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सऊदी अरब ने आख़िरकार क़तर के सामने घुटने टेक दिए

सऊदी अरब ने आख़िरकार क़तर के सामने घुटने टेक दिए

सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने आधिकारिक रूप से क़तर के अमीर को फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद के शिखर सम्मेलन में शिरकत की दावत दी है।

हालांकि सऊदी अरब ने ईरान और आतंकवाद के समर्थन जैसे आरोप लगाकर अपने सहयोगी देशों के समर्थन से 2017 में क़तर का हुक्क़ा-पानी बंद कर दिया था और उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे।

सऊदी अरब और फ़ार्स खाड़ी के अन्य अरब देशों का कहना था कि जब तक क़तर अपनी विदेश नीति में मूल परिवर्तन नहीं करेगा, उसकी पूर्ण घेराबंदी और उसके ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध जारी रहेंगे।

लेकिन ज़मीनी, हवाई और समुद्री घेराबंदी के बावजूद, तेल और गैस से मालामाल फ़ार्स खाड़ी के  इस छोटे से देश ने घुटने टेकने के बजाए अपने पड़ोसी देशों की ग़ुंडागर्दी का मुक़ाबला किया और आज अपनी दहलीज़ पर उन्हें नाक रगड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, मिस्र और बहरैन ने क़तर के बहिष्कार का एलान करते हुए उसके सामने अल-जज़ीरा टीवी चैनल को बंद करने, ईरान, तुर्की और मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध तोड़ लेने जैसी 13 शर्तें रखी थीं। लेकिन क़तर ने किसी भी शर्त को स्वीकार करने और अपनी स्वाधीनता का सौदा करने से साफ़ इनकार कर दिया।

क़तर के मुक़ाबले में सऊदी अरब की इस हार से इस्लामी जगत का नेता बनने की रियाज़ की कोशिशों को बड़ा तगड़ा झटका लगेगा। इसलिए कि इससे फ़ार्स खाड़ी और क्षेत्र के अन्य अरब देशों को इस नतीजे पर पहुंचने में कोई दिक्क़त नहीं होगी कि सऊदी अरब से अलग होकर न यह कि कोई ख़तरा नहीं है, बल्कि अपनी स्वाधीनता से समझौता किए बग़ैर भी आगे बढ़ा जा सकता है।


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