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सीरिया में कैसे अरब क़बीलों ने अमरीकी योजना पर फेरा पानी? अमरीकी प्रतिनिधियों को अपमानित करके खदेड़ा, क्या सीरिया के तेल के कुएं अब आज़ाद होने वाले हैं?

सीरिया में कैसे अरब क़बीलों ने अमरीकी योजना पर फेरा पानी? अमरीकी प्रतिनिधियों को अपमानित करके खदेड़ा, क्या सीरिया के तेल के कुएं अब आज़ाद होने वाले हैं?

अमरीका और उसके घटकों के ख़िलाफ़ सीरिया में प्रतिरोध तेज़ हो गया है इसके इशारे साफ़ नज़र आने लगे हैं। पूर्वी फ़ुरात के इलाक़े में जहां सीरिया के तेल के कुएं और गैस के फ़ील्ड हैं अमरीकी सैनिकों और उनसे जुड़े लोगों पर हमले तेज़ हो गए हैं।

अमरीका को अच्छी तरह एहसास हो गया है कि ख़तरा उसकी ओर रेंगते हुए आगे बढ़ रहा है और उसने इस इलाक़े में कुर्द फ़ोर्सेज़ को अपनी योजनाओं की बैसाखी बनाकर दरअस्ल बड़ी ग़लती कर दी। यही वजह है कि अब अमरीका ने इलाक़े में अरब क़बीलों के सरदारों के पास अपने दूत भेजे हैं और यह संदेश दिया है कि सब मिलकर एक फ़ोर्स बनाएं जो अमरीकी सेना के साथ मिलकर सीरियाई सेना से युद्ध करे।

पूर्वी फ़ुरात के इलाक़े से आने वाली ख़बरें बताती हैं कि अमरीकी सैनिक अधिकारी, सीआईए के एजेंटों और स्थानीय अनुवादकों के साथ कई शहरों और बस्तियों में गए और उन्होंने बनी सबआ सहित कई क़बीलों के सरदारों से मुलाक़ात की। अमरीकियों ने क़बायली सरदारों के सामने बड़े लुभावने प्रस्ताव रखे हैं।

मज़ेदार बात यह रही कि क़बायली सरदारों ने अमरीकी प्रस्ताव ठुकरा दिया और अमरीकी दूतों को बुरी तरह खदेड़ा। उन्होंने साफ़ कर दिया कि वह सीरियाई सरकार के वफ़ादार हैं और सरकार के साथ मिलकर अमरीकी क़ब्ज़े का मुक़ाबला करेंगे।

अमरीका की समझ में यह बात नहीं आ रही है कि ज़माना बहुत बदल गया है। अमरीका ने इराक़ पर क़ब्ज़ा करने के बाद वहां भी इसी योजना पर काम किया था मगर सीरिया में वह अपनी इस साज़िश को दोहरा नहीं सकता क्योंकि अमरीका का असली चेहरा अब सबके सामने आ चुका है। सबने देख लिए कि इराक़, सीरिया, लीबिया और यमन में अमरीकी योजनाओं से किस बड़े पैमाने पर तबाही मची है। सबको यक़ीन हो चुका है कि अमरीका झूठे वादे करने में माहिर है।

सीरिया और इराक़ से अमरीकियों को मार भगाने के लिए प्रतिरोध शुरू हो चुका है जो दोनों देशों से आख़िरी अमरीकी सैनिक के निकल जाने तक रुकेगा नहीं।

हम शुक्रिया अदा करते हैं महान और सम्मानीय अरब क़बीलों का जिन्होंने अमरीकी पेशकश को ठुकरा दिया।

अमरीका हार चुका है, केवल सीरिया और इराक़ में नहीं बल्कि पूरे मध्यपूर्व में उसकी शिकस्त हो चुकी है। अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सेना को बिना शर्त बाहर निकलना पड़ा है इसी तरह सीरिया और इराक़ से भी उसे शिकस्त का मज़ा चखने के बाद निकलना पड़ेगा। आने वाले दिनों में बहुत सी अच्छी ख़बरें मिलने वाली हैं।

स्रोतः रायुल यौम


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