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1300 किलोमीटर दूर यमनी का मिसाइल हमला क्या संदेश दे रहा है?

1300 किलोमीटर दूर यमनी का मिसाइल हमला क्या संदेश दे रहा है?

यमनी सेना और स्वयं सेवी बल के जवानों का मिसाइली हमला इस बात का सूचक है कि सऊदी अरब यमनी दलदल में फंस चुका है और युद्ध का जारी रहना सऊदी अरब और इमारात के लिए बहुत महंगा सिद्ध होगा

यमनी सेना और स्वयं सेवी बल के जवानों ने हालिया तीन दिनों के दौरान सऊदी गठबंधन के अपराधों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। इस दौरान यमनी सेना ने चार मिसाइलों को फायर किया जिससे दसियों सऊदी सैनिक व एजेन्ट मारे गये।

पहला हमला गुरूवार को उसने यमन के पश्चिम में स्थित अदन पर किया। इस हमले में उसने सऊदी पिट्ठुओं के दो सैनिक केन्द्रों को लक्ष्य बनाया।

दूसरा हमला भी उसने गुरूवार को ही किया जो पहले हमले से अधिक ख़तरनाक था। इस हमले में उसने सऊदी अरब के दम्माम क्षेत्र में स्थित सैनिक छावनी को लक्ष्य बनाया।

तीसरा हमला जुमे की रात को किया। इस हमले में उसने यमन के उत्तर में स्थित हिज्जा प्रांत में सऊदी गठबंधन के एक सैनिक केन्द्र को लक्ष्य बनाया।

यमनी सेना और स्वयं सेवी बल के जवानों ने चौथा हमला सऊदी अरब के दक्षिण में स्थित नजरान में किया। इस हमले में अभी ताज़ा बनी सैनिक छावनी को लक्ष्य बनाया गया।

इन हमलों में महत्वपूर्ण बिन्दु व संदेश छिपे हुए हैं।

पहला हमला जो गुरूवार को हुआ और उसमें यमन के अदन प्रांत में जेला नामक सैनिक छावनी को लक्ष्य बनाया गया तो उस हमले में 40 से अधिक सऊदी एजेन्ट मारे गये और उसी दिन यमन के अपदस्थ राष्ट्रपति हादी मंसूर के सैनिक पैरेड कर रहे थे। इस हमले में रोचक बात यह है कि इसमें यमनी सेना की मिसाइल ने लक्ष्य को बिल्कुल सही व सटीक भेदा।

दूसरा बिन्दु यह है कि सऊदी अरब के दम्माम क्षेत्र पर यमनी सेना ने जो हमला किया वह स्ट्रैटेजिक महत्व रखता है। 52 महीनों में यह पहली बार है जब यमनी सेना ने सऊदी अरब के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित सैनिक केन्द्र को लक्ष्य बनाया है। यमनी सेना का यह मिसाइली हमला उसकी शक्ति में ध्यान योग्य वृद्धि का सूचक है।

तीसरा बिन्दु यह है कि यमनी सेना ने 1300 किलोमीटर दूर सैनिक केन्द्र को लक्ष्य बनाया। कुछ सूत्रों ने इसे यमनी सेना की शक्ति में अभूतपूर्व परिवर्तन का नाम दिया है क्योंकि अब तक केवल सबसे दूर रियाज़ था जिसे यमनी सेना ने लक्ष्य बनाया था पर अब उससे दूर दम्माम को लक्ष्य बनाकर बता दिया है कि अब सऊदी अरब और इमारात के लगभग अधिकांश संवेदनशील क्षेत्र यमनी सेना की मिसाइल रेन्ज में हैं।

बहरहाल यमनी सेना और स्वयं सेवी बल के जवानों का मिसाइली हमला इस बात का सूचक है कि सऊदी अरब यमनी दलदल में फंस चुका है और युद्ध का जारी रहना सऊदी अरब और इमारात के लिए बहुत महंगा सिद्ध होगा। 


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