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लाखों मुसलमानों ने की हज के बरिष्कार की अपील, हज से होने वाली आय को सऊदी शासन मुसलमानों के दमन और जनसंहार पर ख़र्च कर रहा है

लाखों मुसलमानों ने की हज के बरिष्कार की अपील, हज से होने वाली आय को सऊदी शासन मुसलमानों के दमन और जनसंहार पर ख़र्च कर रहा है

सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान की नीतियों के कारण दुनिया भर के लाखों मुसमलान इस साल हज का बहिष्कार कर रहे हैं।

हज का बहिष्कार करने वाले मुसलमानों का कहना है कि यह सही है कि हज इस्लाम की बुनियादी इबादतों में से एक है, लेकिन जब कोई अत्याचारी शासक उससे होने वाली आय और पहचान को निर्दोष मुसलमानों के जनसंहार पर ख़र्च करे तो हमारा कर्तव्य है कि हम उसे इससे रोकने का प्रयास करें।

रविवार को अमरीकी पत्रिका फ़ॉरेन पॉलिसी ने अपनी एक रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि सऊदी अरब में मानवाधिकारों के उल्लंघन, यमन युद्ध और पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या जैसी घटनाओं से दुनिया भर के मुसलमानों में गहरी चिंता पाई जाती है।

मुसलमानों की इस चिंता के पीछे सऊदी अरब का ईरान के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया और इस्राईल के साथ बढ़ते सहयोग का भी नाम लिया जा सकता है।  

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, यमन में सऊदी बमबारी में आम नागरिकों की मौत, ख़ाशुक़जी की निर्मम हत्या और तेहरान के प्रति रियाज़ के व्यवहार ने इस्लामी जगत में एक अभूतपूर्व संकट उत्पन्न कर दिया है, यहां तक कि सऊदी अरब के पारम्परिक सहयोगी भी उसका समर्थन जारी रखने पर पुनर्विचार के लिए मजबूर हैं।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, सऊदी सैन्य गठबंधन के हमलों में अब तक 60 हज़ार से अधिक यमनी नागरिक मारे जा चुके हैं।

सऊदी अरब तेल से होने वाली अधिकांश आय को अमरीका और यूरोपीय देशों से हथियारों की ख़रीदारी पर ख़र्च करता है।

पिछले अप्रैल को लीबिया के ग्रांड मुफ़्ती सादिक़ अल-ग़रीमी ने मुसमलानों से अपील की थी कि वह तीर्थयात्रा के लिए एक बार से अधिक सऊदी अरब की यात्रा न करें। मुफ़्ती अलग़रीमी का कहना था कि हज से होने वाली आय को सऊदी शासन मुसलमानों के दमन के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

फ़ॉरेन पॉलिसी का कहना है कि ग़रीमी पहले प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वान नहीं हैं कि जिन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में तीर्थयात्रा के लिए सऊदी अरब नहीं जाने की अपील की हो।


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