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मध्यपूर्व में तनाव कम करने के लिए यूरोप व्यवहारिक क़दम उठाए

मध्यपूर्व में तनाव कम करने के लिए यूरोप व्यवहारिक क़दम उठाए

मध्यपूर्व में तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता ईरान के ख़िलाफ़ जारी आर्थिक युद्ध को समाप्त करना है।

(ABNA24.com) मध्यपूर्व में तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता ईरान के ख़िलाफ़ जारी आर्थिक युद्ध को समाप्त करना है।

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने सोमवार को तेहरान में अपने जर्मन समकक्ष हाइको मास के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा, ऐसी आशा नहीं की जानी चाहिए कि जिन लोगों ने ईरानी जनता के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है वह सुरक्षित रहेंगे।

मास का कहना था कि इस क्षेत्र के बाहरी देशों द्वारा क्षेत्र के देशों पर प्रभाव डालने के कारण, अस्थिरता उत्पन्न हुई है और मध्यपूर्व में जो तनाव है वह बहुत ही ख़तरनाक है।

वास्तव में अमरीका के नेतृत्व में ईरानी दुश्मनों ने तेहरान के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है। लेकिन यहां सवाल यह है कि इस आर्थिक युद्ध का उद्देश्य क्या है?

अमरीका चाहता है कि ईरानी जनता पर आर्थिक दबाव डालकर, जनता और सरकार के बीच दरार डाल दे। यही वजह है कि अमरीका, आर्थिक प्रतिबंधों के बहाने ईरान में बाढ़ प्रभावितों के लिए विदेश से पहुंचने वाली मानव सहायता के मार्ग में भी रुकावटें उत्पन्न कर रहा था।

इस युद्ध का दूसरा उद्देश्य ईरान के आर्थिक विकास को रोकना है। अमरीका, विश्व के अन्य देशों और विदेशी कंपनियों पर दबाव डाल रहा है कि वह ईरान के साथ आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बंद कर दें, हालांकि एकपक्षीय रूप से इस तरह की हरकत अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है।

ऐसी स्थिति में ईरान के सामने दो ही विकल्प बचते हैं। पहला यह है कि वह अमरीका के दबाव के सामने झुक जाए। दूसरा यह कि वह अमरीका के दबाव और धमकियों के सामने डट जाए ताकि दूसरे देशों पर दबाव डालने और उन्हें डराने और धमकाने का अमरीका का यह सिलसिला बंद हो सके और मध्यपूर्व में शांति स्थापित हो सके।

अब अगर यूरोप क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति की स्थापना के लिए गंभीर है, तो उसे चाहिए कि वह एकपक्षीय आर्थिक प्रतिबंधों का खुलकर विरोध करे और परमाणु समझौते के तहत जो वादे ईरान के साथ किए गए थे उन पर अमल करे।



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मध्यपूर्व में तनाव कम करने के लिए यूरोप व्यवहारिक क़दम उठाए

मध्यपूर्व में तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता ईरान के ख़िलाफ़ जारी आर्थिक युद्ध को समाप्त करना है।

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने सोमवार को तेहरान में अपने जर्मन समकक्ष हाइको मास के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा, ऐसी आशा नहीं की जानी चाहिए कि जिन लोगों ने ईरानी जनता के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है वह सुरक्षित रहेंगे।

मास का कहना था कि इस क्षेत्र के बाहरी देशों द्वारा क्षेत्र के देशों पर प्रभाव डालने के कारण, अस्थिरता उत्पन्न हुई है और मध्यपूर्व में जो तनाव है वह बहुत ही ख़तरनाक है।

वास्तव में अमरीका के नेतृत्व में ईरानी दुश्मनों ने तेहरान के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है। लेकिन यहां सवाल यह है कि इस आर्थिक युद्ध का उद्देश्य क्या है?

अमरीका चाहता है कि ईरानी जनता पर आर्थिक दबाव डालकर, जनता और सरकार के बीच दरार डाल दे। यही वजह है कि अमरीका, आर्थिक प्रतिबंधों के बहाने ईरान में बाढ़ प्रभावितों के लिए विदेश से पहुंचने वाली मानव सहायता के मार्ग में भी रुकावटें उत्पन्न कर रहा था।

इस युद्ध का दूसरा उद्देश्य ईरान के आर्थिक विकास को रोकना है। अमरीका, विश्व के अन्य देशों और विदेशी कंपनियों पर दबाव डाल रहा है कि वह ईरान के साथ आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बंद कर दें, हालांकि एकपक्षीय रूप से इस तरह की हरकत अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है।

ऐसी स्थिति में ईरान के सामने दो ही विकल्प बचते हैं। पहला यह है कि वह अमरीका के दबाव के सामने झुक जाए। दूसरा यह कि वह अमरीका के दबाव और धमकियों के सामने डट जाए ताकि दूसरे देशों पर दबाव डालने और उन्हें डराने और धमकाने का अमरीका का यह सिलसिला बंद हो सके और मध्यपूर्व में शांति स्थापित हो सके।

अब अगर यूरोप क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति की स्थापना के लिए गंभीर है, तो उसे चाहिए कि वह एकपक्षीय आर्थिक प्रतिबंधों का खुलकर विरोध करे और परमाणु समझौते के तहत जो वादे ईरान के साथ किए गए थे उन पर अमल करे।

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