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वियेना में परमाणु वार्ता सफल हो या नाकाम दोनों हालतों से डरा हुआ है इस्राईल, कौन किसको पाषाण काल में भेजेगा ईरान या इस्राईल? अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा

वियेना में परमाणु वार्ता सफल हो या नाकाम दोनों हालतों से डरा हुआ है इस्राईल, कौन किसको पाषाण काल में भेजेगा ईरान या इस्राईल? अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा

आजकल इस्राईली जनरलों के बयान सुनिए तो वह ईरान को धमकियां दे रहे हैं कि अगर ईरान ने अपना मिसाइल कार्यक्रम, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय रसूख़ ख़त्म न किया तो उसे पाषाण युग में भेज दिया जाएगा। यह दरअस्ल वियेना में जारी परमाणु वार्ता से इस्राईल में बुरी तरह फैले ख़ौफ़ की निशानी है।

वार्ता कामयाब हो या नाकाम दोनों स्थितियों में इस्राईल को नुक़सान उठाना पड़ेगा। अगर बातचीत सफल हुई तो ईरान पर लगे प्रतिबंध हटेंगे और उसके अरबों डालर दुनिया के अलग अलग देशों से उसके बैंकों में पहुंच जाएंगे। अगर वार्ता नाकाम हुई तो ज़्यादा से ज़्यादा यह होगा कि जंग हो जाएगी। अगर जंग हुई तो इस्राईल पाषाण युग में नहीं जाएगा बल्कि वह विलुप्त हो जाएगा क्योंकि ईरान के मिसाइल इस्राईल पर बारिश की तरह बरसेंगे। यही वजह है कि सऊदी अरब के इंटेलीजेन्स चीफ़ ईरान से बात करने के लिए चार बार बग़दाद गए ताकि इस तरह के अंजाम से सऊदी अरब को बचाएं क्योंकि अब अमरीका पर सऊदी अरब को भरोसा नहीं रह गया है।

ईरान ने साफ़ साफ़ कहा है कि वह वियेना वार्ता में केवल इसलिए शामिल हो रहा है कि उस पर लगे प्रतिबंध हटें और इस संदर्भ में पहला क़दम वाशिंग्टन को उठाना पड़ेगा।

हम यहां कुछ बिंदुओं को ख़ास तौर पर रेखांकित करना चाहेंगे,

1 ईरान ने अब तक यही कहा है कि वार्ता में अमरीकी प्रतिनिधिमंडल शामिल नहीं हो पाएगा क्योंकि ईरान अमरीका से प्रत्यक्ष बातचीत नहीं चाहता। हमें नहीं लगता कि ईरान अपनी इस शर्त से उस समय तक पीछे हटेगा जब तक अमरीका ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा नहीं लेता।

2 वार्ता शुरू होने का सीधा मतलब यह है कि इस्राईल की कोशिशें नाकाम हो गईं। इस्राईल अमरीका को ईरान के ख़िलाफ़ जंग में घसीटने के लिए पसीना बहा रहा था।

3 ईरान में इस समय सैयद इब्राहीम रईसी की सरकार है जो सुप्रीम लीडर के बहुत क़रीब हैं।

4 ईरान आज बड़ी सैनिक शक्ति बन चुका है और बहुत जल्द आर्थिक शक्ति बनने वाला है। उसने अमरीका के सारे प्रतिबंधों को झेल लिया। ईरान परमाणु देश बन चुका है।

5 ईरान ने अपने किसी भी प्रतिष्ठान में आईएईए के प्रमुख राफ़ायल ग्रोसी और उनके प्रतिनिधिमंडल को घुसने से रोक दिया। इस तरह ईरान ने साबित किया कि वह एक संप्रभु देश है और अपने फ़ैसले ख़ुद करता है।

6 अमरीका ने अपने बमबार विमान ईरान को डराने के लिए भेजे थे मगर नतीजा उलटा निकला। ईरान ने अपना स्टैंड नर्म नहीं बल्कि और कठोर कर लिया।

वियेना में मसला वार्ता के सफल या असफल होने का नहीं बल्कि यह है कि कौन सा पक्ष अपनी शर्तें मनवाने में कामयाब होता है ईरान या अमरीका? इलाक़े की घटनाओं और हालात को देखकर तो हमें यही लगता है कि पिछले छह दौर की वार्ताओं में अमरीका को पराजय हाथ लगी थी और सातवें दौर का नतीजा भी इससे अलग नहीं होगा।

अमरीका को इस मुसीबत भरी स्थिति में इस्राईल ने पहुंचाया है। उसे लगता था कि वह अमरीका को ईरान के ख़िलाफ़ जंग के लिए तैयार कर ले जाएगा क्योंकि ट्रम्प की मूर्खता से उसे बड़ी उम्मीदें थीं। अमरीका परमाणु समझौते से निकला तो आज उसे इसकी क़ीमत चुकानी पड़ रही है।

ईरान मज़बूत पोज़ीशन में है। ईरान रक्षा के क्षेत्र में आत्म निर्भर है और क्षेत्र में उसके घटक यानी लेबनान, इराक़, यमन और ग़ज़्ज़ा पट्टी उसका साथ छोड़ने वाले नहीं हैं। अमरीका की स्थिति यह है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में हार चुका है और इस हार से अमरीका के घटकों को बहुत सारे सबक़ मिले हैं। शायद इस्राईल में आजकल फैले ख़ौफ़ की वजह भी यही है।


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