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सैयद हसन नसरुल्लाह के तूफ़ान मचा देने वाले इंटरव्यू का आनन फ़ानन में नेतनयाहू ने क्यों दिया जवाब? इस साक्षात्कार की किस बात ने इ

सैयद हसन नसरुल्लाह के तूफ़ान मचा देने वाले इंटरव्यू का आनन फ़ानन में नेतनयाहू ने क्यों दिया जवाब? इस साक्षात्कार की किस बात ने इ

अगर अरब जगत की बात की जाए तो लगभग चालीस साल पहले सितम्बर 1970 में मिस्र के राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर के निधन के बाद कोई भी नेता ऐसा नहीं आया जिसके भाषण सुनने के लिए लोग टीवी के सामने कई कई घंटे बैठे रहें।

हां जब हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस आंदोलन की कमान संभाली और जनमत के सामने आए तो फिर स्थिति बदल गई। अब अरब जगत के दर्शक और श्रोता लगातार दो घंटे यहां तक कि इससे भी अधिक समय तक उनके भाषण और इंटरव्यू सुनने और देखने के लिए लालायित रहते हैं। केवल इस वजह से नहीं कि वह बहुत अच्छे वक्ता हैं और उनके भाषण में बड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और सटीक विशलेषण होता है। बल्कि इस वजह से भी कि पूरे अरब जगत में उनके प्रति बड़ा विश्वास है और वह विचित्र साहस के मालिक हैं। वह अरब व इस्लामी जगत  के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे अर्थात फ़िलिस्तीन समस्या और बैतुल मुक़द्दसे के विषय पर अपना ध्यान केन्द्रित रखते हैं और इलाक़े में अमरीकी योजनाओं के सामने चुनौती बनकर खड़े हो जाते हैं।

अलमनार टीवी चैनल को जो इंटरव्यू सैयद हसन नसरुल्लाह ने शुक्रवार की शाम को दिया उस करोड़ों लोगों ने देखा। उनके समर्थकों, विरोधियों यहां तक कि इस्राईलियों और इस्राईली नेताओं ने यह इंटरव्यू प्रत्यक्ष रूप से देखा। यही कारण था कि इस्राईली नेतृत्व ने मीडिया को इस इंटरव्यू की ख़बरें देने और उसकी समीक्षाए छापने और प्रसारित करने से रोक दिया। इसलिए कि इस इंटरव्यू की ख़बरें तथा इसके बारे में समीक्षाएं इस्राईलियों को भयभीत कर सकती हैं।

इस्राईली मीडिया पर नज़र दौड़ाने से पता चला कि सैयद हसन नसरुल्लाह के इंटरव्यू की जिस बात ने इस्राईलियों को सबसे अधिक भयभीत किया वह यह थी कि सैयद हसन नसरुल्लाह ने अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के मानचित्र की ओर इशारा कर दिया और वह टारगेट भी बता दिए जो युद्ध छिड़ जाने की स्थिति में ध्वस्त कर दिए जाएंगे।

यह बात सही है कि सैयद हसन नसरुल्लाह ने हिज़्बुल्लाह के ताक़तवर और सटीक मिसाइलों की बात की लेकिन इस्राईलियों को सबसे अधिक भयभीत करने वाली बात यह थी कि सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि इस्राईल को तबाह करने के लिए परमाणु या रासायनिक हथियार की ज़रूरत नहीं है बल्कि एक सामान्य सा मिसाइल इस्राईल के अमूनिया के भंडार पर गिर गया तो दसियों हज़ार नहीं लाखों इस्राईली मारे जाएंगे।

इस्राईल के भीतर फैले भय को देखते हुए नेतनयाहू ने तत्काल जवाबी बयान दिया और कहा कि वह हिज़्बुल्लाह को तबाह कर देंगे।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस्राईल को पाषाण काल में पहुंचा देने की बात कही है और ठोस इरादे के साथ कहा है कि वह मस्जिदुल अक़सा में नमाज़ पढ़ेंगे। जब सैयद हसन नसरुल्लाह नमाज़ पढ़ेंगे तो उनके पीछे करोड़ों मुसलमान नमाज़ पढ़गें और यह आरज़ू तब पूरी होगी जब फ़िलिस्तीन इस्राईलियों के क़ब्ज़े से आज़ाद हो जाएगा। यह आरज़ू असंभव नहीं है। बीबीसी के वरिष्ठ टीकाकार जान सिम्पसन ने इस्राईली सरकार के गठन के पचास साल पूरे होने पर अपनी श्रंखलाबद्ध रिपोर्ट में कहा था कि इस्राईल भीतर और आसपास हालात  इतने बदल गए हैं कि इस बात की संभावना बहुत कम है कि इस्राईल अपनी उम्र के 100 साल पूरे कर पाएगा।

नेतनयाहू की धमकी से कोई भी डरने वाला नही है क्योंकि इस्राईली सेना लगातार युद्ध हार रही है। सैयद हसन नसरुल्लाह युद्ध  नहीं चाहते और हमें लगता है कि नेतनयाहू भी युद्ध नहीं चाहते लेकिन युद्ध होना तय है। सवाल यह है कि युद्ध हुआ तो इस्राईल का क्या अंजाम होगा? लाखों मिसाइल जब इस्राईल पर बरसेंगे तो उसकी रक्षा किस तकनीक से होगी?

ज़माना बदल चुका है अब इस्राईल युद्ध के नाम से कांप उठता है। महान है ईश्वर जो हालात को बदलने वाला है।


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