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सूडान की अंतरिम परिषद के प्रमुख ने नेतनयाहू से मिलकर फ़िलिस्तीन ही नहीं सूडानी जनता की पीठ में भी खंजर घोंपा है, जनरल बुरहान की

सूडान की अंतरिम परिषद के प्रमुख ने नेतनयाहू से मिलकर फ़िलिस्तीन ही नहीं सूडानी जनता की पीठ में भी खंजर घोंपा है, जनरल बुरहान की

यह एलान हुआ कि सूडान की अंतरिम परिषद के प्रमुख जनरल अब्दुल फ़त्ताह बुरहान ने योगांडा में इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू से दो घंटे की लंबी मुलाक़ात की जिसमें इस बात पर सहमति बनी कि सूडान और इस्राईल के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किए जाएं।

यह सूडान की जनता और उस सूडानी क्रान्ति के पीठ में छुरा घोंपने के समान है जिन्होंने जनरल बुरहान को कुछ ही समय के लिए ही सही सत्ता में पहुंचाया है। दूसरी बात यह है कि इस प्रकार की हरकतें करके वह अगर सूडान की समस्याएं हल करना चाहते हैं तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि हल होने के बजाए समस्याएं और अधिक जटिल हो जाएंगी।

सूडान की समस्या की वजह यह नहीं है कि इस्राईल से उसके संबंध नहीं हैं बल्कि समस्या की वजह देश में फैला भ्रष्टाचार है।

योगांडा में जनरल बुरहान और नेतनयाहू की मुलाक़ात करवाने में इमारात ने ख़ास भूमिका अदा की। यह बात समझ में नहीं आती कि इमारात क्यों अरब जगत के ठोस सिद्धांतों को लगातार कुचल रहा है और इस्राईल की सेवा में लगा हुआ है। यदि इमारात को लगता है कि इस प्रकार की भूमिका निभा कर वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत कर रहा है तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है। इसलिए कि जब अरब जगत पतन का शिकार है तो इमारात कैसे ख़ुद को बचा सकेगा। इस्राईल 1973 के बाद से अपने सारे युद्ध हारा है इसलिए इमारात का इस्राईली मदद पर भरोसा करना मूर्खता ही है।

यहां हम एक सवाल जनरल बुरहान से करना चाहते हैं। वर्ष 1979 में कैंप डेविड समझौते के बाद इस्राईल से रिश्ते स्थापित करके क्या मिस्र के हालात अच्छे हो गए या पहले से ज़्यादा ख़राब हो गए? या अरबा घाटी समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जार्डन ने अपनी राजधानी अम्मान में इस्राईली दूतावास खुलवाया और वहां इस्राईली झंडा लहराने लगा तो जार्डन के आर्थिक हालात में सुधार हो गया या वहां ग़रीबी और समस्याएं और भी बढ़ गईं?

फ़िलिस्तीनी प्रशासन तो इस्राईल से ओस्लो समझौता करके उसके हाथ का खिलौना बन गया और उसने इस्राईलियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभाल ली तो क्या उसके हालात बेहतर हो गए या आज उसे डील आफ़ सेंचुरी जैसी भयानक साज़िश से रूबरू होना पड़ रहा है?

निश्चित रूप से सूडान की जनता जिसने हमेशा फ़िलिस्तीन का साथ दिया है हालांकि उसे इसकी भारी क़ीमत भी चुकानी पड़ी है इस बार भी वह चुप नहीं रहेगी और सूडान को इस्राईल से क़रीब करने की साज़िश को नाकाम बनाएगी। इस समय जनरल बुरहान की मनमानी के खिलाफ़ सूडान के क्रान्तिकारी नेताओं ने बयान देना शुरू कर दिया है और नेतनयाहू से उनकी मुलाक़ात की घोर निंदा की है। जनरल बुरहान कहते हैं कि उन्होंने जो कुछ किया वह राष्ट्रीय हित में किया लेकिन उनसे सवाल किया जा रहा है कि राष्ट्रीय हित के बारे में क्या उनकी समझ देश की जनता की समझ से अलग है और अगर अलग है तो वह अपनी सोच में सुधार करें!

साभार रायुल यौम


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