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सशस्त्र सेना दुश्मन की चुनौतियों के मुक़ाबले में मज़बूत दीवार हैः इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता

सशस्त्र सेना दुश्मन की चुनौतियों के मुक़ाबले में मज़बूत दीवार हैः इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता

ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने कहा है कि हमारी सशस्त्र सेना दुश्मन की चुनौतियों के मुक़ाबले में मज़बूत दीवार और बाहरी और घरेलू दुश्मनों की कड़ी चुनौतियों के मुकाबले में ढ़ाल है।

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि हमारी सशस्त्र सेना का गौरव यह है कि वह देश व राष्ट्र के लिए मज़बूत दुर्ग है जैसाकि हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया है कि सेना ईश्वर के आदेश से लोगों व जनता का दुर्ग है। उन्होंने कहा कि इसका वास्तविक अर्थ हमारे देश में व्यवहारिक हो गया है और आज सशस्त्र बल, सेना, सिपाहे पासदारान, सुरक्षा बल और स्वंय सेवी बल वास्तविक अर्थ में दुश्मन की चुनौतियों के मुकाबले में ढ़ाल हैं।

सर्वोच्च नेता ने कहा कि एक देश की सुरक्षा समस्त प्रगतियों का आधार है और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण बात है जिस पर सशस्त्र सेना को ध्यान देना चाहिये।  उन्होंने बल देकर कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि वे दूसरों के भरोसे अपनी सुरक्षा कर सकते हैं उन्हें जान लेना चाहिये कि इसका भी स्वाद वे जल्द चखेंगे।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने सशस्त्र बलों के स्नातक समारोह में देश के पश्चिमोत्तर क्षेत्र के पड़ोसियों के बारे में कहा कि पश्चिमोत्तर की घटनाओं का समाधान, इन देशों में विदेशी सैनिकों के हस्तक्षेप को रोकना है।

वरिष्ठ नेता ने रविवार को अफ़सरिया और इमाम हुसैन विश्वविद्यालयों में सशस्त्र बलों के स्नातक समारोह को आनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि हमारे यह सशस्त्र बल, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मज़बूत क़िले की भांति हैं।  उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विदेशियों का हस्तक्षेप, मतभेदों का कारण और खुला घाटा है।  आपने कहा कि सारे कामों को विदेशियों के हस्तक्षेप के बिना और क्षेत्रीय देशों द्वारा ईरान की संप्रभुता और देश की सशस्त्र सेना को आदर्श बनाते हुए होना चाहिए।

वरिष्ठ नेता ने सुरक्षा को देश के विकास के लिए की जाने वाली सभी आवश्यक गतिविधियों का मूल ढांचा बताया।  उन्होंने विदेशियों पर भरोसा किये बिना सुरक्षा सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण काम बताया।  वरिष्ठ नेता के अनुसार ईरान के लिए तो यह आम बात है लेकिन विभिन्न देश यहां तक कि यूरोपीय देश भी इसका सामना कर रहे हैं।

सर्वोच्च नेता ने यूरोप और अमरीका की हालिया बयानबाज़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ यूरोपियों ने अमरीकी कार्यवाही को पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया।  उन्होंने कहा कि यूरोप को नेटो ही नहीं बल्कि अमरीका पर भरोसा न करके अपनी सुरक्षा को स्वयं ही सुनिश्चित करना चाहिए।

सर्वोच्च नेता का कहना था कि जब यूरोपीय देश, अमरीका पर अपनी निरभर्ता के कारण स्थाई सुरक्षा प्राप्त करने में कमी महसूस कर रहे हैं तो एसे में उन देशों का क्या होगा जिन्होंने अपने सशस्त्र बलों को अमरीका और दूसरे विदेशियों के नियंत्रण में दे रखा है।  आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने सुरक्षा के लिए दूसरों पर भरोसे को कल्पना मात्र बताया है।  उन्होंने कहा कि वे लोग जो इस कल्पना में खोए हुए हैं उनको जल्द ही थप्पड़ लगेगा क्योंकि किसी भी देश की सुरक्षा, युद्ध या संप्रभुता में विदेशियों का हस्तक्षेप, हमेशा की समस्याएं उत्पन्न करने वाला होता है।

वरिष्ठ नेता ने अफ़ग़ानिस्तान से अमरीका के सशस्त्र सैनिकों की वापसी को दिखावटी संप्रभुता का उदाहरण बताया।  उन्होंने कहा कि 20 साल पहले अमरीका ने तालेबान का तख़्ता पलटने के उद्देश्य से अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया था।  इन दो दशकों के दौरान अमरीकियों ने अफ़ग़ानिस्तान में हर प्रकार के अपराध और जनसंहार किये।  अरबों डाॅलर ख़र्च करने और बहुत अधिक नुक़सान उठाने के बाद वे सत्ता को तालेबान के ही हाथों सौंपकर भाग गए।  यह एसी वास्तविकता है जो अन्य देशों के लिए पाठ है।

वरिष्ठ नेता का कहना था कि अमरीकी और उस जैसे देशों की सेना की हालिवुडी तस्वीरें केवल दिखावे के लिए हैं क्योंकि उनकी वास्तविकता तो वहीं है जिसे सबने अफ़ग़ानिस्तान में देखा है।  उन्होंने पूर्वी एशिया के राष्ट्रों के बीच अमरीकी सेना से नफ़रत का उल्लेख करते हुए कहा कि अमरीकी जहां भी हस्तक्षेप करते हैं वहां की जनता में उनके विरुद्ध नफ़रत पैदा हो जाती है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि क्षेत्र की भलाई इसी में है कि क्षेत्र के सारे देश अपने राष्ट्र पर आधारित स्वतंत्र सेना के स्वामी हों जो पड़ोसियों के साथ समन्वय बनाकर रखें।  आपने कहा कि क्षेत्रीय सेनाएं, क्षेत्र की सुरक्षा को सुनिश्चित बना सकती हैं।  एसे में उन्हें इस बात की अनुमति नहीं देनी चाहिए कि विदेशी सैनिक अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप करें।


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