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हज क्या है? हज के संस्कारों के निहितार्थ क्या हैं? इस्लामी जगत का सबसे मूल मुद्दा क्या है? इस्लामी जगत का भविष्य क्या है? इन सवा

हज क्या है? हज के संस्कारों के निहितार्थ क्या हैं? इस्लामी जगत का सबसे मूल मुद्दा क्या है? इस्लामी जगत का भविष्य क्या है? इन सवा

हाजियों के नाम अपने मार्गदर्शक संदेश में आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने हज के बुनियादी आयामों को रेखांकित किया।


आरंभ करता हूं उस अल्लाह के नाम से जो दयावान और कृपालु है।

सारी प्रशंसाएं उस अल्लाह के लिए हैं जो ब्रह्माण्ड का पालनहार है और सलाम हो उसके दानी व अमानतदार अंतिम दूत हज़रत मोहम्मद पर और उनके पवित्र वंश पर विशेषकर धरती व आकाश पर बाकी अल्लाह की निशानी पर और इसी तरह सलाम हो क़यामत तक पैग़म्बरे इस्लाम के विशेष साथियों और उन सब पर जिन्होंने उनका अनुसरण किया।

            हर साल हज का अवसर, इस्लामी राष्ट्र के लिए ईश्वरीय कृपा का समय होता है। कुरआने मजीद की यह पुकार कि " लोगों में हज की घोषणा कर दो" पूरे इतिहास में  कृपा के इस दस्तरखान पर आने का निमंत्रण है ताकि ईश्वर की तलाश में भटकने वालों का मन और उनकी आत्मा और इसी तरह उनकी दृष्टि और उनके बुद्धिमत्ता पर आधारित विचार भी उसकी कृपा से लाभान्वित हों और हर साल, हज के कुछ पाठ और शिक्षाएं, कुछ लोगों द्वारा पूरे इस्लामी जगत में फैलायी जाए।

            हज के दौरान, एकल राष्ट्र के प्रतीक जमावड़े और एकजुटता के साथ,  व्यक्ति और समाज की महानता व विकास के लिए मुख्य तत्व, अल्लाह को याद किया जाता है,  उपासना तथा एक ही केन्द्र व दायरे में परिक्रमा की जाती है, संयुक्त उद्देश्य के साथ एक ही रास्ते पर चला जाता है जो एकेश्वरवाद के आधार पर इस्लामी राष्ट्र के प्रयास व गतिशीलता का रहस्य है, इसके साथ ही सभी हाजी एक रूप में नज़र आते हैं जो भेदभाव न होने तथा अवसरों को सार्वजनिक किये जाने का चिन्ह है। यह सब इस्लामी समाज के मुख्य स्तंभ हैं जिन्हें हज के दौरान छोटे स्तर पर एक साथ दिखाया जाता है। हज का विशेष लिबास, काबे की परिक्रमा, दौड़, रात गुज़ारना, कंकरियां मारना, हज के दौरान रुकना, कुछ करना सब कुछ उस बड़े चित्र का एक भाग के प्रतीक है जो इस्लाम ने एक वांछित संगोष्ठी के लिए पेश किया है।

            विभिन्न देशों और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के मध्य जानकारियों और पूंजी का लेन-देन, एक दूसरे की स्थिति व अनुभव की जानकारी, गलत फहमियों को दूर करना, दिलों को एक दूसरे से क़रीब करना और संयुक्त दुश्मन से मुक़ाबले के लिए दूसरे का हाथ थामना हज की रणनीतिक व बहुत बड़ी उपलब्धि है कि जिसे इस प्रचलित रूप में सैंकड़ों सम्मेलनों और जमावड़े द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता।

             विरक्तता का संस्कार जो हर प्रकार की क्रूरता, अत्याचार, बुराई तथा हर काल के क्रूर शासकों से दूरी तथा समय के साम्राज्यवादियों और उनके वर्चस्ववाद और उनकी ज़ोर ज़बरदस्ती के सामने डट जाने के अर्थ में है, हज की एक बड़ी विभूति तथा पीड़ित मुस्लिम राष्ट्रों के लिए एक बड़ा अवसर है। आज अनेकेश्वरवाद, नास्तिकता और अमरीका के नेतृत्व में साम्राज्यवाद के मोर्चे से विरक्तता, पीड़ितों की हत्या व युद्ध प्रेम से दूरी की घोषणा के अर्थ में है, दाइश व अमरीका की ब्लैक वॉटर कंपनी जैसे आतंकवाद के केन्द्रों से दूरी के अर्थ में है, बच्चों के हत्यारे ज़ायोनी शासन और उसके सहायकों और समर्थकों के खिलाफ इस्लामी राष्ट्र की गर्जना के अर्थ में है। पश्चिमी एशिया व उत्तरी अफ्रीका के संवेदनशील क्षेत्र में अमरीका और उसके सहायकों के युद्धोन्माद की आलोचना करने के अर्थ में है कि जिन्होंने इस क्षेत्र के राष्ट्रों के दुखों व समस्याओं को चरम पर पहुचां दिया है और हर दिन उन पर दुखों के पहाड़ तोड़े जाते हैं। भौगोलिक स्थिति व जाति व त्वचा के रंग के आधार पर भेदभाव व नस्लभेद से दूरी की घोषणा के अर्थ में है। इस्लाम द्वारा आहूत सज्जनतापूर्ण व न्यायोचित व्यवहार के मुक़ाबले में अतिक्रमणकारी व अराजकता पैदा करने वाली शक्तियों के दुष्टतापूर्ण व्यवहार से घृणा प्रकट करने के अर्थ में है।

            यह हज की विभूतियों की एक झलक मात्र है कि जिसका निमंत्रण इस्लाम ने हमें दिया है और यह, इस्लामी समाज की आंकाक्षाओं के महत्वपूर्ण भाग का साक्षात रूप है कि जिसका अर्थपूर्ण व विशाल प्रदर्शन हर साल मुसलमानों द्वारा हज के अवसर पर होता है और सब को इस प्रकार के समाज के गठन की कोशिश के लिए आहवान करता है।

            इस्लामी जगत के बुद्धिजीवियों के कांधों पर  कि जिनमें से बहुत से इस समय हज में भाग ले रहे हैं, भारी ज़िम्मेदारी है।  यह पाठ उनके संकल्प व पहल से सभी राष्ट्रों और जनमत तक पहुंचना चाहिए और विचारों, भावनाओं, चेतना और अनुभवों का अध्यात्मिक लेन-देन उनके द्वारा होना चाहिए।

            आज इस्लामी जगत का एक अत्याधिक महत्वपूर्ण मुद्दा, फिलिस्तीन है कि जो सभी पंथों, जातियों और भाषा से संबंध रखने वाले मुसलमानों के राजनीतिक मुद्दों में सर्वोपरि है। हालिया सदियों में सब से बड़ा अत्याचार, फिलिस्तीन में हुआ है। इस दुखदायी घटना में एक राष्ट्र की भूमि, उसका घर, खेत, संपत्ति, सम्मान, पहचान  सब कुछ, लूट लिया गया। इस राष्ट्र ने ईश्वर की मदद से हार नहीं मानी और न ही वह थक कर बैठ गया बल्कि आज, कल से अधिक जोश व साहस के साथ मैदान में डटा है लेकिन परिणाम तक पहुंचने के लिए सभी मुसलमानों की मदद की ज़रूरत है। सेंचुरी डील की साज़िश कि जिसे अत्याचारी अमरीका और उसका साथ देने वाले  गद्दारों द्वारा, तैयार किया गया है, फिलिस्तीनियों ही नहीं बल्कि पूरे मानवीय समाज के खिलाफ एक अपराध है। हम, सब को दुश्मन की इस धूर्तता व धोखे को नाकाम बनाने के लिए सक्रिय भागीदारी का निमंत्रण देते हैं और ईश्वरीय मदद से इसे और साम्राज्यवादी मोर्चे के अन्य सभी हथकंडों को, प्रतिरोध के मोर्चे के ईमान और संकल्प के सामने पूरी तरह नाकाम समझते हैं।

            महान ईश्वर ने कहा है कि " तो क्या वह मक्कारी करना चाहते हैं, तो जिन लोगों ने इन्कार किया वह खुद धोखा खाने वाले हैं।" अल्लाह ने बिल्कुल सच कहा है। मैं सभी हाजियों के लिए सफलता, सुरक्षा और ईश्वरीय स्वीकारोक्ति की दुआ करता हूं।

सैयद अली ख़ामेनई

3     ज़िलहिज्जा सन 1440 हिजरी क़मरी          

 


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