत्रों के मुक़ाबले के लिए अपनी संयुक्त प्रतिबद्धता जताई है। हाँ इस बारे में हमारी क़ौम (वास्तव में) सबसे आगे रही है और इस साल देश में  जनता की इस विशेषता और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की परिपक्वता का प्रदर्शन हुआ है।फ़िलिस्तीनी मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने की साजिशों को नाकाम बनाने का दिनक़ुद्स दिवस महत्वपूर्ण और निर्णायक दिन है। वर्षों से फ़िलिस्तीन को ठंडे बस्ता में डालने की साजिश हो रही है। क़ुद्स दिवस इस साज़िश का सीना चीरने वाला तीर है, इस धोखे बेईमानी वाली साजिश को नाकाम करने वाला आंदोलन है। साम्राज्यवाद, जायोनिज़्म और उनके समर्थकों और सहयोगियों ने सर्वसम्मति से यह तय कर रखा है कि फ़िलिस्तीन को भुला दिया जाए, क़ुद्स दिवस मनाइये, इस दिन ईरानी राष्ट्र से विशिष्ट नहीं है, दुनिया में कई स्थानों पर ईमानी भावनाओं से मालामाल जनता ने अपने देश में प्रतिबंध के बावजूद, इसलिए कि बहुत सी हुकूमतें कई स्थानों पर अनुमति ही नहीं देती हैं, क़ुद्स दिवस मनाते हैं।बहरहाल जिनके लिये संभव होता है वह घर में नहीं बैठते। उम्मीद है कि इस साल भी क़ुद्स दिवस इंशा अल्लाह फिलिस्तीनी राष्ट्र के खिलाफ होने वाली कायरतापूर्ण साजिशों के जवाब में फ़िलिस्तीनी राष्ट्र और इस्लामी दुश्मनों के मुंह पर तमाचा साबित होगा।आज की तरह के प्रदर्शन ऐसा कदम है जो ईरानी क़ौम कर सकती है और यह सबसे महत्वपूर्ण है। यह बहुत महत्वपूर्ण काम है। यह लोग (दुश्मन) फ़िलिस्तीन का नाम तक दिल व दिमाग़ से मिटा देना चाहते हैं, ऐसी कार्यवाहियां करना चाहते हैं कि दुनिया भूल जाए कि ऐसी किसी चीज का वुजूद था लेकिन आप ऐसा नहीं करने दे रहे हैं, क़ुद्स दिवस रूकावट है, हमारे महान लीडर (इमाम ख़ुमैनी) ने अपनी पॉलीसी से ऐसा नहीं होने दिया. यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।क़ुद्स दिवस हमारे महान लीडर (इमाम ख़ुमैनी र.ह) की महत्वपूर्ण यादगार है, यह दिन हमारे इंक़ेलाब और हमारे राष्ट्र की क़ुद्स शरीफ और फ़िलिस्तीन से रुचि का प्रतीक है। हर साल के क़ुद्स दिवस की बरकत से हमने यह नाम दुनिया में बाकी और ज़िंदा रखा है। बहुत सी हुकूमतों ने चाहा, नीतियां बनाईं, कोशिशें कीं, पैसा लगाया कि फ़िलिस्तीनी मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाए। अगर इस्लामी रिपब्लिक ईरान की कोशिशें न होतीं, अगर इस्लामी रिपब्लिक ईरान पूरी ताकत से इस धूर्त नीति का मुकाबला न करता तो सम्भव था कि फ़िलिस्तीन का मुद्दा धीरे धीरे किनारे लगा दिया जाता बल्कि सिरे से भुला ही दिया जाता। इस समय साम्राज्यवादी मशीनरी और धूर्त ज़ायोनी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं, खुद मानते और इस बात पर दुखी हैं कि इस्लामी गणतंत्र ने क्यों फ़िलिस्तीन का झंडा उठा रखा है और फ़िलिस्तीन को ख़त्म करने की उनकी साज़िशों को सफल क्यों नहीं होने देता। क़ुद्स दिवस फ़िलिस्तीन को याद रखने और फ़िलिस्तीन के नाम को बाकी रखने का नाम है। इस साल भी अल्लाह की मदद और तौफीक से हमारी महान क़ौम तेहरान और दूसरे प्रदेशों में क़ुद्स दिवस मनाएगी, रैलियां निकलेंगी। दूसरे मुल्कों में भी बहुत से मुसलमान क़ुद्स दिवस के अवसर पर ईरानी राष्ट्र का अनुसरण करते हैं।जिस दिन फ़िलिस्तीन के लोगों को लगता है कि दुनिया की क़ौमें उनके साथ हैं।इन दिनों इस्लामी दुनिया में होने वाले प्रदर्शन बहुत महत्वपूर्ण थे। आज आप जो करना चाहते हैं, फ़िलिस्तीन स्क्वायर और फिलिस्तीनी दूतावास तक रैली निकालना चाहते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है, इसका महत्व बहुत ज़्यादा है। इसकी ख़बरें पहुँचेंगी और फ़िलिस्तीन के मज़लूम लोगों को एहसास होगा कि दुनिया की क़ौमें उनके साथ हैं। लेकिन अल्हम्दो लिल्लाह हमारे देश ने इस संबंध में कभी कोई कोताही नहीं की है, जब भी हमें इस सिलसिले में बुलाया गया है हम सामने आए हैं और अपने रुख को दोहराया है।बहेरहाल अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और संयुक्त राष्ट्र को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मानवाधिकार की अंतर-राष्ट्रीय संस्थाएं जो हमेशा या ज्यादातर साम्राज्यवादी लक्ष्य और उद्देश्य का समर्थन करती हैं कम से कम एक बार साम्राज्यवादी मशीनरी की इच्छ


आशूरा: सृष्टि का राज़
پیام رهبر انقلاب به مسلمانان جهان به مناسبت حج 1441 / 2020
conference-abu-talib
We are All Zakzaky
सेंचुरी डील स्वीकार नहीं