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बाइडन सरकार की इस्राईल को कड़ी धमकी का क्या मतलब है? नेतनयाहू अपने घटकों पर बोझ क्यों बनते जा रहे हैं?

बाइडन सरकार की इस्राईल को कड़ी धमकी का क्या मतलब है? नेतनयाहू अपने घटकों पर बोझ क्यों बनते जा रहे हैं?

इस्राईल के बड़बोले प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनायहू इन दिनों बुरी तरह अलग थलग पड़ गए हैं जबकि संसदीय चुनाव भी नज़दीक है। कई लक्षणों को देखते हुए कुछ बातों का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।

एक तो यह कि कुछ दिन पहले नेतनयाहू को अदालत में पेश होना पड़ा और आरोपी के कटहरे में खड़े होकर आरोपों को सुनना पड़ा। उन पर कई मामलों में मुक़दमा शुरू हो चुका है।

दूसरे यह कि बाइडन को अमरीका की सत्ता संभाले तीन सप्ताह गुज़र गए और चौथा सप्ताह शुरु हो गया है मगर अब तक उन्होंने नेतनयाहू को फ़ोन नहीं किया है। नेतनयाहू इस स्थिति से बहुत शर्मिंदा हैं और ढके छिपे कोशिश कर रहे हैं कि बाइडन स्थिति की गंभीरता को समझते हुए फ़ौरन फ़ोन कर दें।

तीसरी बात यह है कि नेतनयाहू ने बड़े गर्व से अरब देशों के दौरे का एलान किया था। वह तीन दिन के लिए अबू धाबी और मनामा जाने वाले थे मगर यह यात्रा तीन दिन से कम करके तीन घंटे की कर दी गई और इसे केवल अबू धाबी तक सीमित कर दिया गया है बल्कि अब तो लगता है कि यात्रा का कार्यक्रम रद्द ही कर दिया गया है। क्योंकि जिन अरब सरकारों ने हालिया समय में इस्राईल से शांति समझौते किए उन्हें एहसास होने लगा है कि इस फ़ैसले से काफ़ी नुक़सान पहुंच गया है जबकि फ़ायदा कुछ नहीं मिला। इन सरकारों को मालूम है कि जनता इस फ़ैसले से बहुत नाराज़ है।

चौथी बात यह है कि मोरक्को नरेश ने बैतुल मुक़द्दस की यात्रा का नेतनयाहू का न्योता ठुकरा दिया। इस यात्रा से नेतनयाहू ने बड़ी उम्मीदें लगा रखी थीं।

पांचवीं बात यह है कि ईरान ने अमरीका और यूरोपीय देशों के सामने डेडलाइन रखी थी कि 21 फ़रवरी तक अगर प्रतिबंध हटाए न गए तो ईरान परमाणु समझौते से पूरी तरह ख़ुद को अलग कर लेगा। यह सारे मुद्दे जारी हैं मगर तेल अबीब और वाशिंग्टन के बीच कोई विचार विमर्श नहीं हो रहा है।

छठी बात यह है कि अमरीकी प्रशासन ने धमकी दे दी है कि वह इस्राईली विमानन कंपनी एल-अल का एक भी विमान अपने किसी भी एयरपोर्ट पर नहीं उतरने देगा इसलिए इस्राईल को चाहिए कि वह अमरीकी उड़ानों के लिए अपना बिन गोरियन एयरपोर्ट खोले।

हमारे कहने का यह मतलब है कि ट्रम्प के शासनकाल में नेतनयाहू के जो मज़े थे अब खत्म हो चुके, अब तो उन्हें बाइडन सरकार का सामना है जो नेतनयाहू के बारे में अच्छी राय नहीं रखती। बल्कि ओबामा के दौर में नेतनयाहू द्वारा की गई अभद्रता का वह इंतेक़ाम लेने पर सोच रही है।

ट्रम्प ने दरअस्ल नेतनयाहू को धोखा दिया कि उन्हें यह उम्मीद दिला दी कि अमरीका, ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले कर सकता है वह ख़ुद तो सत्ता से बेदख़ल हो गए मगर नेतनयाहू को बड़ी मुसाबतों में फंसा कर चले गए।

स्रोतः रायुल यौम


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