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लेबनान को दो देशों में बांटने और हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अमरीका की यह है साज़िश! लेबनानी अखबार ने खोला राज़!

लेबनान को दो देशों में बांटने और हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अमरीका की यह है साज़िश! लेबनानी अखबार ने खोला राज़!

लेबनान से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र अलअखबार ने लेबनान में अमरीकी साज़िशों के नये चरण का सटीक जायज़ा पेश किया है।

पिछले हफ्ते, लेबनान में हिज़्बुल्लाह और उसके घटकों के खिलाफ अमरीकी प्रतिबंधों की खूब चर्चा हुई लेकिन इन प्रतिबंधों के उद्देश्यों के बारे में बहुत से सवाल पैदा हो रहे हैं लेकिन सब से अहम सवाल यह है कि इस समय अमरीकी कांग्रेस क्यों हिज़्बुल्लाह और उसके दोस्तों के खिलाफ इतना अधिक सक्रिय हो गयी है?

     हिज़्बुल्लाह और उससे संबंधित संगठनों और संस्थाओं पर प्रतिबंध के बाद अब अमरीकी, लेबनान के उन इलाक़ों पर निशाना साध रहे हैं जहां हिज़्बुल्लाह के अधिक समर्थक रहते हैं।

     हालिया दिनों में अमरीकी कांग्रेस में विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख, जो विल्सन ने एक बिल पेश किया है जिसका उद्देश्य उन्होंने, पूरी दुनिया में हिज़्बुल्लाह द्वारा कथित मनी लांड्रिंग को रोकना बताया है। इसमें विशेष रूप से अमरीका के तीन सीमावर्ती देशों, ब्राज़ील, पराग्वे और और अर्जेन्टाइना का उल्लेख किया गया है लेकिन अमरीका के इन नये प्रतिबंधों से सब से अधिक  खतरा, दक्षिणी लेबनान को है जहां हिज़्बुल्लाह का दबदबा है। अमरीकी सांसद के इस बिल में कहा गया है कि इन इलाक़ों के हिज़्बुल्लाह से निकट बैंकों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा जिसका मतलब यह है कि दक्षिणी लेबनान में कोई बैंक ही नहीं होगा या फिर जब यह प्रतिबंध लागू हो जाएंगे तो कोई भी बैंक उन इलाक़ों में अपनी ब्रांच नहीं खोल पाएगा जिन्हें अमरीका, हिज़्बुल्लाह का इलाक़ा समझता होगा।

 

     अमरीका की रिपब्लिकन पार्टी  के 12 सांसदों ने इस बिल पर हस्ताक्षर किये हैं और विल्सन का कहना है कि इस तरह से हिज़्बुल्लाह के प्रभाव वाले क्षेत्रों के बैंकों को पूरी दुनिया की बैंकिंग व्यवस्था से अलग कर दिया जाएगा।

     लेकिन अमरीका के इस बिल का अस्ल खतरा , लेबनान के एक इलाक़े को पूरे देश से काट देने की कोशिश नहीं है बल्कि मामला इससे बहुत आगे का है और उससे पता चलता है कि अमरीका दर अस्ल लेबनान का विभाजन चाहता है वह भी कानूनी तरीके से नहीं बल्कि साज़िश के ज़रिए।

     अमरीका को बहुत अच्छी तरह से पता है कि हिज़्बुल्लाह का किसी बैंक से कोई संबंध नहीं है लेकिन फिर भी उसका आग्रह है कि लेबनान के कुछ बैंकों को, हिज़्बुल्लाह से संबंध के आरोप में प्रतिबंध का निशाना बनाए।

     अमरीका के नये बिल में, " हिज़्बुल्लाह के मित्र बैंक " की परिभाषा इस्तेमाल की गयी है इस तरह से सभी बैंकों के सिर पर अमरीका की तलवार लटका दी जाएगी और जो बैंक भी अमरीका के आदेशों का पालन नहीं करेगा उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाए जैसा कि अमरीका ने सन 2019 में " जमाल ट्रस्ट बैंक" पर प्रतिबंध लगा कर लेबनान की अर्थ व्यवस्था को भारी नुक़सान पहुंचाया था।  

     यह सही है कि अभी तक यह मात्र एक विधेयक है और अभी उस पर अधिक  चर्चा होगी और फिर यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि कानून बनने की दशा में उसे लागू कैसे किया जाएगा लेकिन जिस तरह  से कांग्रेस के 12 सदस्यों ने उस पर हस्ताक्षर किये हैं उससे साफ पता चलता है कि अमरीका हिज़्बुल्लाह और उसके दोस्तों के खिलाफ नयी योजनाएं  बना रहा है ताकि इस तरह  से धीरे धीरे क्यूबा, वेनेज़ोएला, ईरान और सीरिया की बारी आये और फिर इन देशों के अधिकांश नागरिकों पर अमरीकी प्रतिबंध लगा दिये जाएं।

     एक और अहम बात यह है कि जिन सांसदों ने यह बिल पेश किया है वह साधारण सांसद नहीं हैं बल्कि मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और विदेश नीति  समितियों के सदस्य हैं।

     इस सिलसिले में अमरीकी पत्रिका फॉरेन पॉलेसी ने एक आलेख प्रकाशित किया है जिसका शीर्षक है " विभाजन, लेबनान की असंख्य समस्याओं का सब से अच्छा समाधान" । यह लेख सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में किंग फैसल इस्लामी अनुसंधान व अध्ययन केन्द्र के वरिष्ठ अध्यनकर्ता, जोज़फ अलबर्ट केशिशियान ने लिखा था। इन्हें परशियन गल्फ के मामलों का विशेषज्ञ समझा जाता है। उनका कहना है कि लेबनान का विभाजन ही इस देश की समस्याओं का समाधान है और इस तरह से लेबनान की सदियों से जारी गलतियों पर उसकी मदद की जा सकती है। उन्होंने अपने लेख में लिखा है कि निश्चित रूप से लेबनानियों  की संयुक्त विशेषताएं हैं लेकिन वह राजनीतिक व सामाजिक स्वतंत्रता के मामले  में सहमति तक नहीं पहुंच सकते और न ही उसे सुरक्षित रख सकते हैं।

 जोज़ेफ का यह लेख अमरीका की महत्वपूर्ण पत्रिका में छपा है और निश्चित रूप से यह उनकी व्यक्तिगत राय नहीं है बल्कि यह वास्तव में सऊदी अरब और अमरीका की नीतियों को बयान करने वाला लेख है।


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