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यूरेनियम के संवर्धन को 60 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता हैः वरिष्ठ नेता

यूरेनियम के संवर्धन को 60 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता हैः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि यूरेनियम का संवर्धन देश की आवश्यकता के अनुसार किया जाएगा जो 60 प्रतिशत भी हो सकता है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि परमाणु मामले में इस्लामी गणतंत्र ईरान अपनी तार्किक नीति से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेगा।  उन्होंने कहा कि देश की आवश्यकता के अनुसार यूरेनियम के संवर्धन को 60 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।

वरिष्ठ नेता ने यह बात सोमवार को तेहरान में गार्डियन काउन्सिल के सदस्यों के साथ भेंट में कही।  उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से जेसीपीओए के संदर्भ में प्रतिबद्धताओं में कमी के बारे में अमरीका और तीन यूरोपीय देशों की नीति, अन्यायपूर्ण एवं ग़लत है।  वरिष्ठ नेता का कहना था कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने इस्लामी शिक्षाओं के आधार पर आरंभ से लेकर अबतक लंबे समय तक अमल किया जबकि इन चारों देशों ने पहले दिन से ही वचनों पर अमल नहीं किया।  उन्होंने कहा कि इसी कारण उनको जवाबदेह होना चाहिए।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि जब अमरीका, परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकल गया और दूसरों ने भी उसका साथ दिया था तो एसे में हम भी उससे निकल सकते थे क्योंकि पवित्र क़ुरआन के हिसाब से जब सामने वाला पक्ष वचन को तोड़े तो तुम भी एसा कर सकते हो किंतु इसके बावजूद हमारी सरकार ने वचनों को नहीं तोड़ा बल्कि चरणबद्ध ढंग से उनमें से कुछ को कम किया।  हालांकि अगर वे वचनों को पूरा करेंगे तो हम भी वापस आ सकते हैं।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस बीच अन्तर्राष्ट्रीय ज़ायोनिज़्म लगातार यह कह रहा है कि हम ईरान की पहुंच परमाणु हथियारों तक नहीं होने देंगे।  हालांकि उसको बता दिया जाए कि अगर इस्लामी गणतंत्र ईरान, परमाणु हथियार बनाना चाहता तो फिर वह तो क्या उसका बाप भी रुकावट नहीं बन सकता था। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के अनुसार परमाणु हथियार बनाने में जो चीज़ इस्लामी गणतंत्र ईरान के लिए रुकवाट है वह इस्लामी शिक्षा है जिसके अन्तर्गत जनसंहारक शस्त्रों का निर्माण हराम है चाहें वे परमाणु या रासायनिक कोई भी हों।

वरिष्ठ नेता ने अमरीका के परमाणु हमले में 2 लाख 20 हज़ार लोगों के जनसंहार की याद दिलाई।  साथ ही उन्होंने यमन की निर्दोष जनता के परिवेष्टन तथा पश्चिम द्वारा निर्मित युद्धक विमानों से  स्कूलो, बाज़ारों, अस्पतालों और घरों पर बमबारी का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों का जनंसहार करना अमरीकी और पश्चिमी शैली है हमारी नहीं।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान इस शैली को स्वीकार नहीं करता।  यही कारण है कि वह कभी भी परमाणु हथियारों के बारे में सोचता ही नहीं है।  उनका कहना था कि देश की आवश्यकताओं के अनुरूप हम परमाणु क्षमता हासिल करने का इरादा रखते हैं।  यही कारण है कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन अब 20 प्रतिशत तक नही रहेगा बल्कि देश को जितनी की भी आवश्यकता होगी उतना संवर्धन बढ़ाया जाएगा।  उदाहरण स्वरूप परमाणु प्रगति या दूसरे कामों के लिए यूरेनियम के संवर्धन को 60 प्रतिशत तक किया जा सकता है।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि हालांकि कुछ वर्षों का एक समझौता हुआ है।  अगर वे उसपर अमल करते हैं तो हम भी उतने ही वर्षों तक उसका पालन करेंगे।  आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि पश्चिम को यह अच्छी तरह से पता है कि हम परमाणु शस्त्रों के लिए प्रयासरत नहीं हैं।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि परमाणु हथियार तो मात्र बहाना हैं।  वे तो हमारे लिए पारंपरिक हथियारों के पक्षधर नहीं हैं।  इसका मुख्य कारण यह है कि वे ईरान को कभी भी सशक्त नहीं देखना चाहते।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह एक वास्तविकता है कि परमाणु ऊर्जा, निकट भविष्य में ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बन जाएगा।  एसे में यूरेनियम के संवर्धन की आवश्यकता, एक ज्वलंत आवश्यकता हो जाएगी।  उन्होंने कहा कि पश्चिमी यह चाहते हैं कि भविष्य में जब ईरान को ऊर्जा की आवश्यकता होगी तो वह उनका मोहताज रहे और वे लोग हमारी इस ज़रूरत को अपनी अवैध मांगे मनवाने के हथकण्डे के रूप में प्रयोग करें और हमपर अपनी बातें थोपें।

वरिष्ठ नेटा ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, अन्य मुद्दों की ही भांति परमाणु मुद्दे पर भी बिल्कुल पीछे नहीं हटेगा।  वह देश की ज़रूरत के हिसाब से अपने क़दम बढ़ाता रहेगा।    


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