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यमन से यूएईए की वापसी, नाकामी या नये षडयंत्र की तैयारी?

यमन से यूएईए की वापसी, नाकामी या नये षडयंत्र की तैयारी?

यमन ने एलान किया है कि वह यमन में परोक्ष और अपरोक्ष उपस्थिति खत्म कर रहा है।


अरब विशेषज्ञों का यह कहना है कि यमन से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का यूएई का फैसला, दिखावे के लिए है क्योंकि यूएई ने यमन में कई सशस्त्र गुट बनाए हैं और अब वह वहां से अपने सरकारी सैनिकों को वापस बुला कर यमन की त्रासदी के प्रति विश्व समुदाय के सामने जवाबदही से बच सके।

     यूएई यमन के खिलाफ सऊदी अरब के गठबंधन का आरंभ से ही सदस्य रहा है और सन 2015 से बनने वाले इस गठबंधन ने अब तक यमन में व्यापक जनसंहार किये और जघन्य अपराध किये हैं।

 यमन के लेखक और टीकाकार यास अत्तमीमी का कहना है कि यूएई, यमन में अपनी विनाशक और त्रासदीपूर्ण भूमिका के बाद अब इस युद्ध की जटिलताओं को सुलझाने के प्रयास में है।

   उन्होंने कहा कि यूएई ने यमन युद्ध में व्यापक स्तर पर कानूनों को पैरों तले रौंदा है, यह युद्ध मंसूर हादी की मदद के लिए आरंभ किया गया था किंतु विशेष यमन के दक्षिणी क्षेत्रों में यूएई की जो भूमिका रही है वह बेहद धूर्ततापूर्ण है और उससे हालात और खराब हुए हैं।

     अत्तमीमी के अनुसार यूएई ने पिछली जूलाई में भी कहा था कि वह यमन से अपनी सैनिकों की संख्या कम कर रहा है और वास्तव में यमन से निकलने का यूएई का एलान दक्षिण में सऊदी अरब के लिए समस्याएं पैदा करना और अधिक विनाशक भूमिका निभाने की योजना के अंतर्गत है।

यमन के एक अन्य टीकाकार, नबील अलबुकैरी ने भी कहा है कि अबूधाबी के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ायद ने हालिया दिनों में ट्वीट किया था कि यूएई अपने यमनी भाइयों की मदद के लिए इस देश में बाकी रहेगा इस लिए अब जो यह घोषणा की गयी है उसका मतलब यमन से यूएई की वापसी नहीं बल्कि अधिक तैयारी के साथ नया षडयंत्र रचना है।

     उन्होंने बताया कि यूएई, अब यमन में अपने द्वारा बनाए गये सशस्त्र गुटों की मदद से उपस्थित रहने की रणनीति बना रहा है ताकि विश्व समुदाय के सामने जवाबदही से बचा जा सके और सऊदी अरब को हमेशा, यमन से पूरी तरह से निकलने की धमकी देकर उससे सुविधाएं लेता रहे।


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