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भारत में विवादित कृषि क़ानूनों पर किसानों व सरकार की 10वीं वार्ता में भी बात नहीं बनी

भारत में विवादित कृषि क़ानूनों पर किसानों व सरकार की 10वीं वार्ता में भी बात नहीं बनी

भारत में विवादित कृषि क़ानूनों पर किसानों व सरकार के बीच 10वें चरण की वार्ता भी नाकाम हो गई है।

तीन नए कृषि क़ानूनों पर मतभेद के समाधान के लिए किसानों और सरकार के बीच 10वें चरण की बातचीत बुधवार को आयोजित हुई। बैठक से पहले ही किसानों ने स्पष्ट कर दिया था कि वे नए कृषि क़ानून वापस लेने की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे। सरकार ने भी कृषि क़ानून रद्द किए जाने से साफ़ इन्कार कर दिया है। सरकार ने किसानों से कहा है कि अगर वे चाहें तो अदालत जा सकते हैं लेकिन किसानों ने कोर्ट जाने से इन्कार कर दिया है।

 

10वें दौर की बैठक में किसान नेताओं ने एनआईए का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने शिमला में गिरफ्तार हुए किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी एनआईए के निशाने पर हैं। इस पर भारत के कृषि मंत्री ने किसान नेताओं से कहा कि वे निर्दोश लोगों की सूची दे दें और आश्वास्त रहें कि किसी भी निर्दोश के साथ कुछ ग़लत नहीं होगा। सरकार के प्रतिनिधियों ने एक बार फिर तीनों क़ानूनों के फायदे बताते हुए कहा कि बिल किसानों के हित में हैं लेकिन अगर वे कोई संशोधन चाहते हैं तो हम करने के लिए तैयार हैं। किसानों ने बैठक में एक बार फिर साफ़ कह दिया कि वे संशोधन नहीं, तीनों क़ानूनों की वापसी चाहते हैं और इससे कम कोई भी चीज़ किसानों को मंजूर नहीं है।

 

इस बीच किसानों और सरकार के बीच बैठक से पहले ट्रैक्टर मार्च पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैक्टर मार्च पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। शीर्ष न्यायालय ने कोई भी आदेश देने से इन्कार करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस अपनी याचिका वापस ले। अदालत ने कहा है कि यह मामला पूरी तरह पुलिस का है और उसे अपने हिसाब से फ़ैसला करना चाहिए। 


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