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वो कौन है?

वो कौन है?

तहरीर : सय्यद इब्राहीम हुसैन (दानिश हुसैनी) ..........................................

आज एक दर्द भरी दास्तान बयान करना चाहता हूँ!

आज मैं आपको रुलाना चाहता हूँ!

आज एक ऐसी कहानी लिखना चाहता हूँ कि जो सीधे आपकी आत्मा पर वार करे!

आज एक ऐसा किरदार पिरोना चाहता हूँ कि जिसकी आपने कभी कल्पना भी ना की हो!

आज एक ऐसा किरदार उकेरना चाहता हूँ कि जो प्रेमचंद्र के किरदारों के पुनर्जन्म की तरह से लग सके!

आज आपको अपने क़लम के जलवे दिखाना चाहता हूँ!!

आज आपकी रोती बिलखती हुई आँखों में अपनी तारीफ़ों के अविश्वसनीय और अविस्मर्णीय आकाश देखना चाहता हूँ!

आज मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी वाह वाही लूटना चाहता हूँ!

लेकिन आख़िर कैसे?

किस प्रकार?

क्या करूँ?

कहानी क्या बनाऊं?

कौन सा किरदार उकेरूँ?

किस चेहरे को दिखाऊँ?

क्या मैं पैसों और शोहरत के भूखे किसी फ़िल्म प्रोडयूसर या स्क्रिप्ट राइटर की तरह किसी ग़रीब बेसहारा लाचार औरत की छवि उकेरूँ?

या फिर लिफ़ाफ़े और वादे के लालची किसी धर्म का नेतृत्व करते किसी धर्म गुरु की तरह भूतकाल के बिलखते हुए बच्चों और उजड़े हुए लोगों के दर्द को लिफा़फों और वादों के लिए ज़बरदस्ती के मिर्च मसाले के साथ बयान करूँ?

वैसे अगर आप चाहें तो मैं किसी कार्पोरेट मीडिया की तरह टीआरपी के लिए मोहल्ले और उधारी की लड़ाई को धार्मिक दंगों का रंग देते हुए पहले उस छोटी लड़ाई में आग में घी डालने का काम भी कर सकता हूँ और फ़िर उन दंगों में मरे हुए जवानों की नई नवेली शादी और लाचार माओं बहनों जैसी दर्दभरी रुदादें भी लिख सकता हूँ!

या फिर इराक़,  सीरिया या यमन में अपने माँ – बाप की लाशों के बीच बैठे किसी मासूम बच्चे पर कोई शायरी भी बना सकता हूँ!

अरे हाँ शायद सोशल मीडिया के किसी बहादुर और ज़िम्मेदार व्यक्ति का किसी कमज़ोर और बेगुनाह या सच बोलने वाले का बेदर्दी से किये जा रहे मर्डर के किये गये लाइव स्ट्रीम को सजा कर लिख देना आपको रुलाने के लिए काफ़ी हो!

और अगर इन सब से भी काम ना चले तो किसी लेखक की लिखी हुई सच्चे बलात्कार की दास्तान तो आपको झिंझोड़ ही देगी!

लेकिन वैसे अब ये भी सच है कि ये सारे तरीक़े हथकंडे तो पुराने हो चले हैं लिहाज़ा मुझे कुछ नया करना ही होगा!

क्यूंकि अब हमारे - आपके रोने के लिए ना तो जौन एलिया की दर्द भरी शायरी नई लगती है और ना ही चुनावों के समय किसी नेता का ग़रीबों दलितों के साथ उनकी खटिया पे बैठ कर खाना और उनके बच्चों को पुचकारना उनकी बेरोज़गारी के बारे में बात करना ही कोई फ़ायदा पहुँचाता है

तो फ़िर आख़िर करूँ तो करूँ क्या?

आह्ह्ह्ह!

अब मुझे भी अफ़सोस हो रहा है और वो इसलिए कि मुझे बातों की रौ में तवज्जोह ही नहीं रही कि अब आपकी नज़रों में बना मेरे क़लम का भौकाल ज़रा कम हो चला हैं क्यूंकि तहरीर इतनी लम्बी हो चुकी है लेकिन मैं अब तक कोई किरदार नहीं ढूंढ सका हूँ!

.....

वैसे अब बस भी करता हूँ और सीधी बात करते हुए आपसे निवेदन करता हूँ कि मैं आज की अपनी इस तहरीर में अपने इस रवय्ये के लिए माफ़ी चाहता हूँ लेकिन मैं आपको अपने मुद्दे तक लाने के लिए ज़रा टहलाने घुमाने तहरीर को अलग अलग रंग-रूप देने और अजब ग़ज़ब झरोखे दिखाने पर मजबूर था!

मैं मजबूर था! क्योंकि आज मुझे उस किरदार के बारे में बात करनी थी कि जो आपके इर्द गिर्द घूमता है!

 

मैं मजबूर था! क्यूंकि आज मुझे आपकी मुलाक़ात उस किरदार से करानी थी कि जिसे आप भली भातिं पहचानते हैं!

मैं मजबूर था! क्यूंकि आज मैं आपको उस किरदार से मिलवाना चाहता था कि जिसका नाम मात्र ही आपको उकता देगा!

जी हां लीजिये और मिलिये उस किरदार से कि जो आपकी डबल ट्रिपल स्टोरी बिल्डिंग को ख़रीदने के बजाए सिर्फ़ छूने भर के सपने सजाता है!

लीजिये देखिये एक ऐसा चेहरा कि जो अपने कम उम्री में भी टेंशन से उभरी झुर्रियों वाले मासूम से चेहरे की ख़ूबसूरती का अंदाज़ा लगाने और कचड़े से भरी ऊँगलियों से मट मैले बालो को कंघी करने के लिए किसी हाईटेक गाड़ी के साइड मिरर में पति से बेवजह की डांट खाकर भी मुसकुरा रही पत्नी की तरह डांट डपट भी खा लेता है और कभी कभी तो इस जुर्म के बदले में गाड़ी साफ़ करने की सज़ा भी हंसते हुए काट देता है!

एक ऐसा किरदार जो कुछ लीटर दूध और कुछ किलोग्राम सब्ज़ी की चोरी के इल्ज़ाम में पकड़ा जाता है लेकिन उसके नाम पर चंदा लूटने वाले सफ़ेद कालर मुजरिम सिस्टम को धता बताते हुए बेखौफ़ हो कर अपनी नस्लों को फ़ाइव स्टार होटल जैसे घरों में पालते हैं!

जी हाँ!

ये एक ऐसा किरदार है कि जिसका जिस्म किसी सड़क के किनारे कुछ फटी हुई बोरियों के ऊपर ग़रीबों के लिए आन्दोलन कर रहे नेता जी की रैली को कवर करने जा रही मीडिया की सफ़ारी गाड़ियों की रफ़्तार से उठ रही गर्द से अटा हुआ होता है!

जी हाँ ये वही किरदार है कि जो ठंड के मौसम में माहौल में अपनी बेखौफ़ रफ़्तार से गर्मी पैदा करती एसी समेत दूसरे साज़ो समान से लैस ट्रेन के चालू डिब्बे के शौचालय के बग़ल में सरकार की हज़ारों - लाखों करोड़ की योजनाओं की तारीफ़ों के पुल बांधते समाचार पत्रों को ओढ़नी बनाये हुए अपने अंजाम से अनजान ठुसे हुए लोगों और शौचालय आरहे लोगों के पावं से कुचलते हुए अधूरा सो रहा होता है!

ये वही किरदार है कि जो कभी इसी ट्रेन को दुनिया से छुटकारा पाने मरने का सबसे आसान तरीक़ा भी बना लेता है!

अफ़सोस कि ये वही किरदार है कि जो अन्नदाता होते हुए भी अन्न के एक दाने को तरस कर अपने ही लगाए पेड़ों को सूली बना लेता है!

 

आह्ह्ह ये वही किरदार है कि जो हज़ारों लाखों करोड़ रुपए लेकर भागने वालों का कुछ ना कर पाने वाले बैंकों का कुछ हज़ार के लिए निवाला भी बन जाता है!

आह्ह्ह्ह्ह......

क्या आप अब भी उस किरदार को नहीं देख सके? क्या आप अब भी उस किरदार से अनजान हैँ ?

अरे ज़रा आँखें खोलिए और देखिये उस किरदार को कि जो आपके आस पास आपकी तंज़ीमों, सोसाइटियों, संस्थाओं , फ़ेसबुक , व्हाट्सएप ग्रूपों से अपना हक़ अपनी ज़िंदगी मांगने पर दुत्कारा जा रहा है भगाया जा रहा है!

अरे ज़रा देखिये उस किरदार को कि जिसकी इज्ज़त कुछ सौ या कुछ हज़ार की खातिर भरे बाज़ार में उछाली जा रही है!

माफ़ कीजिये लेकिन आँखें खोलिए और देखिये उस किरदार को कि जिसकी भूख उसकी अस्मिता तक बेचने पर मजबूर है!

आह मैं और कैसे पहचान कराऊँ..!

अरे!

मेरे प्यारे दोस्त! ये वो किरदार है कि जिसकी दी हुई इज्ज़त सबसे सच्ची और इसकी दी हुईं दुआएं दुनिया की हर चीज़ से ज़्यादा सस्ती हैं!

अरे मेरे प्यारे दोस्त! ये किरदार ग़रीबी है जो किसी भी क़ौम और समाज का हर एक पल जनाज़ा निकालती है!

ख़ुदा के वास्ते इस किरदार इस ग़रीबी को मक्कारी और बार बार मांगने या कई दफ़ा मदद पाने जैसे जुमलों में ना उलझाइए और ना ही इसे आज अभी के सब्र के बदले में बाद के मज़े का झुनझुना थमाइए!

ख़ुदा के वास्ते इस किरदार को आपकी ज़रूरत है और वो भी आज अभी इसी वक़्त!

ऐ मेरे दोस्तों! ऐ इंसानों उठो और अपनी ख़ुद ग़रज़ी लापरवाही , दूसरों के सिर मढ़ने की नींद को तोड़ो और देखो कि तुम्हारे आस पास अपनी साँसों की भीख मांगते हुए हज़ारों ज़रूरत मंद घूम रहे हैं जिनके आंसू महज़ आंसू ही नहीं बल्कि किसी भी समाज का गंदा खून है जिसकी सफाई की ज़िम्मेदारी हमपर है!

 

ऐ काश कि कुछ धोकेबाज़ों की वजह से इन ज़रूरत मंदों की ज़रुरतों का क़त्ल तो ना हो!

 

वरना क्या फ़ायदा उस अली के मानने के दावे का कि जिसके राज में कोई भूखे पेट नहीं सोया!

वरना क्या फ़ायदा उस हिंदुत्व के अनुयायी होने के दावे का कि जो वासुदेव कुटुम्बकम का पाठ देता हो!

बल्कि सच तो ये है कि यह वो किरदार है कि जिसके पेट की आग ना सिर्फ़ महज़ चंद रुपियों बल्कि कभी कभी तो सिर्फ़ एक वक़्त की रोटी के लिए इसके ज़मीर को बदलते हुए चोर ,उचक्का , बाज़ारू , क़ातिल बनाती है बल्कि यही भूख इसे एक दंगाई या आतंकवादी बना कर समाज को अनगिनत ज़िन्दा बमों के हवाले कर देती है!

और फिर यही आग ना सिर्फ़ समाज के घूँघट को जलाती है बल्कि सभ्यता और संस्कृति के ऐतिहासिक पन्ने भी राख कर देती है!

और फिर इतिहास उसकी ऐसी पहचान की वजह और उसके जलाए हुए पन्नों में अपने मतलब के शब्दों को ढूंढता फिरता है!

आपने मेरी तहरीर के इन शब्दों को पढ़ने में भी रुचि दिखाई जिसका मतलब है कि आपको समाज में कराहते इस किरदार का सचमुच दर्द है इसलिये आपसे निवेदन करता हूँ कि अपने आस पास के ज़रुरत मंदों की मदद करें ज़रूरत मंदों को रोज़गार दिलाएं उनकी भूंख मिटाएं और क़ौम के साथ ही समाज से भीख जैसी बीमारी ख़त्म करने और समाज की बेहतरी में अपना योगदान दीजिये!

अलबत्ता ये बता देना भी ज़रूरी है कि इस तहरीर से ना तो किसी भी इदारे , संस्था को या व्यक्तिगत रूप से मुझे किसी भी तरह की डोनेशन की सिफा़रिश की जा रही है और ना ही मैं ऐसी किसी डोनेशन को स्वीकार करता हूँ!

 

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