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बहुचर्चित युद्धक विमान एफ़-35 गिर कर तबाह, मल्बा फ़ौरन हासिल करने के लिए ब्रिटेन ने झोंक दी पूरी ताक़त, अमरीकी रक्षा उद्योग को बड़ा झटका

बहुचर्चित युद्धक विमान एफ़-35 गिर कर तबाह, मल्बा फ़ौरन हासिल करने के लिए ब्रिटेन ने झोंक दी पूरी ताक़त, अमरीकी रक्षा उद्योग को बड़ा झटका

अमरीका निर्मित एफ़-35 युद्धक विमान जो ब्रिटिश वायु सेना में शामिल था गिर कर तबाह हो गया जिसके बाद अमरीका वायु रक्षा उद्योग की इज़्ज़त दांव पर लग गई है।

अब यह बहस शुरू हो गई है कि यह विमान जिसे अमरीका दुनिया का सबसे शक्तिशाली और सुरक्षित युद्धक विमान कहता है तकनीकी कारणों से गिरा है या इंसानी ग़लती के नतीजे में यह घटना हुई है।

ब्रिटेन ने समुद्र से इस विमान का मल्बा फ़ौरन खोज निकालने के लिए पूरी ताक़त झोंक दी है क्योंकि ब्रिटेन के साथ ही अमरीका को यह डर है कि अगर मल्बा किसी और देश के हाथ लग गया तो इस विमान के निर्माण से जुड़े राज़ खुल जाएंगे और फिर इस विमान की उपयोगिता ख़त्म हो जाएगी।

ब्रितानी सेना ने अपने बयान में कहा है कि उसका एफ़-35 युद्धक विमान गिरकर तबाह हो गया है जो क्वीन एलिज़ाबेथ समुद्री जहाज़ पर तैनात था और एक सैनिक आप्रेशन में हिस्सा ले रहा था। यह घटना मिस्र के तट के क़रीब हुई है। बयान में इससे ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है।

यह पहली घटना है कि एफ़-35 विमान गिरा है। ब्रितानी सेना ने विमान का मल्बा हासिल करने के लिए व्यापक स्तर पर ख़ुफ़िया आप्रेशन शुरू कर दिया है। ब्रिटेन और अमरीका दोनों को यह डर सता रहा है कि कहीं इसका मल्बा रूस के हाथ न लग जाए।

ब्रितानी अख़बार डेली टेलीग्राफ़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि ब्रितानी सेना के पास मौजूद संसाधन शायद मल्बे को तत्काल खोज निकालने के लिए काफ़ी न हों इसलिए अमरीकी सेना से मदद मांगी गई है।

सूत्रों का कहना है कि युद्धक विमान आप्रेशन के दौरान चूंकी बहुत तेज़ रफ़तार से उड़ रहा था इसलिए उसके मल्बे की जगह का पता लगाना बहुत कठिन हो गया है।

120 मिलियन डालर क़ीमत के इस विमान का निर्माण लाकहीड मार्टिन ने किया है। कंपनी ने इटली, डेनमार्क, हालैंड, जापान और दक्षिणी कोरिया सहित 14 देशों के साथ इस विमान को बेचने के लिए बड़े सौदे किए हैं।

मगर इस घटना के बाद अब एफ़-35 के बारे में बहुत सारे संदेह उत्पन्न हो गए हैं।


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