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सीरिया से बाहर निकलने का अमरीकी फ़ैसला नेतनयाहू के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा है, क्या इस्राईल हिज़्बुल्लाह की सुरंगें खोज का ढिंढोरा

सीरिया से बाहर निकलने का अमरीकी फ़ैसला नेतनयाहू के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा है, क्या इस्राईल हिज़्बुल्लाह की सुरंगें खोज का ढिंढोरा

अमरीका ने सीरिया से अपने सैनिक बाहर निकालने का एलान किया तो यह ख़बर इस्राईल पर बिजली बनकर गिरी। इस्राईली मीडिया को देखा जाए तो यह विचार आम है कि ट्रम्प प्रशासन ने यह फ़ैसला करके वास्तव में इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के मुंह पर करार तमाचा जड़ दिया है जो ईरान के ख़तरे का ढिंढोर पीट कर खुद को पीड़ित दिखाने और मदद हासिल करने की रणनीति पर चल रहे थे।

शायद इस्राईल को अमरीका के इस निर्णय का पहले ही अनुमान हो गया था इसलिए उसने लेबनान से मिलने वाली सीमा पर हिज़्बुल्लाह की सुरंगें खोजने का अभियान शुरू कर दिया और इस अभियान में चार सुरंगें भी खोज निकालीं।

यह बिंदु भी महत्वपूर्ण है कि इस सैनिक आप्रेशन की निगरानी करने वाली इस्राईली सेना की युनिट ने केवल अमरीका के सीएनएन टीवी चैनल के पत्रकार को एक सुरंग के भीतर जाने और वहां वीडियोग्राफ़ी करने की अनुमति दी। इस तरह इस्राईल ने अमरीका में नीति निर्धारकों को यह संदेश दिया कि उसे हिज़्बुल्लाह और ईरान से ख़तरा है और इस ख़तरे से निपटने के लिए अमरीका को चाहिए कि वह इस्राईल का साथ देता रहे।

इस विचार को बल इस बात से मिलता है कि हिज़्बुल्लाह के क़रीबी सूत्रों के हवाले से कुछ संचार माध्यमों ने यह ख़बर दी कि जिन सुरंगों को खोजने का इस्राईल ने दावा किया है उनके बारे में तो वर्ष 2010 में ही पता चल चुका था क्योंकि इस्राईली इंटैलीजेन्स का एक एजेंट लेबनान में हिज़्बुल्लाह की इंटैलीजेन्स द्वारा पकड़ लिया गया था और पूछगछ में इस एजेंट ने स्वीकार किया था कि उसने इन सुरंगों के बारे में इस्राईली इंटैलीजेन्स को सूचना दे दी थी। उस समय इस्राईल ने इन सुरंगों के बारे में कोई बात नहीं की थी मगर अब इन्हीं सुरंगों को एक गंभीर ख़तरे के रूप में प्रचारित कर रहा है तो इसका उद्देश्य यही है कि अमरीका को मदद जारी रखने पर तैयार कर सके।

ट्रम्प ने सीरिया से सेना वापस बुलाने का जो फ़ैसला किया उससे यह अंदाज़ा होता है कि ट्रम्प प्रशासन इस्राईल के तर्कों से संतुष्ट नहीं है या फिर यह कारण है कि ट्रम्प अमरीका फ़र्स्ट के अपने नारे और अपनी नीति पर इस तरह ध्यान केन्द्रित किए हुए हैं कि वह अन्य बिंदुओं और विषयों को प्राथमिकता में नहीं रखना चाहते। ट्रम्प ने सीरिया के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान से भी सैनिकों की वापसी का एलान किया है और यह संभावना भी जताई जा रहा है कि इराक़ में तैनात 5200 से अमरीकी सैनिकों की वापसी की भी घोषणा कर दी जाएगी।

अमरीका के फ़ैसले से इस्राईल को तो झटका लगा ही है बिनयामिन नेतनयाहू की स्थिति बहुत कमज़ोर हो गई है क्योंकि इस्राईल के भीतर उन्होंने यह धारणा पैदा कर दी थी कि वह ट्रम्प प्रशासन से जिस प्रकार का चाहें फ़ैसला करवा सकते हैं और मध्यपूर्व के बारे में कोई भी बड़ा फ़ैसला लेने से पहले अमरीकी सरकार नेतनयाहू को विश्वास में ज़रूर लेती है। अब जो बेइज़्ज़ती नेतनयाहू को उठानी पड़ी है उसे धोने के लिए नेतनयाहू के कार्यालय ने मीडिया को यह ख़बर लीक की है कि रूसी राष्ट्रपति पुतीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार निकोलाय पेट्रोशेफ़ ने इस्राईली प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार मेयर बिन शबात से संपर्क करके यह अनुरोध किया था कि इस्राईल मास्को और वाशिंग्टन के बीच समझौता करवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाए। मगर नेतनयाहू ने मास्को का यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

विशलेषकों का मानना है कि नेतनयाहू ने अमरीका में अपनी गहरी पैठ की धारणा फैलाकर इस्राईल के भीतर अलग अलग गलियारों और आम लोगों को भी प्रभावित करने का प्रयास किया और इसी रणनीति से उन्होंने अरब देशों पर भी अपनी धाक बिठाने की कोशिश की मगर अब ट्रम्प के फ़ैसले के बाद उन्हें इतना ही बड़ा नुक़सान भी पहुंचा है जिसकी वह भरपाई नहीं कर पाएंगे।


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