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भारत के कट्टरपंथी, ग़ज़्ज़ा पर वहशियाना इस्राईली बमबारी का समर्थन क्यों करते हैं? अलजज़ीरा का जायज़ा

भारत के कट्टरपंथी, ग़ज़्ज़ा पर वहशियाना इस्राईली बमबारी का समर्थन क्यों करते हैं? अलजज़ीरा का जायज़ा

अवैध क़ब्ज़े वाले पूर्वी बैतुल मुक़द्दस में इस्राईल ने जो दमनकारी कार्यवाहियां कीं और इसके बाद ग़ज़्ज़ा पट्टी पर जो बमबारी की उसकी भर्त्सना पूरी दुनिया में की गई, मगर इस दमनकारी कार्यवाही को भारत में सरकार समर्थक धड़े की ओर से भरपूर समर्थन मिला। लोगों ने फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ इस्राईल की नीतियों को आत्म रक्षा का नाम दिया और इसका समर्थन किया।

कई हैशटैग जैसे #ISupportIsrael, #IndiaWithIsrael, #IndiaStandsWithIsrael,  #IsrealUnderFire भारत में सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते देखे जा रहे हैं। बहुत से लोग फ़िलिस्तीनियों को आतंकवादी कह रहे हैं।

अब तक कम से कम 212 फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं जिनमें 61 बच्चे हैं जबकि एक हज़ार से अधिक लोग घायल हो गए हैं। वेस्ट बैंक में इस्राईली फ़ोर्सेज़ ने कम से कम 19 फ़िलिस्तीनियों की हत्या कर दी जो फ़िलिस्तीनियों को उनके घरों से निकाले जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे।

इस्राईल के सपोर्ट में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दल भाजपा के नेताओं, कुछ वकीलों और पत्रकारों ने ट्वीट किए। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने जो ज़हरीले बयानों के लिए बदनाम हैं, ट्वीटर पर लिखा कि हम आपके साथ हैं इस्राईल ताक़तवर बना रहे।

 

भाजपा के प्रवक्ता गौरव गोयल तो लगातार इस्राईल के समर्थन में ट्वीट कर रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने ट्वीट किया कि प्यारे इस्राईलियो! आप अकेले नहीं हैं, हम भारतीय मज़बूती से आपके साथ खड़े हैं।

एक ट्वीटर यूज़र हार्दिक भासवर ने जिनके 1 लाख 34 हज़ार फ़ालोवर हैं और इनमें प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं, शनिवार को एक वीडिया शेयर की जिसमें कई मीडिया संस्थानों के कार्यालयों की गज़्ज़ा स्थित इमारत को ध्वस्त होते दिखाया गया। यह इमारत इस्राईल की बमबारी में तबाह हुई। उन्होंने लिबरल विचारधारा के लोगों को चिढ़ाते हुए ट्वीट कियाः हैपी दिवाली लिबरल्ज़!

भारतीय खोजी पत्रकार और लेखिका राना अय्यूब ने रविवार को लिखा कि #IndiaStandWithIsrael को ट्वीट करने वाले हैंडल्ज़ को चेक करने से पता चलता है कि यह सारे यूज़र वह हैं जो मुसलमानों से नफ़रत करते हैं और मुसलमानों का नरसंहार देखने के लिए बड़े लालायित रहते हैं। उन्होंने लिखा कि इनमें अधिकतर हैंडल्ज़ वह हैं जिन्हें पीएम मोदी भी फ़ालो करते हैं।

एक अध्ययनकर्ता श्रीनिवास कोडली ने अलजज़ीरा से बातचीत में कहा कि पोलराइज़्ड चरमपंथी संगठनों की ओर से इस्राईल का समर्थन किया जा रहा है। यह काम वह मुसलमानों की दुशमनी में कर रहे हैं।

 

ब्रिटिश राज से आज़ाद होने के बाद से भारत पारम्परिक रूप से आज़ाद फ़िलिस्तीनी देश की स्थापना का समर्थन करता रहा है। यह पहला ग़ैर अरब देश था जिसने पैलेस्टाइन लिब्रेशन आर्गनाइज़ेशन पीएलओ को मान्यता दी और उसको सारी फ़िलिस्तीनी जनता का क़ानून प्रतिनिधि माना था। 1975 में दिल्ली में पीएलओ का आफ़िस खुला था।

महात्मा गांधी ने 1938 में कहा था कि फ़िलिस्तीन अरबों का है जैसे इंग्लैंड अंग्रेज़ों का और फ्रांस फ़्रांसीसियों का है।

भारत ने इस्राईल को 1950 में मान्यता दे दी थी लेकिन उससे कूटनैतिक संबंध 1992 में स्थापित किए थे। उसके बाद से इस्राईल के साथ भारत के संबंधों का तेज़ी से विस्तार हुआ। नरेन्द्र मोदी शासन में इन संबंधों में और भी गहराई आई।

लेखिका गीता हरिहरन का कहना है कि चरमपंथी हिंदुत्व और ज़ायोनिज़्म की विश्व आयडियालोजी काफ़ी मिलती जुलती है जिसकी वजह से यह निकटता देखने में आ रही है। उनका कहना है कि इस्राईल से भारत के संबंध भाजपा की सरकार शुरू होने से पहले ही स्थापित हो गए थे मगर भाजपा सरकार में इन संबंधों में बड़ी मज़बूती और गहराई आई। हालांकि भारत की आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों ने जिस प्रकार के देश की रचना का ख़्वाब देखा था यह रूजहान उसके बिल्कुल ख़िलाफ़ है।

रविवार को भारत सरकार ने युएन में तनाव कम करने और बैतुल मुक़द्दस में यथास्थिति बाक़ी रखने का समर्थन किया जिस पर भारत सरकार के कट्टरपंथी समर्थक भड़क भी गए और इसे शर्मनाक कूटनीति का नाम भी दिया मगर लेफ़्टिस्ट नेता सीताराम येचहूरी ने कहा कि भारत की रणनीति फ़िलिस्तीनियों का समर्थन जारी रखना है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि हक़ीक़त में भारत सरकार इस समय इस्राईल का साथ दे रही है जबकि उसे संतुलित नीति अपनानी चाहिए।

लेखकः बिलाल कुचे

स्रोतः अलजज़ीरा


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