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बहरैन में पहले ब्रिटिश फौजी अड्डे की स्थापना।

  • News Code : 656846
  • Source : wilayat.in
Brief

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन बहरैन में अपनी रक्षा स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। मनामा ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि इस देश में ब्रिटिश फौजी अड्डे की स्थापना के बारे में बहरैन और ब्रिटेन के बीच समझौता तय पा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन बहरैन में अपनी रक्षा स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। मनामा ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि इस देश में ब्रिटिश फौजी अड्डे की स्थापना के बारे में बहरैन और ब्रिटेन के बीच समझौता तय पा गया है। इस समझौता के आधार पर फ़ार्स की खाड़ी में ब्रिटिश नौसेना के समर्थन के लिए बहरैन में बंदरगाह सलमान में लेजेस्टिकी अड्डे की स्थापना की जाए। इस तरह ब्रिटेन 43 वर्षों बाद एक बार फिर फ़ार्स की खाड़ी में पलट आएगा। बहरैन और ब्रिटेन के बीच इस समझौते पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने हस्ताक्षर किए हैं।
बहरैन के विदेश मंत्री ने कहा कि यह समझौता मनामा और लंदन के बीच संबंधों के विकास की राह में बढ़ाया जाने वाला एक कदम माना जा रहा है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री फ़्लिप हामूंड ने लंदन और मनामा के बीच तय करने वाले रक्षा समझौता पर खुशी व्यक्त करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह समझौता, क्षेत्रीय खतरों से मुक़ाबले के लिए फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों के संकल्प और ठोस इरादे को बयान करता है। इस बात में कोई शक नहीं है कि मनामा और लंदन इस नए सुरक्षा समझौता से जो दक्षिणी फ़ार्स की खाड़ी क्षेत्र में ब्रिटेन की रक्षा स्थिति की स्थिरता का कारण बनेगा, विशेष लक्ष्य और उद्देश्य वाले हैं।
वर्तमान समय में जब कि ऑले ख़लीफ़ा सरकार को बहरैनी जनता के विरोध का सामना है, मनामा इस बात में सक्षम है कि ब्रिटिश सैनिकों से बहरैन की जनता के क्रांतिकारी आंदोलन को रोकने में मदद ले यहां कुछ सूत्रों ने बहरैन में ब्रिटिश सैनिकों की मौजूदगी का पहला मिशन सार्वजनिक क्रांति का दमन बताया है। ख़ास तोर पर ऐसे में कि हालिया चार वर्षों के दौरान ऑले ख़लीफा सरकार ने कई बार पश्चिमी अधिकारियों से बहरैन की राजशाही व्यवस्था को बनाए रखने में समर्थन व मदद का अनुरोध किया है। दूसरी ओर लंदन भी मनामा के साथ रक्षा समझौते का इच्छुक रहा है। ब्रिटिश अधिकारी, बहुत पहले से अपनी नीतियों में फ़ार्स की खाड़ी में अपनी उपस्थिति का रुझान जताते रहे हैं।
ब्रिटेन के रक्षामंत्री “माइकल फ़ेलोन” ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हम एक बार फिर फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र में अपने कदम जमाएंगे। इससे पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने ओमान के अपने दौरे में जेट युद्धक विमान “टाईफ़ोन” की बिक्री के बारे में ओमान सरकार के साथ ढाई अरब मिलियन पाउंड की कीमत पर आधारित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। सच्चाई यह है कि ब्रिटेन भी हथियार बनाने वाले अन्य देशों की तरह अपने हथियार बेचने में सक्षम है लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि अरब सरकारों की जनता, मौजूदा समय में पैदा होने वाली इस्लामी जागरूकता के मद्देनजर पश्चिमी देशों की सैन्य मौजूदगी स्वीकार करेगी?
बहरैन में इन दिनों ब्रिटिश फौजी अड्डे की स्थापना के खिलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं। जिस तरह पिछले सालों के दौरान बहरैन के समुद्रीय तटों में अमेरिकी नौसेना अड्डे की स्थापना के विरोध में बार-बार प्रदर्शन हो चुके हैं। कुछ राजनीतिक गुट बहरैनी जनता के प्रदरशनों के मद्देनजर बहरैन में ब्रिटिश फौजी अड्डे की स्थापना की मनामा की ओर सहमति दिये जाने को ऑले ख़लीफ़ा सरकार का भड़काऊ कदम बता रहे हैं जो बहरैनी जनता के आक्रोश की आग को भड़काने का कारण बनेगा।


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