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भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का क्या होगा अंजाम?

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का क्या होगा अंजाम?

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब कोरोना वायरस को पराजित करने का एलान किया और चुनावी गतिविधियों में व्यस्त हो गए, उसके लगभग तीन महीने बाद भारत में कोरोना वायरस की महामारी की जो भयानक लहर शुरू हुई उसने भारत को पूरी दुनिया में कोरोना का हाट स्पाट बना दिया।

वर्ष 2019 के आख़िरी महीनों में जब कोरोना वायरस की महामारी शुरू हुई तो नरेन्द्र मोदी ने इसको ज़्यादा गंभीरता से नहीं लिया। उस समय मोदी मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राज्य सरकार गिराने में व्यस्त थे। 24 मार्च 2020 तक मोदी ने कोई ठोस क़दम नहीं उठाया। फिर जब इस तारीख़ को लाक डाउन लगाया तो वह दुनिया का बेहद त्रासदीपूर्ण लाकडाउन बन गया। इससे भारत की अर्थ व्यवस्था जो पहले ही चरमरा गई थी, बुरी तरह ढह गई। करोड़ों की संख्या में मज़दूर अचानक रोज़गार से वंचित हो गए।

देश में महामारी फैल रही थी मगर मोदी ने अमरीकी राष्ट्रपति को भारत के दौरे पर बुलाया। ट्रम्प अपने लाव लशकर के साथ भारत पहुंचे। उस समय कोरोना वायरस अमरीका में बुरी तरह फैल रहा था मगर ट्रम्प भी मोदी की तरह इस महामारी को गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं थे।

जब अचानक लाकडाउन से हालात ख़राब हो गए तो मोदी सरकार ने कहा कि वह अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने और फ़ील्ड हास्पिटल बनाने जैसे बड़े क़दम उठा रही है। मोदी सरकार ने कोरोना वायरस से अर्थ व्यवस्था को पहुंचने वाले नुक़सान की भरपाई के लिए बड़े बड़े बजट का एलान भी किया।

नरेन्द्र मोदी ने देश के पांच राज्यों में तब चुनाव करवाए जब कोरोना के संक्रमण में गिरावट आने के बाद दोबारा तेज़ी आ रही थी। मोदी चुनाव का एलान कराने के बाद मैदान में कूद पड़े और उनके साथ उनकी पूरी सरकार बंगाल के गांव गांव शहर शहर भटकने और चुनाव प्रचार करने लगी।

मोदी की आख़िरी चुनावी सभा 17 अप्रैल को हुई जिस दिन भारत में कोरोना के 2 लाख से अधिक नए मामले आए थे और 1500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।


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