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यूएई के सैनिकों की यमन युद्ध से वापसी की घोषणा के साथ ही इमाराती और सऊदी समर्थक लड़ाके एक दूसरे की जान के प्यासे बन गए

यूएई के सैनिकों की यमन युद्ध से वापसी की घोषणा के साथ ही इमाराती और सऊदी समर्थक लड़ाके एक दूसरे की जान के प्यासे बन गए

जैसे ही संयुक्त अरब इमारात ने अपने सैनिकों को यमन युद्ध से वापस निकालना शुरू किया, इमाराती और सऊदी समर्थन प्राप्त यमनी लड़ाके एक दूसरे की जान के प्यासे हो गए।

सऊदी समर्थन प्राप्त यमन के भगोड़े पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी और यूएई के समर्थक लड़ाके यमनी सेना और अंसारुल्लाह जनांदोलन के ख़िलाफ़ सनआ पर क़ब्ज़े के लिए लड़ रहे थे, लेकिन अब इन लड़ाकों ने एक दूसरे पर हमले शुरू कर दिए हैं।

मंसूर हादी के क़ब्ज़े वाले यमन के दक्षिणी इलाक़ों को आज़ाद कराने के लिए एसटीसी के नाम से एक फ़ोर्स का गठन हुआ है, हज़ारों लड़ाकों को भर्ती करने वाली इस फ़ोर्स का कहना है कि वह दक्षिण का प्रतिरोध है।

यमन में मिडिल ईस्ट आई के साथ इंटरव्यू में सऊदी और युएई सैन्य गठबंधन के अपराधों के प्रमाण एकत्रित करने वाले मानवाधिकारों के एक अधिकारी नासिर अल-ख़लीफ़ी का कहना है कि इस संगठन ने अप्रैल में लड़ाकों को भर्ती करना शुरू किया था और यह प्रक्रिया जारी है।

26 मार्च 2015 को सऊदी अरब, यूएई और उनके घटक देशों ने यमन के तत्कालीन भगोड़े राष्ट्रपति मंसूर हादी को सनआ की सत्ता फिर से सौंपने के दावे के साथ इस देश पर व्यापक हवाई हमले शुरू कर दिए थे।

हालांकि सऊदी सैन्य गठबंधन न केवल यमन युद्ध में कोई लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सका, बल्कि इस युद्ध में उसे यमनी सेना और अंसारुल्लाह के हाथों अपमानजन हार का सामना करना पड़ रहा है, जिसका स्पष्ट सुबूत युएई के सैनिकों की युद्ध के मैदान से वापसी है।

साढ़े चार वर्ष बीत जाने के बाद भी अंसारुल्लाह का राजधानी सनआ पर निंयत्रण है और उसके लड़ाके सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर ड्रोन व मिसाइल हमले कर रहे हैं।

रियाज़ और अबू धाबी ने यमन में शांति की स्थापना के दावे के साथ मध्यपूर्व के सबसे निर्धन देश पर हमला और उसकी घेराबंदी की थी, हालांकि इन हमलों और घेराबंदी के कारण यमन में लाखों बच्चें मारे जा चुके हैं या मौत की कगार पर हैं।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, यमन युद्ध में 60 हज़ार यमनी नागरिकों की मौत हो चुकी है और इस ग़रीब देश का आधारभूत ढांचा पूर्ण रूप से नष्ट हो चुका है।

यमन में इतने बड़े पैमाने पर विनाश के बावजूद, यमनी सेना और अंसारुल्लाह ने अपनी रक्षात्मक शक्ति में बेपनाह इज़ाफ़ा किया है और युद्ध जारी रहने की स्थिति में सऊदी अरब के बाद अब यूएई में महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले की चेतावनी दी है।


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