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मोदी सरकार के विकास का वादा, भारतीयों और कश्मीरियों के लिए डरावना सपना क्यों बनता जा रहा है

मोदी सरकार के विकास का वादा, भारतीयों और कश्मीरियों के लिए डरावना सपना क्यों बनता जा रहा है

यूएई की राजधानी अबू-धाबी स्थित लूलू ग्रुप इंटरनेशनल, भारत प्रशासित कश्मीर में एक फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करेगा। हालांकि कार्यकर्ता इस क़दम को कश्मीर के उपनिवेश के रूप में देख रहे हैं।

दुबई स्थित भारतीय कांसूलेट ने एक बयान जारी करके बताया है कि लूलू ग्रूप ने दुबई में जारी यूएई-इंडिया फ़ूड सेक्यूरिटी समिट के दौरान, इस योजना के एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक़, कंपनी शुरू में 8 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी। कंपनी ने प्लांट के लिए ज़मीन की खोज शुरू कर दी है।

कश्मीरी कार्यकर्ताओं और विद्वानों ने इस घोषणा की तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि लूलू ग्रूप के निवेश से, कश्मीर पर भारत की औपनिवेशिक पकड़ अधिक मज़बूत होगी, जिसमें 5 अगस्त 2019 को उस वक़्त से तेज़ी आ गई, जब मोदी सरकार ने कश्मीर को अर्ध-स्वायत्तता प्रदान करने वाली संविधान की धारा 370 को निरस्त कर दिया।

उसके बाद, इसी साल अक्तूबर में कश्मीर में ज़मीन ख़रीदने के क़ानून में बदलाव कर दिया गया और ग़ैर-कश्मीरियों को क्षेत्र में ज़मीन ख़रीदने का अधिकार दे दिया गया।

मोदी सरकार के इस क़दम से उन चिंताओं को अधिक बल मिला है कि भारत सरकार, मुस्लिम बहुल कश्मीर में जनसंख्या का अनुपात बदलना चाहती है।

मैसाचुसेट्स कॉलेज ऑफ़ लिबरल आर्ट्स के प्रोफ़ेसर मोहम्मद जुनैद ने मिडिल ईस्ट आई से बात करते हुए कहाः लूलू ग्रूप भारत सरकार की उपनिवेशवादी नीतियों के दम पर, कश्मीरी बाग़वानी उद्योग में प्रवेश करना चाहता है, ताकि कश्मीर की अपनी बाग़वानी अर्थव्यवस्था को नष्ट कर कर सके।

उन्होंने आगे कहाः ऐसा नहीं है कि लूलू ग्रूप, इस बात से अनजान है कि भारत, कश्मीर में क्या कर रहा है? इसलिए विवादित क्षेत्र में उसका यह निवेश इसे संदिग्ध बनाने के साथ ही जटिल भी बनाता है।

2019 के बाद से कश्मीर की अर्थव्यवस्था, नई दिल्ली की अलोकतांत्रिक नीतियों के चलते भारी गिरावट का शिकार हुई है। जबकि कोविड-19 महामारी ने भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को काफ़ी प्रभावित किया है।

हालिया वर्षों में नई दिल्ली का झुकाव, इस्राईल और फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों की ओर बढ़ा है।

भारतीय सेना प्रमुख पहली बार सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा कर रहे हैं, जिससे अरब देशों के साथ भारत के बढ़ते सहयोग का पता चलता है।

कश्मीरियों का कहना है कि भारत सरकार, क्षेत्र के जनसंख्या अनुपात को बदलने के लिए विकास को एक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है, ताकि कश्मीर पर अपनी पकड़ अधिक मज़बूत बना सके।

भारत प्रशासित कश्मीर को, पृथ्वी पर सबसे अधिक सैन्यीकृत स्थान के रूप में जाना जाता है, जहां 7 लाख से अधिक सैनिक, अर्धसैनिक और पुलिस बल तैनात हैं। 


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