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यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन या हूती संगठन को लेकर बाइडन सरकार से भिड़ने के मूड में आ गया सऊदी अरब, क्या वाशिंग्टन से मधुर रिश्ते की उम्मीद खो रहे हैं बिन सलमान

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन या हूती संगठन को लेकर बाइडन सरकार से भिड़ने के मूड में आ गया सऊदी अरब, क्या वाशिंग्टन से मधुर रिश्ते की उम्मीद खो रहे हैं बिन सलमान

सऊदी अरब ने बाइडन सरकार से टकराव मोल लेने का इशारा देते हुए कहा है कि यमन का अंसारुल्लाह आंदोलन या हूती संगठन आतंकी संगठन है।

बाइडन सरकार ने इस संगठन को आतंकी संगठनों की सूचि में रखने के ट्रम्प सरकार के फ़ैसले को पलट दिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने बाइडन सरकार के इस नए फ़ैसले का स्वागत किया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ में सऊदी अरब के राजदूत अब्दुल्लाह मुअल्लेमी ने एक इंटरव्यू में कहा कि बाइडन सरकार ने यमन में मानवीय त्रासदी की स्थिति को संभालने के लिए यह फ़ैसला किया है मगर हम हूती संगठन को अब भी आतंकी संगठन मानते हैं और सैनिक शक्ति का इस्तेमाल करके इस संगठन को कंट्रोल कर रहे हैं।

सऊदी राजदूत का कहना था कि हमने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद और महासचिव गुटेरस को बता दिया है कि हूती संगठन ने हमारे देश के अबहा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर बड़ा हमला किया।

ज्ञात रहे कि सऊदी अरब मार्च 2015 से यमन पर हमले कर रहा है। इन हमलों में यमन का इंफ़्रास्ट्रक्चर तबाह होकर रह गया है और देश मानव त्रासदी की कगार पर पहुंच गया है। मगर दूसरी ओर यह भी तथ्य है कि यमनी सेना और स्वयं सेवी फ़ोर्सेज़ की प्रतिरोध शक्ति कम होने के बजाए लगातार बढ़ रही है और अब वह जवाबी हमले भी कर रही हैं।

अंसारुल्लाह आंदोलन को आतंकी संगठनों की सूचि से निकालने के साथ ही बाइडन सरकार सऊदी अरब पर यमन युद्ध रोकने के लिए दबाव डाल रही है और रियाज़ सरकार की खुलकर आलोचना कर रही है। अब सऊदी कूटनयिक की ओर से जो बयान आया है उससे ज़ाहिर होता है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान जो बाइडन को शीशे में उतारने में सफल नहीं हुए तो अब उन्होंने कड़े बयान देने का मन बना लिया है।


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