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यमन पर भी बड़ा फ़ैसला सुना सकते हैं बाइडन, लेकिन सऊदी अरब से एंठते रहेंगे पैसे, अमरीका के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी का सनसनीख़ेज़ बयान...

यमन पर भी बड़ा फ़ैसला सुना सकते हैं बाइडन, लेकिन सऊदी अरब से एंठते रहेंगे पैसे, अमरीका के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी का सनसनीख़ेज़ बयान...

अमरीका के एक पुराने राजनीतिज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि युद्ध युद्ध की समाप्ति, बाइडन की प्राथमिकता है लेकिन वह सऊदी सरकार से पैसे एंठने की नीति को जारी रखेंगे।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार कोलंबिया विश्व विद्यालय के प्रोफ़ेसर और जेराल्ड फ़ोर्ड, जिमी कार्टर और रोनाल्ड रीगन की सरकार में अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य गैरी सिक ने कहा कि पश्चिमी एशिया के बारे में जो बाइडन की राजनैतिक प्राथमिकता यमन युद्ध को समाप्त कराना है।

उनका कहना था कि मैं यह भविष्यवाणी करता हूं कि बाइडन सरकार के आरंभिक महीनों में ही सऊदी सरकार चुपके से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल से रिहा कर देगी लेकिन उन्होंने इस पर निराशा जताई कि नई सरकार जमाल ख़ाशुक़्जी के हत्यारों को सज़ाए दिलवाने की कोशिश करेगी।

गैरी सिक ने इस्राईल और कुछ अरब देशों के संबंधों के बारे में बाइडन सरकार की नीति पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह मामला, कई चीज़ों पर निर्भर है जिनमें सबसे महत्वपूर्ण ईरान है और ईरान का इस पर क्या जवाब और प्रतिक्रिया होगी। उन्होंने कहा कि बाइडन ने इशारा किया था कि वह परमाणु समझौते में लौटेंगे और इसका वादा उन्होंने ईरान और अमरीका को दिया था।

कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर का कहना था कि फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों को यह उम्मीद है कि अमरीका उनकी ओर से ईरान के साथ वार्ता में शामिल होगा।

उन्होंने यमन के बारे में नई सरकार की नीतियों के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि जो बाइडन यमन के विरुद्ध युद्ध की योजना का बहुत अधिक विरोधी थे और कांग्रेस भी यमन युद्ध में हस्तक्षेप के लिए तैयार नहीं थी, उनका कहना था कि बाइडन इस बारे में सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ और क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से अमरीका की भूमिका और यमन युद्ध के राजनैतिक समाधान के लिए गंभीर वार्ता करेंगे।

अमरीका के इस पूर्व अधिकारी का कहना था कि सऊदी अरब ने यमन में बहुत अधिक पूंजीनिवेश किया और वह इस देश से कभी भी पीछे नहीं हटेगा इसीलिए उसने बाइडन सरकार के साथ वार्ता के लिए ख़ुद को तैयार कर रखा है।

उनका कहना था कि अगर अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस सऊदी अरब के लिए अपनी सामरिक मदद बंद कर दें तो यह देश सैन्य उपकरणों और युद्धक विमानों का ख़याल रखने की क्षमता खो देगा और उनके लिए मामला कठिन हो जाएगा और वह ज़्यादा दिन तक नहीं चल सकेगा।

कोलंबिया विश्व विद्यालय के प्रोफ़ेसर का कहना था कि अमरीकी अधिकारी शायद सऊदी अरब से कहें कि हम तुम्हारी वार्ता में तुम्हारा समर्थन करने को तैयार हैं और अगर तुमने सद्भावना से वार्ता नहीं की तो हम भी तुम्हारा साथ नहीं दे सकेंगे।


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