?>

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर विशेष कार्यक्रम

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर विशेष कार्यक्रम

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम महान ईश्वरीय पैग़म्बर हैं।

पैग़म्बरे इस्लाम की हिजरत से 622 साल पहले 25 दिसंबर को फ़िलिस्तीन के बैते लहम में आपका जन्म हुआ था। हर साल 25 दिसंबर से क्रिसमस के जश्न आरंभ होता है जिसे 12 दिनों तक पूरी दुनिया के ईसाई खुशी के साथ मनाते हैं।

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम पवित्र वंश से हैं। वे ईश्वरीय चमत्कार से बिना पिता के पैदा हुए थे। हज़रत मरियम आपकी माता हैं जो एक बहुत ही पवित्र महिला थीं। हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम ने पालने में ही अपनी मां की पवित्रता की गवाही दी थी। वह प्रेम व दया के प्रतीक थे। उन्हें महान व सर्वसमर्थ ईश्वर ने भेजा ताकि समाज से अज्ञानता और अन्याय को खत्म करें और लोगों को ईमान का प्रकाश प्रदान करें।

जब महान ईश्वर का फरिश्ता आया और उसने हज़रत मरियम को गर्भवती होने की शुभ सूचना दी तो वह हतप्रभ और दुःखी हो गयीं। उन्होंने ईश्वरीय दूत से कहा कि यह कैसे होगा जबकि मुझे किसी पुरुष ने हाथ नहीं लगाया है। इसपर महान ईश्वर के फरिश्ते ने हज़रत मरियम से कहा कि तुम्हारे ईश्वर ने कहा है कि यह कार्य मेरे लिए बहुत सरल है और मैं ईसा को लोगों के लिए निशानी करार दूंगा और मेरी तरफ से दया होगी और यह कार्य निश्चित है।

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम ईश्वरीय चमत्कार से पैदा हुए। उन्होंने पैदा होने के कुछ ही समय बाद अपनी मां की पवित्रता की गवाही दी और कहा कि मैं ईश्वर का बंदा हूं और मुझे किताब दी गयी है और मुझे अपनी मां के साथ भलाई करने का आदेश दिया गया है। इसी प्रकार हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम ने कहा कि जब तक ज़िन्दा हूं मुझे नमाज़ पढ़ने का आदेश दिया गया है। स्वयं महान ईश्वर ने हज़रत ईसा से बात की और कहा कि हे ईसा मैं तुम्हारा पालनहार हूं मैंने हर चीज़ को पैदा किया है, मुझे याद करो मेरी दोस्ती को अपने दिल में परवान चढ़ाओ, हे ईसा तुम मेरे आदेश से मसीह हो यानी मुर्दों को ज़िन्दा करने वाले, तुम मेरे आदेश से गिली मिट्टी से जानदार चीज़ पैदा कर दोगे। हे ईसा बचपने में और बड़ा होने पर तुम्हें बरकत प्रदान की है और जहां भी तुम हो उसे मुबारक बनाया है। मुझ पर भरोसा करो कि मैं तुम्हारे लिए काफी हूं।

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम अपने उद्देश्य के बारे में कहते हैं” ईश्वर ने मेरा नाम मसीह रखा है ताकि दरिद्रों को शुभ सूचना दूं और उसने मुझे भेजा है ताकि टूटे हुए दिलों को शांति प्रदान करूं, बंदियों को मुक्ति प्रदान करूं और क़ैदियों को स्वतंत्रता प्रदान करूं।“

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम का उद्देश्य इंसान की ज़िन्दगी को ईश्वरीय बनाना और मानवीय समाज को ईश्वरीय समाज बनाना था। हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम एक एसी व्यवस्था स्थापित करना चाहते थे जिससे इंसान की ज़िन्दगी में मानवीय व आध्यात्मिक मूल्यों का बोलबाला हो। वह अपनी शिक्षाओं में व्यक्तिगत विशेषताओं को मज़बूत करते और कहते थे कि समस्त इंसानों का मालिक ईश्वर है और सही जीवन का रास्ता ईश्वरीय इच्छा के अनुसार जीवन बिताना है।

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम की समस्त शिक्षाओं का केन्द्र व आधार एकेश्वरवाद था। वह महान ईश्वर को आधार मानकर समस्त इंसानों और समाजों की एकता का आह्वान करते थे। वह कभी भी स्वयं को न ईश्वर मानते थे और न कहते थे बल्कि हमेशा कहते थे कि वह ईश्वर के बंदे हैं। जब बनी इस्राईल हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम द्वारा लाये गये धर्म के बारे में एकमत नहीं थे और उनके मध्य केवल एक तौरात नहीं थी तो उस समय महान ईश्वरीय दूत हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम ने बनी इस्राईल से कहा कि मैं तुम्हारे लिए ज्ञान व तत्वदर्शिता लाया हूं और मैं आया हूं ताकि जिन मामलों को लेकर तुम में मतभेद है उसे स्पष्ट करूं, सदाचारी बनो और ईश्वर से डरो और मेरा अनुपालन करो।

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम महान ईश्वर के दूत हैं और उनकी महानता व पवित्रता का उल्लेख पवित्र कुरआन में किया गया है। हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम जनाब दाऊद नबी की खांनदान से हैं और उनकी माता स्वर्ग की चुनी हुई चार महिलाओं में से एक हैं। हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम चमत्कारिक रूप से बिना पिता के पैदा हुए हैं जिस तरह हज़रत आदम अलैहिस्सलाम पहले माता- पिता के बिना पैदा हो चुके थे। हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम जिस तरह चमत्कारिक रूप से पैदा हुए थे उसी तरह वह बचपने से ही चमत्कार दिखाते थे यहां तक कि जब वह पालने में थे तभी उन्होंने अपनी माता हज़रत मरियम की पवित्रता की गवाही दी और कहा था कि मैं ईश्वर का बंदा हूं कि मुझे किताब दी गयी है और मुझे पैग़म्बर बनाया गया है और जहां भी रहूं मुझे मुबारक बनाया गया है और जब तक ज़िन्दा हूं मुझे नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने का आदेश दिया गया है और मुझे अपनी मां के साथ भलाई करने की सिफारिश की गयी है और मुझे अत्याचारी नहीं बनाया गया है और सलाम हो मुझ पर उस दिन जब मैं पैदा हुआ और जिस दिन मैं मरूंगा और उस दिन जब उठाया जाऊंगा।

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम को पवित्र कुरआन में ईश्वर के शब्द के रूप में याद किया गया है। पवित्र कुरआन के व्याख्याकारों का मानना है कि यह इस बात की ओर संकेत है कि हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम को महान ईश्वर ने पैदा किया है और वह ईश्वर नहीं हैं बल्कि महान ईश्वर की रचना हैं का रचयिता महान ईश्वर है।

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम जब 30 साल के हो गये थे तब उन्हें बनी इस्राईल के मध्य ईश्वरीय धर्म के प्रचार का आदेश दिया गया किन्तु हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम बचपन से वहि अर्थात ईश्वरीय आदेश के संपर्क में थे। जब उनकी उम्र आठ साल से अधिक नहीं थी तब वह लोगों को उनके घर की ख़बर देते और यह बताते थे कि उनके घर में क्या हो रहा है और भविष्य में क्या होने वाला है। वह मुर्दों को ज़िन्दा करते थे और जन्मजात अंधों को देखने वाला बना देते थे। इन चीज़ों का वर्णन पवित्र कुरआन में किया गया है।

हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम पक्षी बना कर उसमें प्राण फूंक देते थे। वे ईश्वर के आदेश से पक्षी बना देते थे। ईश्वर के निकट उनका स्थान बहुत ऊंचा था इस प्रकार कि आसमान से उनके लिए खाना आता था और वह और उनके साथी खाते थे।

पवित्र कुरआन समस्त ईश्वरीय पैग़म्बरों का परमदायित्व यह मानता है कि वे लोगों को एकेश्वरवाद की ओर आमंत्रित करें और अन्याय व अत्याचारियों से दूरी करें। महान ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरे नह्ल में कहता है कि बेशक हमने हर जाति में एक पैग़म्बर भेजा है ताकि वह कहे कि ईश्वर की उपासना करें और अत्याचारियों से दूरी करें। इस आधार पर हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम भी अत्याचारियों से संघर्ष करते थे। बनी इस्राईल जाति की जो स्थिति थी उसके दृष्टिगत हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम ने उस जाति का ध्यान ज्ञान की ओर मोड़ा। इसी प्रकार उन्होंने दुनिया के भूखे विद्वानों और दिखावा करने वाले लोगों से बनी इस्राईल जाति को दूर रखने के लिए बहुत प्रयास किये। एक स्थान पर हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम कहते हैं” आपसे कहता हूं कि तुममें सबसे बुरा वह विद्वान है जो दुनिया को अपने ज्ञान पर प्राथमिकता दे और दुनिया से प्रेम करे, सूरज के विस्तृत प्रकाश का अंधे के लिए कोई लाभ नहीं है क्योंकि वह नहीं देख सकता और विद्वान के ज्ञान का भी कोई लाभ नहीं है अगर वह अपने ज्ञान पर अमल नहीं करता है।"

दोस्तो हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम का जन्म दिवस इस्लाम और ईसाई धर्म के समान बिन्दुओं पर अधिक ध्यान देने का अच्छा अवसर है। हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम और हज़रत मरियम दोनों वे महान हस्तियां हैं जिसे मुसलमान और ईसाई दोनों मानते हैं। इसी प्रकार इस्लाम में हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम को एक मार्गदर्शक और मुक्तिदाता के रूप में देखा जाता है और इस्लामी रवायतों में आया है कि जब महामुक्तिदाता हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़हूर होगा यानी लोगों की नज़रों के सामने प्रकट होंगे तो हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम भी उनके साथियों में शामिल होंगे। अतः हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम और हज़रत ईसा मसीह अलैहिस्सलाम की शिक्षाएं समान होंगी। उनकी शिक्षाओं के समान बिन्दुओं को आधार बनाकर समाजों की बहुत सी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है और समाजों के एक दूसरे से निकट होने की भूमि प्रशस्त की जा सकती है। आज अनेकेश्वरवाद, अत्याचार से संघर्ष, समाज में निर्धनता को दूर करने के लिए प्रयास करना, अत्याचार से पीड़ित लोगों की सहायता और शांति व सुरक्षा के लिए प्रयास करना वे चीज़ें हैं जिनका एकेश्वरवाद के आधार पर विकल्प ढूंढ़ा कर समाज की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। दोस्तो एक बार फिर आप सबकी सेवा में हज़रत ईसा मसीह के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई प्रस्तुत करते हैं साथ ही उनकी मां हज़रत मरियम पर सलाम भेजते हैं कि उन्होंने इस प्रकार की महान हस्ती को जन्म दिया।


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*