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सैयद हसन नसरुल्लाह ने कैसे इस्राईलियों के अरमानों पर फेर दिया पानी? हमें क्यों यक़ीन है कि मस्जिदुल अक़सा में नमाज़ पढ़ने का उनका सपना जल्द होगा साकार?

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कैसे इस्राईलियों के अरमानों पर फेर दिया पानी? हमें क्यों यक़ीन है कि मस्जिदुल अक़सा में नमाज़ पढ़ने का उनका सपना जल्द होगा साकार?

हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस्राईल के सामरिक और राजनैतिक नेतृत्व में बहुत सारे लोगों के अरमानों पर बुरी तरह पानी फेर दिया जो उनकी बीमारी की अफ़वाहों से बड़ी उम्मीदें लगा बैठे थे और सैयद हसन नसरुल्लाह के उत्तराधिकारी के बारे में बातें कर रहे थे।

सैयद हसन नसरुल्लाह अलमनार टीवी चैनल की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ पर अपने भरपूर अंदाज़ में नज़र आए, पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान। उन्होंने एक घंटा 10 मिनट का लंबा भाषण दिया और इस बीच उन्हें सिर्फ़ एक बार खांसी आई जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह बीमारी वाली नहीं आम खांसी है।

यह तो सैयद हसन नसरुल्लाह की बहादुरी थी कि पिछले दो महत्वपूर्ण अवसरों पर उन्होंने उस हालत में भी भाषण दिया जब एलर्जी की वजह से उन्हें खांसी आ रही थी।

जब भी सैयद हसन नसरुल्लाह भाषण देते हैं पूरा इस्राईल बड़े ध्यान से सुनता है। लेकिन मंगलवार के भाषण पर तो सारे इस्राईलियों की बड़ी गहरी नज़र थी। क्योंकि उन्होंने ख़ूब अफ़वाह फैलाई थी कि सैयद हसन नसरुल्लाह कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। यही नहीं, सैयद हसन नसरुल्लाह के उत्तराधिकारी के रूप में सैयद हाशिम सफ़ीयुद्दीन के नाम की चर्चा भी होने लगी थी।

मंगलवार के भाषण में सैयद हसन नसरुल्लाह के चेहरे पर उनकी दिलकश मुस्कुराहट थी। उन्होंने सेहतयाबी के लिए दुआ करने वालों का आभार व्यक्त किया।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कुछ बिंदुओं पर बहुत ख़ास तौर पर बात कीः

एक तो उन्होंने संकट और आक्रोश में बुरी तरह डूबते जा रहे नेतनयाहू के बारे में चेतावनी दी कि वह जाते जाते कोई संकट खड़ा करने की कोशिश कर सकते हैं और हिज़्बुल्लाह हर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

दूसरी बात यह कि नसरुल्लाह ने अपने भाषण में यमन युद्ध पर विस्तार से बात की और बताया कि अमरीका इस साज़िश में पूरी तरह शामिल रहा है।

तीसरा बिंदु यह था कि उन्होंने अपने भाषण में फ़िलिस्तीन को हालिया जंग में मिलने वाली विजय को बहुत सराहा और भविष्य में इससे भी बड़ी विजय की बात कही। उन्होंने साफ़ साफ़ कहा कि क़ुद्स के समर्थन के लिए फ़िलिस्तीनी अपनी जान की क़ुरबानी देने के लिए तैयार हैं, अरबों और मुसलमानों की ज़िम्मेदारी है कि वह खुलकर फ़िलिस्तीनियों का समर्थन करें, उन्हें अकेला न छोड़ें क्योंकि वह सारे अरबों का प्रतिनिधित्व करते हुए इस्लामी जगत की प्रतिष्ठा और पवित्र स्थलों की रक्षा कर रहे हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने 25 मई के अपने भाषण में कहा था कि क़ुद्स और वहां स्थित पवित्र स्थलों को अगर हाथ लगाया गया तो क्षेत्रीय युद्ध छिड़ सकता है और हिज़्बुल्लाह ख़ामोश नहीं रहेगा। कल के भाषण में भी उन्होंने अपनी यह चेतावनी दोहराई बल्कि और भी साफ़ शब्दों में कहा कि मैं सबके साथ मस्जिदुल अक़सा में नमाज़ पढ़ने का ख़्वाब देख रहा हूं।

गज़्ज़ा युद्ध में फ़िलिस्तीनियों की विजय और वेस्ट बैंक और 1948 के अवैध अधिकृत इलाक़ों में फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के लिए बढ़ते समर्थन को देखते हुए लगता है कि यह सपना जल्द पूरा होने वाला है।

स्रोतः रायुल यौम


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