बहरैन का आले ख़लीफ़ा शासन इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के आंदोलन से कितना डरा हुआ है!!!

बहरैन का आले ख़लीफ़ा शासन इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के आंदोलन से कितना डरा हुआ है!!!

बहरैन के गृह मंत्रालय ने कई नागरिकों से आशूरा की शोक सभा में भाग लेने पर पूछताछ की है।

बहरैनी वेबसाइट मिरअतुल बहरैन के अनुसार, इन श्रद्धालुओं को गृह मंत्रालय इसलिए तलब किया गया क्योंकि इनके हाथों में इस देश के वरिष्ठ धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की तस्वीर थी।

आले ख़लीफ़ा शासन के सुरक्षा कर्मियों ने दो दिन पहले आशूर की शोक सभा में भाग लेने पर कई भाषणकर्ताओं को गिरफ़्तार किया जिनमें हानी अलबन्ना और शैख़ यासीन अलजमरा जैसे भाषणकर्ता शामिल हैं।

आले ख़लीफ़ा शासन के सैनिक हर साल आशूर के प्रतीकों को ध्वस्त और धर्मगुरुओं को गिरफ़्तार करके, इस देश में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में शोक सभाओं के पुनः आयोजन की प्रक्रिया को रोकना चाहते हैं।

दूसरी ओर आले ख़लीफ़ा शासन के सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को देराज़ इलाक़े में लगातार 126वें हफ़्ते जुमे की नमाज़ का आयोजन नहीं होने दिया जिसकी वजह से लोगों ने इमाम सादिक़ जामा मस्जिद में अकेले नमाज़ पढ़ी।

बहरैन के 14 फ़रवरी क्रान्तिकारी युवा गठबंधन ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा कि आले ख़लीफ़ा शासन का जुमे की नमाज़ के आयोजन को रोकने का क़दम, इस देश के सबसे अहम राष्ट्रीय गुटों में से एक के ख़िलाफ़ जारी सांप्रदायिक अत्याचार के परिप्रेक्ष्य में है।

ग़ौरतलब है कि सन 61 हिजरी क़मरी को तत्कालीन भ्रष्ट शासक यज़ीद के सिपाहियों ने इराक़ के कर्बला नामक मरुस्थल में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके वफ़ादार साथियों को इसलिए शहीद कर दिया था क्योंकि इन हस्तियों ने यज़ीद जैसे भ्रष्ट शासक का आज्ञापालन करने से इंकार कर दिया था। 


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