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ब्रिटेन ने किन कारणों से हिज़्बुल्लाह का नाम आतंकवादी गुटों की सूची में शामिल किया?

ब्रिटेन ने किन कारणों से हिज़्बुल्लाह का नाम आतंकवादी गुटों की सूची में शामिल किया?

ब्रिटेन के विदेशमंत्री साजिद जावेद ने हिज़्बुल्लाह के राजनीतिक धड़े का नाम आतंकवादी गुटों की सूची में शामिल कर दिया है।

ब्रिटेन की सरकार ऐसी स्थिति में लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के राजनीतिक धड़े का नाम आतंकवादी गुटों की सूची में शामिल कर रही है कि जब 11 साल पहले यानी वर्ष 2008 में हिज़्बुल्लाह की सैनिक शाखा का नाम भी आतंकवादी गुटों की सूची में करार दिया था।

ब्रिटेन की सरकार के हालिया कदम का लक्ष्य हिज़्बुल्लाह की सैनिक शाखा को राजनीतिक शाखा से अलग रखना और कुछ मिलाकर हिज़्बुल्लाह को आतंकवादी गुट करार देना है परंतु रोचक बिन्दु यह है कि ब्रिटेन सरकार के इस कदम पर स्वयं ब्रिटेन के भीतर भी विरोध जताया गया।

इसी संबंध में ब्रिटेन की लेबर पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि देश के गृहमंत्री को चाहिये कि वह इस फैसले के लिए ठोस साक्ष्य पेश करें और दिखायें कि यह निर्णय उन्होंने राजनीतिक लाभ उठाने के लिए नहीं लिया है।

महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इस निर्णय के पीछे ब्रिटेन सरकार के क्या लक्ष्य हैं? और उसने किन कारणों से ऐसा निर्णय लिया है? इसके जवाब में कहा जा सकता है कि इस प्रकार के निर्णय लेने के पीछे सीरिया में आतंकवादियों से मुकाबले में हिज़्बुल्लाह को मिलने वाली सफलता और उसके क्रिया- कलाप हैं।

ब्रिटेन की सरकार और अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसी सरकारों ने पिछले आठ वर्षों के दौरान सीरिया में आतंकवादी गुटों के समर्थन में किसी प्रकार के समर्थन में संकोच से काम नहीं लिया है और उन सबका लक्ष्य सीरिया की कानूनी सरकार को उखाड़ फेंकना और ऐसी सरकार लाना था जो पश्चिम समर्थक और उन पर निर्भर हो परंतु उन सबको पराजय का कटु स्वाद चखना पड़ा और मुंह की खानी पड़ी।

इसके मुकाबले में हिज़्बुल्लाह था जो सीरिया की कानूनी सरकार का प्रबल समर्थक है और बश्शार असद की कानूनी सरकार को बचाने में उसने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है और हिज़्बुल्लाह के इस प्रकार के क्रिया- कलापों और भूमिका के दृष्टिगत ब्रिटेन ने उसका नाम आतंकवादी गुटों की सूची में शामिल कर दिया ताकि एक प्रकार से वह हिज़्बुल्लाह से प्रतिशोध ले सके।

लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध हिज्बुल्लाह ने ब्रिटेन के इस निर्णय की प्रतिक्रिया में कहा है कि जो देश विश्व में स्वयं आतंकवाद का समर्थक हो और हर स्तर पर आतंकवादियों का समर्थन कर रहा है उसे इस बात का अधिकार नहीं है कि वह हिज़्बुल्लाह या प्रतिरोध के किसी दूसरे आंदोलन पर आतंकवाद का आरोप लगाये। 


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