आईसीजे ने दिया अमरीका को एक बड़ा झटका

आईसीजे ने दिया अमरीका को एक बड़ा झटका

इंटरनेश्नल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस आईसीजे ने बुधवार को अपने एक ऐतिहासिक फ़ैसले में अमरीका से कहा है कि वह ईरान के ख़िलाफ़ इंसान की बुनियादी ज़रूरत की चीज़ों और नागरिक विमानन के विभाग के ख़िलाफ़ प्रतिबंध नहीं लगाए।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईसीजे के इस फ़ैसले को अमरीका के ख़िलाफ़ ईरान की एक और बड़ी जीत माना जा रहा है।

वास्तव में अमरीका, मध्यपूर्व के प्राकृतिक स्रोतों को लूटना चाहता है, लेकिन ईरान उसके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है, इसीलिए अमरीका का पिछले 40 वर्षों से यही प्रयास है कि ईरान को अपनी नीतियों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दे। इसी उद्देश्य के लिए वह ईरान के ख़िलाफ़ विभिन्न प्रकार के एकपक्षीय प्रतिबंध लगाता रहा है। मई में परमाणु समझौते से निकलने के बाद, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के ख़िलाफ़ फिर से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। हालांकि इस बार विश्व की कई शक्तियों ने अमरीका के इस फ़ैसले के प्रति नाराज़गी जताई थी, यहां तक कि वाशिंगटन के सबसे बड़े घटक यूरोपीय संघ ने ईरान के साथ व्यापार जारी रखने पर बल दिया है।

अब आईसीजे के अमरीकी प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ फ़ैसले से उन देशों को भी एक आधार मिल जाएगा, जो अमरीका के दबाव के बावजूद अपने राष्ट्रीय हितों के मद्देनज़र ईरान के साथ व्यापार जारी रखना चाहते थे, लेकिन हिचकिचाहट का शिकार थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि आईसीजे के इस फ़ैसले के बावजूद अमरीका, ईरान विरोधी अपनी गतिविधियों को नहीं रोकेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका पक्ष पहले से कहीं अधिक कमज़ोर पड़ जाएगा और वह अलग-थलग पड़ जाएगा।

वास्तव में अमरीका विश्व भर में अपने हित साधने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का दुरुपयोग करता आया है, लेकिन अब जबकि इन संस्थाओं से उसके हितों का टकराव हो रहा है, तो वह एक एक करके इन संस्थाओं की सदस्यता को त्याग रहा है या उन्हें कमज़ोर करने में लगा हुआ है।

निःसंदेह आईसीजे का यह फ़ैसला यह भी साबित करता है कि तेहरान द्विपक्षीय एवं अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करता है और वह विश्व शांति को मज़बूत बनाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक मज़बूत बनाने के पक्ष में है।


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