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बिना अमल के काग़ज़ पर सिर्फ़ हस्ताक्षर का कोई महत्व नहीं रह जाताः तख़्त रवानची

बिना अमल के काग़ज़ पर सिर्फ़ हस्ताक्षर का कोई महत्व नहीं रह जाताः तख़्त रवानची

मजीद तख़्ते रवानची ने कहा है कि जेसीपीओए में वापसी के लिए बिना परखे किसी भी हस्ताक्षर का कोई महत्व नहीं है।

ख़ामेनेई डाॅट आईआर के अनुसार संयुक्त राष्ट्रसंघ में ईरान के प्रतिनिधि ने कहा है कि प्रतिबंध हटवाने के लिए अगर हम इस बारे में आधे-अधूरे ढंग से व्यवहार करते हैं तो फिर जेसीपीओए में जो संतुलन पहले से था वह बिगड़ जाएगा।  उन्होंने कहा कि अमरीका की पूर्व सरकार ने एसा ही किया जिससे जेसीपीओए में बहुत बुरा असंतुलन पैदा हो गया।

तख़्ते रवानची ने स्पष्ट किया कि ट्रम्प जब परमाणु समझौते से निकले थे तो जेसीपीओए के संदर्भ में जो प्रतिबंध हटने थे वे लग गए और उसमें कुछ अन्य को भी बढ़ा दिया गया।  उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त भी अमरीकियों ने अलग-अगल तरीके़ से प्रतिबंध बढ़ाए।  वास्तविकता यह है कि जेसीपीओए के अन्तर्गत प्रतिबंध हटे नहीं बल्कि बढ़े हैं।  राष्ट्रसंघ में ईरान के प्रतिनिधि के अनुसार जेसीपीओए से अमरीका के निकलने के बाद से अबतक ईरान पर तीन प्रकार के प्रतिबंध थोपे गए हैं।  अब अगर यह प्रतिबंध नहीं हटते तो फिर परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

संयुक्त राष्ट्रसंघ में ईरान के प्रतिनिधि तख़्ते रवानची का कहना था कि परमाणु समझौते से ईरान को होने वाली क्षति, एसी है जिसने हमको जानी और माली दोनों प्रकार की क्षति पहुंचाई है।  उन्होंने कहा कि उदाहरण स्वरूप अमरीकी दावा करते थे कि दवाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं है जबकि उसपर प्रतिबंध था।  इसने ईरानी जनता को कोरोना के काल में बहुत क्षति पहुंचाई।  ईरान के अनुसार प्रतिबंधों से होने वाली क्षति की भरपाई की जानी चाहिए।  यह निर्धारित किया जाए कि इसका ज़िम्मेदार कौन है? 


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