तेहरान- क़ाहेरा के बढ़ते सम्बंधों पर जरमन डेली की टिप्पणी

जायोनी सरकार ईरानी राष्ट्रपति के मिस्र के दौरे की ख़बर पर सख़्त परेशान

  • News Code : 387005
  • Source : विलायत डाट इन
महमूद अहमदी नेज़ाद की क़ाहेरा में मुहममद मुरसी से मुलाक़ात की ख़बर नें यूरोपियन और अमेरिकन मीडिया में तहलका मचा दिया है। जिसका असली कारण कई दशकों की खटास के बाद तेहरान क़ाहेरा में सियासी सम्बंध बनने पर जायोनी सरकार का घबरा जाना है......

महमूद अहमदी नेज़ाद की क़ाहेरा में मुहममद मुरसी से मुलाक़ात की ख़बर नें यूरोपियन और अमेरिकन मीडिया में तहलका मचा दिया है। जिसका असली कारण कई दशकों की खटास के बाद तेहरान क़ाहेरा में सियासी सम्बंध बनने पर जायोनी सरकार का घबरा जाना है। रजा न्यूज़ की रिपोर्ट के के अनुसार इस हवाले से जरमन डेली wiener zeitung ने लिखा है:“ईरान मिस्र के साथ अपने सम्बंध बढ़ा कर इस्राईल के विरोध में तेज़ी लाना चाहता है। जिसके लिये समय भी सोच समझ कर चुना गया है। ऐसे समय में जब इस्राईल में चुनावी लड़ाई आख़िरी क़दम पर है तेहरान में एजिप्ट इन्ट्रेस्ट्स आफ़िस के इंचार्ज नें ऐलान किया है कि ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदी नेजाद, मुहम्मद मुरसी की निजी दावत पर 6 और 7 फ़रवरी को मिस्र में हो रहे ओ.आर.सी के बारहवें समारोह में भाग लेंगे। ख़ालिद सईद इब्राहीम उमरा का कहना था कि इस अवसर पर द्वपक्षीय सम्बंधों में बेहतरी लाने की भी कोशिश की जाएगी और अहमदी नेजाद और मुहम्मद मुरसी क्षेत्रीय और इन्टर-नेशनल मुद्दों पर आमने सामने बातचीत करेंगे। इस क़दम को ईरानी मीडिया ईरान और मिस्र के सम्बंधों में एक नए दौर की ऐतिहासिक शुरुआत कह रही हैं”।यह दैनिक आगे चल कर लिखता है:मिस्र नें जब 1979 में इस्राईल के साथ पीस एग्रीमेंट पर साइन किया तो ईरान नें उससे सम्बंध तोड़ दिये। इस समय क़ाहेरा और तेहरान में डिपलोमेटिक आदान प्रदान नहीं है। लेकिन मिस्र के नए राष्ट्रपति मुहम्मद मुरसी नें कुछ समय पहले एक एतिहासिक क़दम उठाते हुए तेहरान में होने वाले गुट निरपेक्ष सम्मेलन में हिस्सा लिया और यह इस्लामी इन्क़ेलाब के बाद मिस्र के किसी राष्ट्रपति का ईरान का पहला दौरा था। अब महमूद अहमदी नेजाद उसी का जवाब देना चाहते हैं। ईरानी जहां मिस्र के साथ डिपलोमेटिक सम्बंध बनाने के मूड में है वहीं उन्हें अख़वानुल मुस्लेमीन की शक्ल में अपने ऐटमी प्रोग्राम का एक और सपोर्टर मिल गया है। Wiener zeitung नें आख़िर में पश्चिमी मुल्कों की नाकामियों की ओर इशारा करते हुए लिखा है:ऐसे समय में कि जब पश्चिमी मुल्क ईरान को ऐटमी प्रोग्राम चलाने से रोकने में नाकाम हो चुके हैं, ईरान और मिस्र में डिपलोमेटिक सम्बंध बन जाना इस्राईल के लिये ख़तरे की घण्टी है। ख़ालिद उमरा भी कह चुके हैं कि मिस्र ईरान के पीस फ़ुल ऐटमी प्रोग्राम की हिमायत करता है और इस हवाले से विवाद बात चीत से ही ख़त्म किया जाना चाहिये। दूसरी ओर ईरान को भी इस्राईल की फ़िलिस्तीन विरोधी पॉलीसियों और फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में अवैध यहूदी बस्तियां बसाने की निंदा करने वाले साथी की सख़्त ज़रूरत है। इसी कारण जायोनी सरकार अभी से परेशान हो गई है।........166


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