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बीजेपी का गुजरात विकास मॉडल धराशायी हो गया,लोकतंत्र के मॉडल का "ग़ुब्बारा" अब फट गया

बीजेपी का गुजरात विकास मॉडल धराशायी हो गया,लोकतंत्र के मॉडल का

शिवसेना ने भारती जनता पार्टी द्वारा नेतृत्व परिवर्तन पर कटाक्ष किया है।

शिवसेना ने पूछा है कि क्या यही गुजरात मॉडल है? शिवसेना ने कहा है कि बीजेपी का गुजरात विकास मॉडल धराशायी हो गया है।

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय में कहा गया है कि गुजरात के लोग COVID-19 की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य प्रणाली के "ढहने" पर बेहद ग़ुस्से में थे। भाजपा को भी यह एहसास हुआ कि प्रभावशाली पाटीदार जिस समुदाय से नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ताल्लुक़ रखते हैं, वह पार्टी से नाराज़ है। इस कारण से बीजेपी ने विजय रूपाणी से इस्तीफ़ा ले लिया।

शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी की चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस में भी यही होता है और हमें इसे लोकतंत्र कहना होगा। अचानक नेतृत्व परिवर्तन के साथ।

संपादकीय में कहा गया है कि गुजरात के विकास, शासन और लोकतंत्र के मॉडल का "ग़ुब्बारा" अब फट गया है।

शिवसेना ने संपादकीय के ज़रिए सवाल पूछा है कि पटेल को पिछले चार वर्षों में मंत्री भी नहीं बनाया गया था, लेकिन उन्हें सीधे मुख्यमंत्री बनाया गया। अगर गुजरात वास्तव में प्रगति के रास्ते पर था, तो भाजपा ने रातों-रात अपना मुख्यमंत्री क्यों बदल दिया?

संपादकीय में कहा गया है कि विकास के शोर-शराबे के बीच अगर अचानक नेतृत्व बदल जाता है तो लोग संदेह जताते हैं। उन्होंने पूछा, "क्या यह गुजरात मॉडल है जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वास्तव में पटेल को राज्य चुनावों से पहले सबसे आगे रखना होगा?" पटेल गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के कट्टर समर्थक हैं जबकि रूपानी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का समर्थन प्राप्त था।

शिवसेना का कहना है कि रूपाणी को पटेल से बदलना एक आसान काम था। भाजपा को यकीन है कि बेरोज़गारी, अहमदाबाद के पास कार निर्माता फोर्ड के संयंत्र सहित प्रमुख कारखानों के बंद होने के कारण उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा।

संपादकीय में कहा गया कि फ़ोर्ड प्लांट को बंद करने से लगभग 40 हज़ार लोगों की आजीविका चली गई है। शिवसेना ने संपादकीय में कहा है कि इसी तरह से उत्तराखंड और कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी कुछ ही दिन पहले बदले गए और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मध्य प्रदेश में भी बदलाव किया जाएगा, सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है वहां भी नेतृत्व परिवर्तन होगा, ऐसा प्रसारित हुआ है। कहां क्या बदलना है, यह उस पार्टी का अंदरूनी मसला है। रोटी घुमानी ही पड़ती है, परंतु जब किसी राज्य को विकास अथवा प्रगति का ‘मॉडल’ साबित करने के लिए उठा पटक की जाती है, तब अचानक नेतृत्व बदलने से लोगों के मन में संदेह निर्माण होता है। भूपेंद्र पटेल पर अब गुजरात का भार आ गया है। वर्ष भर में विधानसभा के चुनाव हैं। पटेल को आगे रखकर नरेंद्र मोदी को ही लड़ना होगा। गुजरात मॉडल कहा जा रहा है, वो यही है क्या? 


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