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सात हज़ार तालेबान बंदी अगर आज़ाद हो जाते हैं तो इससे अशांति बढ़ेगीः अशरफ़ ग़नी

सात हज़ार तालेबान बंदी अगर आज़ाद हो जाते हैं तो इससे अशांति बढ़ेगीः अशरफ़ ग़नी

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने 7000 तालेबान बंदियों की आज़ादी का खुलकर विरोध किया है।

अशरफ़ ग़नी ने कहा है कि देश में शांति के सुनिश्चित होने की गारेंटी से पहले वे तालेबान बंदियों को आज़ाद करने के हक़ में नहीं हैं।

जर्मनी पत्रिका श्पेगल को दिये इन्टरव्यू में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि हमने पिछले साल जेलों से 5000 तालेबान बंदियों को आज़ाद किया था।  उन्होंने कहा कि इन हज़ारों तालेबान बंदियों को स्वतंत्र करने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में न केवल यह कि शांति स्थापित नहीं हुई बल्कि इससे देश में अशांति बढ़ी है।

अशरफ़ ग़नी ने तालेबान को अत्याचारी गुट बताते हुए कहा कि इन अत्याचारियों ने हाल ही में काबुल में सैयदुश्शोहदा स्कूल पर हमला करके 85 छात्रों की हत्या की है।  उनका कहना था कि तालेबान, आतंकी संगठन अलक़ाएदा के साथ भी निकट का सहयोग करते हैं।

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान सरकार के साथ तालेबान के संबन्धों की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस्लामाबाद, तालेबान की आर्थिक सहायता करता है।  उन्होंने कहा कि तालेबान को आर्थिक सहायता देने के साथ ही पाकिस्तान उनको प्रशिक्षित करके अपने हिसाब से प्रयोग करता है।  अशरफ़ ग़नी ने कहा कि पाकिस्तान में तालेबान के बारे में फैसला करने वाली परिषदें, कोएटा परिषद, मीरानशाह परिषद और पेशावर परिषद हैं।

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने पश्चिम से मांग की है कि वह तालेबान का समर्थन करना छोड़ दे।


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