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भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान, इराक़ और सीरिया सहित दुनिया के बहुत से देशों में मानवता के अंतिम मुक्तिदाता का शुभ जन्म दिवस मनाया ज

भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान, इराक़ और सीरिया सहित दुनिया के बहुत से देशों में मानवता के अंतिम मुक्तिदाता का शुभ जन्म दिवस मनाया ज

आज भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान, इराक़ और सीरिया सहित दुनिया के बहुत से देशों में लोग मानवता के अंतिम मुक्तिदाता हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस मना रहे हैं।

आज 15 शाबान सन 1440 हिजरी बराबर 21 अप्रैल 2019, मानवता के अंतिम मुक्तिदाता हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस है।

इस अवसर पर भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान, इराक़ और सीरिया सहित दुनिया के अनेक देशों में शिया मुसलमान शनिवार रात से ही जश्न मना रहे हैं।

पूरे ईरान में छोटे-बड़े शहरों, क़स्बों और गावों में कल शाम से ही जश्न का माहौल दिखाई दे रहा है। ईरान में सबसे बड़ा आयोजन पवित्र नगर क़ुम स्थित जमकरान मस्जिद में कल रात से चल रहा है। जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद हैं।

हज़रत इमाम महदी 15 शाबान सन 255 हिजरी क़मरी को सामर्रा में पैदा हुए। उनके पिता हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम पैग़म्बरे इस्लाम के ग्यारहवें उत्तराधिकारी थे। हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम की मां का नाम नर्जिस ख़ातून था।

हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम पैदाइश से लेकर 5 साल की उम्र तक अपने पिता की देखरेख में गुप्त रूप से जीवन बिताने पर मजबूर थे, क्योंकि उनकी जान को तत्कालीन अब्बासी शासन की ओर से ख़तरा था।

वर्ष 260 हिजरी क़मरी में इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद इमाम महदी अलैहिस्सलाम अल्पावधि के लिए लोगों की नज़रों से ओझल हो गए, जिसे "ग़ैबते सुग़रा" कहते हैं। यह अवधि 329 हिजरी क़मरी तक जारी रही। इस दौरान इमाम महदी अलैहिस्सलाम अपने 4 उत्तराधिकारियों के ज़रिए जनता से संपर्क में रहे।

इसके बाद 329 हिजरी क़मरी में मानवता के अंतिम मुक्तिदाता की दीर्घावधि की ग़ैबत शुरु हुयी जो अब तक जारी है।

ग़ौरतलब है कि पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम ने कहा था कि उनके बारहवें उत्तराधिकारी हज़रत महदी लोगों की नज़रों से ओझल रहेंगे और उस समय प्रकट होंगे जब दुनिया में हर ओर अत्याचार ही अत्याचार होगा। वह प्रकट होकर दुनिया को न्याय से उसी तरह भर देंगे जिस तक वह अत्याचार से भरी होगी। आपने यह भी फ़रमाया कि अगर दुनिया के अंत को एक दिन भी बचा होगा, ईश्वर उस दिन को इतना बड़ा कर देगा कि महदी प्रकट होकर दुनिया को न्याय से भर देंगे।

उल्लेखनीय है कि दुनिया के अनेक धर्मों के अनुयायी, मानवता के अंतिम मुक्तिदाता के प्रकट होने पर गहरी आस्था रखते हैं। यह विचार विभिन्न धर्मों में मौजूद है।

मिसाल के तौर पर ईसाइयों का मानना है कि हज़रत ईसा प्रलय से पहले इस दुनिया में प्रकट होंगे। मुसलमानों में ख़ास तौर पर शियों का मानना है कि हज़रत ईसा मसीह प्रकट होंगे लेकिन वह इमाम महदी अलैहिस्सलाम का अत्याचार के ख़िलाफ़ संघर्ष में साथ देंगे।


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