अमरीकी षडयंत्रों की जानकारी ज़रुरी, सैयद हसन नसरुल्लाह

अमरीकी षडयंत्रों की जानकारी ज़रुरी, सैयद हसन नसरुल्लाह

लेबनान के हिज़बुल्लाह आंदोलन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने अमरीका पर अरब शासकों की पूर्ण निर्भरता की आलोचना करते हुए, मध्य पूर्व की वर्तमान अशांति को, वाशिंग्टन की नीतियों का परिणाम बताया।

लेबनान में आशूर की रात के अवसर पर अपने भाषण में सैयद हसन नसरुल्लाह ने अमरीकी षडयंत्रों और उसके परिणामों से जानकारी की ज़रूरत पर बल दिया। यह एक हक़ीक़त है क मध्य पूर्व में एक मात्र विदेशी शक्ति अमरीका है और वही इस इलाक़े में सारे झगड़ों की जड़ है। आतंकवादी गुट और विशेष दाइश जिन्होंने लगभग एक दशक से मध्य पूर्व को खून की होली खेली है, वह सब के सब, अमरीका की देन हैं और  इसे अमरीका की भूतपूर्व विदेशमंत्री हिलैरी क्लिंटन और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जैसे अमरीकी अधिकारियों और नेताओं ने कई बार खुल कर स्वीकार भी किया है और अपने भाषण में सैयद हसन नसरुल्लाह ने भी इसी बिन्दु की ओर संकेत किया। सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में कहा  कि यह साल, दाइश के अंत का साल होगा। उन्होंने कहा कि सीरिया के पूर्वोत्तरी क्षेत्रों में बचे खुचे दाइशी आतंकवादियों की गतिविधियां, अमरीका की ओर से इस आतंकवादी गुट के समर्थन की वजह  से हैं। इस्राईल का व्यवहार और उसकी नीतियां, मध्य पूर्व में हिंसा की दूसरी बड़ी वजह हैं। इस्राईल ने लेबनान और फिलिस्तीन पर कई युद्ध थोपने के अलावा, गेर कानूनी बस्तियों का निर्माण और फिलिस्तीनियों को बेघर करके व्यवहारिक रूप से मध्य पूर्व में हिंसा को हवा देता रहता है। 

सैयद हसन नसरुल्लाह ने इसी प्रकार अपने भाषण में सीरियाई कुर्दों के लिए अमरीका की योजना का उल्लेख किया। वास्तव में सीरिया के कुर्दों पर अमरीका बहुत ध्यान दे रहा है और उसकी कोशिश है कि सीरियाई कुर्दों को भड़का कर , इराकी कुर्दिस्तान जैसा माहौल, सीरिया में भी पैदा करे। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कुर्दों से अपील की कि वह वाशिंग्टन पर भरोसा न करें और कहा कि वाशिंग्टन आप को संभवतः हर बाज़ार में बेचने पर तैयार हो जाएगा। वास्तव में सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस्लामी जगत और मध्य पूर्व में हर झगड़े की जड़ अमरीका को बताया है और स्पष्ट रूप से कहा कि बहुत से अरब और इस्लामी देशों में वास्तविक शासक, अमरीकी राजदूत होता है। उन्होंने कहा कि हम अमरीकी सरकार को अपना दुश्मन समझते हैं और यही वजह है कि अमरीका ने इलाक़े में प्रतिरोध से पराजय के बाद हिज़्बुल्लाह के खिलाफ प्रचारिक युद्ध छेड़ दिया है ताकि उसे भीतर से नुक़सान पहुंचा सके।


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