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बाइडन की स्पीच निराश करने वाली थी...वाइट हाउस के पिछले दरवाज़े से ट्रम्प के निकल जाने के बाद मामला ख़त्म हो गया? वापस आने की बात ट्रम्प ने क्यों कही? अमरीका क्या उपद्रव के तूफ़ान में पहुंच गया है?

बाइडन की स्पीच निराश करने वाली थी...वाइट हाउस के पिछले दरवाज़े से ट्रम्प के निकल जाने के बाद मामला ख़त्म हो गया? वापस आने की बात ट्रम्प ने क्यों कही? अमरीका क्या उपद्रव के तूफ़ान में पहुंच गया है?

डोनल्ड ट्रम्प वाइट हाउस से निकल गए। उनके साथ न कोई सलाहकार था न मंत्री। यह कम से कम इस समय तो ट्रम्प के बुरे अंजाम का चिन्ह ज़रूर है। मगर यह संभावना बनी हुई है कि ट्रम्प अपनी पार्टी और ख़ुद अमरीका को तबाह करने का अपना मिशन जारी रखेंगे।

जो बाइडन ने वाइट हाउस में जो भाषण दिया उसमें अमरीका के गंभीर संकट की झलक साफ़ दिखाई देती है। ट्रम्प के सत्ताकाल की समाप्ति झूठ और साज़िश, प्रतिबंध, विमानवाहक पोत और पनडुब्बियों की तेज़ गतिविधियों पर विराम के अर्थ में है। बाइडन के शासनकाल की शुरुआत अमरीका पर लगे बड़े गहरे ज़ख्मों को भरने की कोशिश की शुरुआत है।

ट्रम्प अमरीकी जनता से किया गया कोई भी वादा पूरा नहीं कर पाए। वह अमरीका को फिर से ग्रेट बनाने का वादा करके सत्ता में पहुचे थे, चीन को कमज़ोर करने का लक्ष्य लेकर सत्ता में पहुंचे थे, ईरान की शासन व्यवस्था बदलने का सपना लेकर सत्ता में पहुंचे थे, कोरिया के हथियारों को ख़त्म करने का संकल्प लेकर सत्ता में पहुंचे थे। ट्रम्प अपने किसी लक्ष्य में कामयाब नहीं हुए बस एक लक्ष्य उन्होंने बड़ी कामयाबी से पूरा किया और वह अरब शासकों को बेइज़्ज़त करने और लूटने का लक्ष्य था। उन्होंने अरब सरकारों को इस्राईल से संबंध स्थापित करने पर तैयार किया, अरब देशों के अरबों डालर लूटे।

ट्रम्प का चार साल का शासन अमरीकी साम्राज्य के विघटन का काल था। यह शायद अमरीका के पतन की प्रक्रिया का आरंभिक बिंदु साबित होगा। दुनिया में बड़े साम्राज्यों का पतन हमेशा भीतर से ही शुरु हुआ है। बाइडन इस पतन की आंधी को रोक पाने में अक्षम हैं।

ट्रम्प ने अपने शासनकाल में अमरीकी पतन की प्रक्रिया के जो बीज बोए हैं कुछ लोग उनका महत्व घटा देते हैं मगर यह दुरुस्त नहीं है। ट्रम्प ने जाते जाते कहा कि वह किसी न किसी तरीक़े से फिर लौटेंगे। यह इस बात का चिन्ह है कि ट्रम्प कोई योजना तैयार कर चुके हैं। अब यह अलग बात है कि योजना कामयाब होती है या नाकाम। मगर दोनों ही स्थितियों में यह अमरीका के लिए विध्वंसकारी साबित होगी।

ट्रम्प नई नस्लवादी पार्टी बनाने का इरादा रखते हैं। इसके लिए उनके पास 74 मिलियन वोटरों का जनाधार है जिन्होंने ट्रम्प को वोट दिया था।

बाइडन का अमरीका इस समय गहरे बदलाव की कगार पर खड़ा है और बदलाव का पहिया चल पड़ा है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार


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