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बुश व सद्दाम की कहानी मगर इस बार बाइडन व सऊदी अरब... कैसे जाल में फंसाया सऊदी अरब को बाराक ओबामा ने? अब्दुलबारी अतवान का आंख खोल देने वाला लेख

बुश व सद्दाम की कहानी मगर इस बार बाइडन व सऊदी अरब... कैसे जाल में फंसाया सऊदी अरब को बाराक ओबामा ने? अब्दुलबारी अतवान का आंख खोल देने वाला लेख

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुल यौम के मुख्य संपादक अब्दुलबारी अतवान ने सऊदी अरब और अमरीका के संबंधों का बेहद सटीक जायज़ा पेश किया है।

अगर इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू, अमरीका के नये प्रधानमंत्री जो बाइडन के फोन का इंतेज़ार करते करते बेचैनी की सारी हदें पार रहे रहे हैं तो उधर सऊदी अरब के अधिकारियों का हाल उससे भी बुरा है, इस लिए नहीं कि उन्हें इस तरह  के फोन का इंतेज़ार भी नहीं है और इस लिए भी नहीं कि रियाज़ में अब ट्रम्प की ही तरह बड़ी बड़ी हस्तियां का पतन होने वाला है, बल्कि इस लिए कि सऊदी शासकों को अमरीका की नयी सरकार की ओर से नये नये झटकों की आशंका रहती है। सऊदी शासकों के इस भयानक सपने का आरंभ उसी समय से हो गया जब अमरीका में रिपब्लिकन ट्रम्प की अपमानजनक हार हुई थी।

     हम अधिक स्पष्ट रूप से कहते हैं कि बाइडन ने अपने चुनावी अभियान में खुल कर कहा था कि खाशुकजी की हत्या और यमन में बच्चों के जनसंहार में लिप्त सभी सऊदी अधिकारियों को इसकी भारी क़ीमत अदा करना पड़ेगी और बाइडन का यह मानना है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने खाशुक़जी की हत्या का स्वंय आदेश दिया है इसी संदर्भ में अमरीका की केन्द्रीय गुप्तचर संस्था की नयी प्रमुख ने भी कहा है कि उनकी संस्था जल्द ही फोटो के साथ एक गुप्त रिपोर्ट प्रकाशित करेगी जिससे इस्तांबूल में होने वाली इस हत्या के राज़ खुलेंगे।

     सऊदी अरब के खिलाफ बाइडन सरकार बड़ी तेज़ी के साथ सक्रिय हुई और सत्ता में आने के मात्र तीन सप्ताह के भीतर परशियन गल्फ के देशों के लिए हथियारों की बिक्री रोक दी जो 36.5 अरब डालर था सौदा है और जिसमें यूएई को बेचे जाने वाले एफ-35 युद्धक विमान और सऊदी अरब के लिए 7500 मिसाइल भी शामिल हैं।

     हमारी नज़र में अमरीका की ओर से सबसे अधिक ध्यानयोग्य क़दम नये विदेशमंत्री एन्टोनी ब्लिकंन का यह एलान है कि अमरीका यमन के अंसारुल्लाह आदोंलन का नाम आंतकवादी संगठनों की सूचि से हटा रहा है तथा यमन में सऊदी युद्ध का समर्थन बंद कर रहा है जिसके बारे में बाइडन का कहना है कि वह मानव त्रासदी है जिसमें एक लाख दस हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, पूरे देश में भुखमरी फैल चुकी है और यमन के 80 प्रतिशत लोग मानवता प्रेमी सहायता पर निर्भर हैं।  

 

     अमरीका और युरोप में डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों का एक धड़ा, यमन युद्ध रोकने और सऊदी अरब तथा अन्य अरब देशों में मानवाधिकारों के हनन को खत्म करने के लिए दबाव बना रहा है लेकिन बाइडन, ईरान के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर के बाद सऊदी अरब की ओर से बाराक ओबामा का किया जाने वाला अपमान और आरोपों को भूल नहीं सकते।

     डेमोक्रेटिक पार्टी से सऊदी अरब के संबंध यूं भी अच्छे नहीं रहे यहां तक कि बीस बरसों तक अमरीका में सऊदी राजदूत रहे बंदर बिन सुलतान को भी इस प्रकार के बहुत से अपमान का सामना करना पड़ा था हालांकि इराक़ युद्ध आरंभ करने में उनका बहुत बड़ा हाथ था और उन्होंने ही अमरीका को इराक़ के युद्ध में ढकेलने में प्रभावी भूमिका निभाई है इसी लिए युरोप कई नेताओं और कुछ अन्य लोगों का यह भी कहना है कि सऊदी अरब को यमन युद्ध शुरु करने के लिए बाराक ओबामा ने तैयार किया था लेकिन उसकी वजह यह नहीं थी कि बाराक ओबामा, ईरान के साथ परमाणु समझौते की वजह से सऊदी अरब की नाराज़गी को दूर करना चाहते थे जैसा कि उस समय यही मशहूर था बल्कि इस लिए कि उन्हें मालूम था कि सऊदी अरब यमन के युद्ध से विजेता बन कर नहीं निकलेगा जिस तरह सीनियर बुश सरकार ने सद्दाम हुसैन को कुवैत पर हमले के लिए तैयार किया था।

     सद्दाम की कहानी, सऊदी अरब और बाइडन के बीच फिर से दोहरायी गयी जिसकी पहली क़िस्त, यमन युद्ध रोकने पर आग्रह के रूप में दिखायी गयी है लिकन यह नहीं कहा जा सकता कि इस सीरियल की अगली किस्तें कैसी होंगी?  

     सऊदी अरब ने सामाजिक कार्यकर्ता, हज़लूल को रिहा करने का फैसला किया है जो निश्चित रूप से अच्छा है लेकिन जितने लोग सऊदी अरब में क़ैद हैं उनको देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है।

     अमरीका ने सऊदी अरब के लिए हथियारों की बिक्री पर रोक लगा दी है वह भी एसे समय में जब वह यमन में युद्ध कर रहा है तो यह निश्चित रूप स उसके दुश्मनों की मदद ही है इसके अलावा बाइडन सरकार जल्द ही ईरान के साथ परमाणु समझौते में वापस लौट सकती है जो सऊदी अरब के लिए बेहद खतरनाक स्थिति होगी अब अगर अमरीका सऊदी अरब को मिसाइलों की सप्लाई रोक देता है और एफ-15 और एफ-16 युद्धक विमानों की देख रेख का समझौता निरस्त कर देता है तो सऊदी अरब की वायु सेना की आधी शक्ति खत्म हो जाएगी जो उसकी रीढ़ की हड्डी है।

     सऊदी अरब अरब के शासकों की सब से बड़ी गलती, इस्लामी और अरब मुद्दों से मुंह मोड़ना और नेतेन्याहू पर विकल्प के रूप में भरोसा करना है। इसी तरह उन्होंने ट्रम्प और उनके दामाद पर भरोसा करके भी भारी गलती की है, ट्रम्प और उनके दामाद तो जा चुके हैं और नेतेन्याहू, अमरीका की नयी सरकार से निकट होने के लिए कोई सहारा तलाश कर रहे हैं और शायद कुछ हफ्तों बाद वह भी सत्ता में न रहें।


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