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सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में ट्रम्प और नेतनयाहू को क्या संदेश दिया? ईरानी सैनिकों के बारे में कौन सा राज़ खोला?

सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में ट्रम्प और नेतनयाहू को क्या संदेश दिया? ईरानी सैनिकों के बारे में कौन सा राज़ खोला?

अरब जगत में करोड़ों लोग हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह का भाषण बहुत ग़ौर से सुनते है क्योंकि वह अकेले अरब नेता हैं जो पूरे इस्लमी जगत और अरब जगत की समस्याओं और मूल मुद्दों विशेष रूप से फ़िलिस्तीन संकट की बात करते हैं, अमरीका और इस्राईल के साम्राज्यवादी मंसूबों से पर्दा उठाते रहते हैं और विश्वासघाती अरब सरकारों को बेनक़ाब करते रहते हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने क़रीबी साथी मुसतफ़ा बद्रुद्दीन की इस्राईली हमले में शहादत की बरसी पर अपने भाषण में कहा कि इस साल पिछले वर्षों से बढ़कर हमें नज़र आ रहा है कि अरब जगत ने फ़िलिस्तीन को उसके हाल पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सीरिया विभाजन की भयानक साज़िश से ख़ुद को बचाने में सफल रहा, इस साज़िश पर अरबों डालर ख़र्च किए गए थे मगर इस लड़ाई में सीरियाई सरकार और जनता अपने प्रतिरोध और संकल्प से कामयाब हुई और उसके घटकों ने आख़िर तक उसका साथ दिया।

इन दोनों बातों को सामने रख कर बहुत अच्छी तरह समझा जा सकता है कि सीरिया पर क़ब्ज़ा करने की कितनी भयानक साज़िश चल रही है, सीरिया पर इस्राईल क्यों बार बार हमले कर रहा है? अगर सीरियाई सरकार भी फ़िलिस्तीन का समर्थन करना बंद कर देती, दूसरों की तरह वह भी इस्राईल की ख़ुशामद शुरू कर देती और रिश्वत के रूप में अरब सरकारों की ओर से पेश किए जाने वाले अरबों डालर स्वीकार कर लेती तो यह युद्ध न होता जो 9 साल से जारी है।

यह बात भी महत्वपूर्ण है कि सैयद हसन नसरुल्लाह जैसी इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे की बड़ी हस्ती ने अपने बड़े कमांडर मुसतफ़ा बद्रुद्दीन की शहादत की बरसी पर फ़िलिस्तीन का मुद्दा उठाया और यह भाषण फ़िलिस्तीन को हड़पे जाने की भयानक घटना नकबह दिवस की वर्षगांठ से दो दिन पहले दिया। 72 साल पहले इसी दिन फ़िलिस्तीन पर ज़ायोनियों ने क़ब्ज़ा किया और 1 करोड़ फ़िलिस्तीनियों को विस्थापित कर दिया था। सैयद हसन नसरुल्लाह ने फ़िलिस्तीन के बारे में अपना ठोस स्टैंड एसे समय दोहराया है जब अरब देशों ख़ास तौर पर सऊदी अरब के टीवी चैनलों से इस्राईल के साथ दोस्ती के लिए प्रोत्साहित करने वाले सीरियल प्रसारित किए जा रहे हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में इस्राईल के गहरे घाव पर उंगली रखी। उन्होंने कहा कि सीरिया में मिसाइल निर्माण से संबंधित जो भी युनिट है इस्राईल उस पर हमला करता है। क्योंकि वह सीरिया और उसके घटकों को अपने अस्तित्व के लिए गंभीर ख़तरा समझ रहा है। इन मीसाइलों ने समीकरणों को बदल दिया और शक्ति का संतुलन अब इस रूप में पहुंच गया है कि ईरान के नेतृत्व वाली रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़ का पलड़ा भारी है।

सैयद हसन नसरुल्लाह अपने भाषणों में बेहद महत्वपूर्ण तथ्यों से पर्दा हटाने में कभी नहीं हिचकिचाते चाहे वह सीरिया के रणक्षेत्र की बात हो, इराक़ के महत्वपूर्ण पटल का मुद्दा हो या ईरान की रणनीति का सवाल हो। वह अपने भाषणों में बहुत से जटिल सवालों के जवाब दे जाते हैं। इसीलिए उनके भाषण केवल इस्लामी जगत और अरब जगत नहीं बल्कि ख़ुद इस्राईल में भी बहुत ध्यान से सुने जाते हैं। हम यह बात शायद हज़ारवीं बार कह रहे हैं कि इस इंसान को पता नही नहीं कि झूठ क्या होता है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में कहा कि सीरिया में ईरानी फ़ोर्सेज़ नहीं हैं बल्कि केवल ईरानी सलाहकार मौजूद हैं, केवल एक बार ईरान ने अपनी फ़ोर्सेज़ भेजी थीं और वह हलब की लड़ाई का मौक़ा था। इस मौक़े पर ईरान ने दो महीने के लिए अपनी फ़ोर्सेज़ भेजी थीं। जब सीरियाई सेना और घटकों को इस बड़ी लड़ाई में विजय मिल गई तो ईरानी फ़ोर्सेज़ वापस चली गईं। सैयद हसन नसरुल्लाह ने जो कहा वही हक़ीक़त है।

इस्राईल सीरिया पर जो हमले कर रहा है उनसे उसका लक्ष्य पूरा होने वाला नहीं है क्योंकि एक तो अब बहुत देर हो चुकी है, हज़ारों की संख्या में मिसाइल हिज़्बुल्लाह और सीरियाई सेना को मिल चुके हैं और दूसरे यह कि इन मिसाइलों का निशाना अचूक है और ईरान के नेतृत्व वाले फ़्रंट को इस लड़ाई में विजय मिल चुकी है। इस्राईल की वायु सेना हर लड़ाई में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी मगर अब वह बेअसर हो चुकी है क्योंकि मिसाइल ताक़त ने नए समीकरण स्थापित कर दिए हैं। तो इस्राईल अपने हमलों के बारे में जो भी दावे करता है वह केवल जनमत को भ्रमित करने की कोशिश है।

स्रोतः रायुल यौम


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