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ख़ालिद बिन अहमद:

सऊद अलफ़ैसल थे बहरैन के विदेशमंत्री।

  • News Code : 688108
  • Source : एरिब.आई आर
Brief

बहरैन के विदेशमंत्री ने यह बात स्वीकार की है कि सन 2011 में जनान्दोलन के दमन के उद्देश्य से इस देश के विदेश मंत्रालय की बागडोर सऊदी अरब के हाथ में दे दी गई थी।

बहरैन के विदेशमंत्री ने यह बात स्वीकार की है कि सन 2011 में जनान्दोलन के दमन के उद्देश्य से इस देश के विदेश मंत्रालय की बागडोर सऊदी अरब के हाथ में दे दी गई थी।
बहरैन के वर्तमान विदेशमंत्री ख़ालिद बिन अहमद आले ख़लीफ़ा ने कहा है कि सन 2011 में सऊदी अरब के तत्कालीन विदेशमंत्री सऊद अल फैसल ही बहरैन के व्यवहारिक विदेशमंत्री थे।  बहरैन के विदेशमंत्री ने कहा कि उस समय सऊदी अरब के विदेशमंत्री सऊद अलफ़ैसल ही व्यवहारिक रूप में बहरैन के विदेशमंत्री थे जो देश की हर घटना पर नज़र रखे हुए थे।  बहरैन के वर्तमान विदेशमंत्री ख़ालिद बिन अहमद आले ख़लीफ़ा ने कहा कि उस समय के सऊदी विदेशमंत्री की बहरैन के लिए की जाने वाली सेवाओं को भुलाया नहीं जा सकता।
ख़ालिद बिन अहमद आले ख़लीफ़ा ने कहा कि उस समय जब बहरैन में जनक्रांति आरंभ हुई थी तो सऊद अल फैसल देर रात तक और कभी-कभी तो भोर समय तक बहरैन के घटनाक्रमों की जानकारी लेते थे।  उन्होंने इस दौरान बहरैन की कई बार यात्राएं कीं।  बहरैनी विदेशमंत्री के अनुसार उस दौरान सऊद अल फ़ैसल ने बहरैन की बहुत सेवा की जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
ज्ञात रहे कि सन 2011 में जब बहरैन में जनक्रांति आरंभ हुई थी तो सऊदी अरब ने उसके दमन के लिए अपने हज़ारों सैनिक बहरैन भेजे थे जिन्होंने बहरैनी सुरक्षाबलों के साथ मिलकर बहरैन की जनता का खुलकर दमन किया था।
उल्लेखनीय है कि 75 वर्षीय सऊद अलफैसल सन 1971 से 2015 तक चार दशकों तक सऊदी अरब के विदेशमंत्री रहे।  सऊदी अरब में होने वाले हालिया राजनैतिक परिवर्तनों के अन्तर्गत 2 मई 2015 को सऊद अलफैसल को उनके पद से हटा दिया गया।


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