एक दूसरे के खून के प्यासे क्यों हो गए हैं सऊदी अरब और क़तर?

एक दूसरे के खून के प्यासे क्यों हो गए हैं सऊदी अरब और क़तर?

अमीर कतर ने हर प्रकार के फौजी हमले के मुकाबले के लिए अपने देश के सीमावर्ती और तटीय सेनाओं के सेनाओं के सशस्त्र सेनाओं में शामिल होने पर भी सहमति जताई है

अबनाः क़तर के मीडिया सूत्रों के अनुसार अमीर कतर शेख तमीम बिन खलीफा आले सानी ने आज 6 जून के दिन अपने देश की सशस्त्र सेनाओं को हर तरह के आक्रमण के मुकाबले के लिए चौकस रहने का हुक्म जारी किया है।
अमीर कतर ने हर प्रकार के फौजी हमले के मुकाबले के लिए अपने देश के सीमावर्ती और तटीय सेनाओं के सेनाओं के सशस्त्र सेनाओं में शामिल होने पर भी सहमति जताई है। अमीर कतर के इशारे से पता चलता है कि क़तर और तीन देशों यानी सऊदी अरब बहरैन और संयुक्त अरब अमीरात के बीच खींचातानी अपने चरम पर पहुंच गई है। अमीर क़तर ने यह निर्णय ऐसी स्थिति में लिया है कि जब कुवैती अधिकारी सऊदी अरब और कतर के बीच मध्यस्थता के लिए अपनी कोशिशों का सिलसिला जारी रखे हुए हैं।

यहां सवाल यह पैदा होता है कि अरब देशों खास कर सऊदी अरब और क़तर के बीच जारी इस घमासान का कारण क्या है? इस घमासान का पहला कारण फार्स की खाड़ी सहयोग काउंसिल के कार्यक्षेत्र में सऊदी अरब की पॉलिसियां है, आले सऊद फार्स की खाड़ी के दूसरे सदस्य देशों के साथ बच्चों जैसा व्यवहार करता है और चाहता है कि वह देश बिना किसी मतभेद के रियाद की क्षेत्रीय पालीसियों का बिना शर्त समर्थन करते रहें, हालांकि यह देश आज़ाद है।
दूसरा कारण इन मतभेदों का जो क्षेत्रीय समस्याओं के सिलसिले में कतर और दूसरे तीन अरब देश अर्थात सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात और बहरैन के बीच पाए जाते हैं इन देशों के बीच 3 मुद्दों यानी मुस्लिम ब्रदरहुड हमास और इस्लामी रिपब्लिक ईरान के साथ संबंधों के बारे में ज्यादा मतभेद पाए जाते हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरैौन की सोच यह है कि मुस्लिम ब्रदरहुड और हमास आतंकवादी गुट हैं जबकि कतर की हुकूमत के मुस्लिम ब्रदरहुड और हमास दोनों के साथ अच्छे और करीबी संबंध हैं।
सन 2014 में भी इस मुद्दे की वजह से क़तर और इन तीन देशों के बीच मतभेद पैदा हुए थे और उन देशों ने दोहा से अपने राजदूत वापस बुला लिए थे क़तर की हुकूमत सन 2011 से ही मिडल ईस्ट और दक्षिण अफ्रीका में शुरू होने वाले हुकूमत विरोधी प्रदर्शनों को अपनी क्षेत्रीय पोजीशन को मजबूत बनाने का एक अवसर जानती है जबकि इस प्रदर्शनों का निशाना सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात और बहरैन की हुकूमतें हैं।
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरैन की हुकूमतों का ख्याल यह है कि इस्लामी रिपब्लिक ईरान क्षेत्र में तनाव फैला रहा है और वह ईरान के साथ अपने संबंधों के स्तर को कम करने की पालिसी पर आगे बढ़ रहे हैं लेकिन कतर की हुकूमत का न केवल यह ख्याल है कि इस्लामी रिपब्लिक ईरान क्षेत्र की एक बड़ी ताकत है जिसने क्षेत्र में शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई है बल्कि वह तेहरान के साथ अपने संबंधों में विस्तार का इच्छुक भी है यही कारण है कि आज क़तर ने अपने देश के फौजियों को पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों से कतर के समुद्री सीमा में बिना अनुमति के प्रवेश करने वाले किसी भी जहाज़ पर हमला करने का आदेश दिया है लेकिन इसमें इस्लामी रिपब्लिक ईरान के जहाजों को अलग रखा है।
इन अरब देशों के बीच तनाव का तीसरा कारण अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों की हस्तक्षेप पर आधारित योजनाएं हैं क़तर और फारस की खाड़ी के दूसरे 3 सदस्य देश के बीच तनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सऊदी अरब दौरे के एक दिन बाद शुरू हुआ है ट्रंप ने अपने इस दौरे में सऊदी अरब के क्षेत्रीय पालिसियों से पूरी तौर पर सहमति जताने से कतर की क्षेत्रीय पालिसियों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है जिसके विरुद्ध कतर के अधिकारियों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की जो क़तर और फार्स की खाड़ी के दूसरे तीन देशों के बीच तनाव पैदा होने का कारण बना।


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