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यूरोपीय देश ने अमरीका को मदद भिजवाकर कौन सा ऐतिहासिक बदला चुकाया? क्या अमरीकी वर्चस्व कोरोना महामारी की त्रासदी से उबर पाएगा?

यूरोपीय देश ने अमरीका को मदद भिजवाकर कौन सा ऐतिहासिक बदला चुकाया? क्या अमरीकी वर्चस्व कोरोना महामारी की त्रासदी से उबर पाएगा?

अमरीका में 1847 में चोकटाव नेशन क़बीले ने भुखमरी के शिकार आयरलैंड के लिए एटलांटिक महासागर के रास्ते से सहायता भिजवाई। आयरलैंड के लोग इस घटना को आज तक नहीं भूले हैं। उस समय ब्रिटेन की उपेक्षा के शिकार आयरलैंड में भुखमरी ने दस लाख से ज़्यादा लोगों की जान ले ली थी।

इस समय आयरलैंड के लोग अमरीका में रहने वाले मूल क़बीलों के लिए आर्थिक सहायता भेज रहे हैं जो अमरीकी प्रशासन की नालायक़ी के चलते बहुत बुरी तरह कोरोना वायरस की महामारी की चपेट में आ गए हैं।

यह काम तो उदारता का है और सदभावना के साथ अंजाम दिया जा रहा है लेकिन यह ज़ाहिर करता है कि दुनिया के राष्ट्रों को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की अयोग्य सरकार के चलते पैदा होने वाली दुखद स्थिति का कितनी गंभीरता से एहसास है।

न्यूयार्क टाइम्ज़ ने इस विषय पर अपना लेख छापा है जिसमें आइरिश टाइम्ज़ की ख़बर का हवाला दिया है कि ट्रम्प ने जिस देश को पुनः ग्रेट बनाने का वादा किया था वह इतना मजबूर होकर रह गया है कि इतिहास में कभी अमरीका की इस बेबसी को कोई और मिसाल नहीं देखी गई। सवाल यह है कि क्या अमरीका इस अपमानजनक हालत से बाहर निकल पाएगा?

दूसरे विश्व युद्ध के बाद सामने आने वाले सबसे बड़े वैश्विक संकट में अमरीका की क्या स्थिति है इसका मूल्यांकन ज़रूरी है। ट्रम्प को तो लग रहा है कि उनकी सरकार ने कोरोना संकट से निपटने के संदर्भ में शानदार परफ़ार्मेन्स पेश किया है। ट्रम्प ने कहा कि सारी दुनिया हमें देखकर हैरान है कि हम दुनिया को लीड कर रहे हैं।

एक हिसाब से तो ट्रम्प की बात सही है क्योंकि हर 49 सेकेंट में कोरोना से एक अमरीकी की मौत हो रही है। 13 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं। अमरीका की आबादी दुनिया की कुल आबादी का 5 प्रतिशत है मगर दुनिया के सारे कोरोना बीमारों के 33 प्रतिशत बीमार अमरीका में है। अमरीका में कोरोना से 75 हज़ार मौतें हो चुकी हैं। तो इस हिसाब से दुनिया का कोई भी देश अमरीका के क़रीब नहीं है अमरीका लीड कर रहा है।

अमरीका और दक्षिणी कोरिया में कोरोना का पहला बीमार एक ही समय में पता चला था। दक्षिणी कोरिया ने तो तत्काल कार्यवाही शुरू कर दी और सामाजिक दूरी और क्वैरंटाइन जैसे क़दम उठाए मगर अमरीका दो महीने तक इंकार करता रहा और उसने कोई भी काम नहीं किया।

दक्षिणी कोरिया में अब रोज़ाना 10 से भी कम कोरोना के मरीज़ सामने आ रहे हैं जबकि अमरीका में एक ही दिन में 25 हज़ार बीमारों का पता चल रहा है।

कोरोना वायरस के मामले में अमरीका का रेसपांस उन देशों की तरह रहा है जहां इंफ़्रास्ट्रक्चर जर्जर है और जहां की सरकारें कमज़ोर और नेता भ्रष्ट या मूर्ख हैं। दि एटलांटिक मैगज़ीन में जार्ज बाकर ने अमरका के लिए यही कहा है कि यह एक फ़ेल स्टेट है।

यह बात सही है कि कोरोना के प्रसार को बंद नहीं किया जा सकता लेकिन यह भी सही है कि इसे भयानक त्रासदी में बदलने से रोका जा सकता है। अमरीका दुनिया में किसी भी देश से ज़्यादा बजट हेल्थ सेक्टर पर ख़र्च करता है मगर उसकी जो हालत आज है वह भयानक त्रासदी से कम नहीं है।

अमरीका ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरा हर घंटे में आठ युद्धक विमान बनाए लेकिन कोरोना वायरस की महामारी में वह डिमांड की मात्रा में मास्क नहीं बना पाया।

आइरिश टाइम्ज़ के लेख में एक सवाल किया गया है कि क्या अमरीकी वर्चस्व इस महामारी से उबर सकेगा?

स्रोतः न्यूयार्क टाइम्ज़


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