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होश मे आ जाओ, जमावड़े से बचो!!! डबल्यू एच ओ की चेतावनी, कहीं ऐसा न हो कि कोरोना से पूरी पूरी बस्ती साफ़ हो जाए और एक आदमी भी न बचे

होश मे आ जाओ, जमावड़े से बचो!!! डबल्यू एच ओ की चेतावनी, कहीं ऐसा न हो कि कोरोना से पूरी पूरी बस्ती साफ़ हो जाए और एक आदमी भी न बचे

कोरोना वायरस से हो रहे तेज़ी विनाश के मद्देनज़र डबल्यू एच ओ ने जमावड़ा करने के बुरे अंजाम से सचेत किया है।

क्योंकि भारत में कोरोना का सक्रिय वैरिअन्ट इतना ख़रनाक है कि इसके आगे वैक्सीन भी फ़ेल हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौन्य स्वामीनाथन का कहना है कि भारत की घनी आबादी इसकी ताक़त और बढ़ा सकती है।

उनका कहना है कि कोविड विस्फोट के पीछे कोविड-19 का वैरिअन्ट B.1.617 है। म्यूटेशन्स के बाद बने कोरोना वायरस के एक वैरिअन्ट को यह नाम दिया गया है। डॉक्टर सैम्या कहती हैं कि कोविड विस्फोट के अनेक कारण हो सकते हैं लेकिन यह स्टैन बेहद ख़तरनाक है। इसका बहुत तेज़ी से फैलना ही इसकी पहचान है। अहम बात यह है कि इसका रूप भी लगातार बदल रहा है। अभी तक इसके तीन रूप की पहचान हो चुकी है।

डॉक्टर स्वामीनाथन कहतीं है कि भारत में कोविड विस्फोट के पीछे सिर्फ़ वायरस को दोषी नहीं मान सकते। इसके पीछे सुरक्षा में ढिलाई और बड़ी-बड़ी भीड़ का जमावड़ा भी है।

इस वायरस के वैरिअन्ट का नामकरण मूल नाम से 1,2,3 जोड़कर किया गया है। इसके तीन रूप हैं B.1.617.1, B.1.617.2 और B.1.617.3 वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन इसे वैरिअन्ट ऑफ़ कर्सर्न की कोटि में शामिल करते करते रह गया। इस वक़्त इसकी कोटि वैरिअन्ट ऑफ़ इंटरेस्ट है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भले ही नए वैरिअन्ट की घातकता कम करके आंकी हो, लेकिन अमरीका और ब्रिटेन समेत कई देशों के स्वास्थ्य विभाग इसे वैरिअन्ट ऑफ़ कन्सर्न ही माना है।

भारत में कोविड-19 के फैलाव को विस्फोट का कहा जा रहा है। विस्फोट उस हालत को कहते हैं कि जिसे सामान्य हालत में लाना बहुत मुश्किल होता है। भारत में बढ़ती आबादी को भी जनसंख्या विस्फोट कहा जाता है।

ग़ौरतलब है कि जिस तरह भारत में धर्म के नाम पर अंधविश्वास को आधार बनाकर जमावड़ा हो रहा है और उसे प्रशासनिक समर्थन मिल रहा है, कहीं ऐसा न हो कि पूरी पूरी बस्ती साफ़ हो जाए और उसमें एक आदमी भी न बचे। इतिहास में इस तरह की घटनाओं की सैकड़ों मिसालें हैं।

हर धर्म में जान बचाने के लिए बहुत से अनिवार्य धार्मिक कर्तव्यों को छोड़ने की इजाज़त दी गयी है। 


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