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बस अब और झूठ मत बोलिए, झूठ की भी हद होती है

बस अब और झूठ मत बोलिए, झूठ की भी हद होती है

कोविड-19 की विनाशकारी दूसरी लहर के सबसे बुरे दिनों में कहीं नज़र नहीं आए।जब पूरी तरह बेशर्मी से झूठ बोलने का मामला सामने आता है दो इसमें यूपी के मुख्यमंत्री सबसे आगे नज़र आते हैं। उन्होंने कहा कि उनका राज्य ‘कोविड का सुरक्षित ज़ोन’ है। लगता है उन्होंने गंगा के किनारों पर लगातार छिछली क़ब्रों में हज़ारों शवों को दफ़्न होते नहीं देखाॽ

दोस्तो, भारत में कोविड-19 की स्थिति पर तवलीन सिंह का लेख पेश है, जो इंडियन एक्सप्रेस में छपा है।

यह वह वक़्त है कि प्रधान मंत्री को महसूस हुआ कि जब उनके मंत्री बड़ी ढिठाई से झूठ बोलते हैं तो उनकी अपनी विश्वसनीयता कम होती है। ताज़ा सफ़ेद झूठ उनके सबसे भरोसे के आदमी अमित शाह ने बोला। जब घरेलू स्तर पर आपात हालात होते हैं तो जवाबदेही गृह मंत्री की होती है। लेकिन इसके बावजूद वह कोविड-19 की विनाशकारी दूसरी लहर के सबसे बुरे दिनों में कहीं नज़र नहीं आए। पिछले हफ़्ते वह यह एलान करते हुए नज़र आए कि हमने “बहुत ही कम वक़्त में दूसरी लहर को क़ाबू कर लिया” और भारत ने “तेज़ी से टीकाकरण में दुनिया में रेकॉर्ड क़ायम किया।”

क्या उनको यह पता है कि अमरीका में 100 में 88 और यूके में 100 में 96 लोगों को टीका लगा और उसकी तुलना में भारत में हर 100 में सिर्फ़ 15 लोगों को टीका लगा हैॽ पूरी दुनिया ने देखा कि किस तरह हमारी लोक स्वास्थ्य सेवा दूसरी लहर के प्रकोप में ढह गयी और हमारी टीकाकरण की नीति इतनी बड़ी तबाही का कारण बनी कि सुप्रीम कोर्ट ने अतार्किक व मनमानी बताया। दिल्ली हाई कोर्ट ने तो इससे आगे बढ़ते हुए कहा कि कुछ लोगों के ख़िलाफ़ मानवहत्या के अपराध की चार्ज शीट दाख़िल होनी चाहिए।

जब पूरी तरह बेशर्मी से झूठ बोलने का मामला सामने आता है दो इसमें यूपी के मुख्यमंत्री सबसे आगे नज़र आते हैं। उन्होंने कहा कि उनका राज्य ‘कोविड का सुरक्षित ज़ोन’ है। लगता है उन्होंने गंगा के किनारों पर लगातार छिछली क़ब्रों में हज़ारों शवों को दफ़्न होते नहीं देखाॽ क्या उन्होंने गांव में बड़ी तादाद में लोगों को कोविड टेस्ट के बिना बुख़ार और सांस फूलने से मरते हुए देखाॽ क्या उन्होंने इत बात पर ध्यान दिया कि उनके अधिकारी नमूनिया या हार्ट अटैक से मरने का सार्टिफ़िकेट देकर कोविड की मौतों को छिपाते रहेॽ

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को दूसरी लहर की तबाही से उबरने और तीसरी लहर का सामना करने के लिए रोज़ाना 70 लाख से 1 करोड़ लोगों को टीका लगाने की ज़रूरत है। यह कैसे मुमकिन होगा जब दिल्ली और मुंबई में टीकाकरण के सेंटर टीका न होने की वजह से बंद हो रहे हैंॽ इस वक़्त जो बात जानने की ज़रूरी है वह यह कि अब तक कितनी तादाद में टीका मुहैया हुआ और अगले कुछ हफ़्तों में कितने और मुहैया होंगे और कहाँ से मुहैया होंगे। अगर प्रधान मंत्री ढाई करोड़ टीके के लिए अमरीका का शुक्रिया अदा करने के लिए व्यक्तिगत रूप से ट्वीट को ज़रूरी समझते हैं तो हमें यह समझ लेना चाहिए हम इससे भी ख़तरनाक मुश्किल में होंगे, जैसा हम सोच रहे हैं।

ग्रामीण भारत में हालात डरावने हैं। अगर वहाँ बड़े पैमाने पर टीकाकरण करना है तो पहले वहां के निष्कृय प्राइमरी हेल्थ सेंटर और ग्रामीण अस्पतालों को नर्सों और डॉक्टरों के साथ तुरंत चालू करने की ज़रूरत है। बिहार और यूपी में तो ज़्यादातर में टुकड़े में सायबान पड़ा है जिसमें लावारिस जानवर टहलते नज़र आते हैं। इसके साथ ही पढ़े लिखे ग्राम वासियों में भी टीका लगाने को लेकर हिचकिचाहट है। यह हिचकिचाहट, बाबा रामदेव जैसे नीम हकीम के ऐलोपैथी के संबंध में बोले गए अपमानजनक झूठ से और बढ़ गयी। ये लोग क्यों न उनकी बात मानें जब यह बात आम है कि वह प्रधान मंत्री के निकटवर्ती हैं और भारत के यूनियन स्वास्थ्य मंत्री उन्हीं के बग़ल में एक और सीनियर मंत्री के साथ खड़े होकर उनके ताज़ा ‘कोविड क्योर’ को लॉन्च कर, उसे प्रोत्साहित करते हैं। जिस देश में ज़्यादातर लोग नीम हकीम पर भरोसा करते हैं, वहाँ इस तरह की चीज़ बहुत ख़तरनाक व ग़ैर ज़िम्मेदाराना है।

भारत को इतने बडे स्वास्थ्य संकट का सामना है कि 100 साल से ज़्यादा समय में इतना बड़ा संकट दिखने में नहीं आया, जिससे निपटने का सिर्फ़ एक रास्ता, ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा को आवाज़ से ज़्यादा तेज़ रफ़्तार से खड़ा करना है। इस काम के लिए प्रधान मंत्री को सभी मुख्य मंत्रियों की मदद की ज़रूरत पड़ेगी। जहाँ तक टीका मुहैया करने की बात है तो यह पूरी तरह उनकी ज़िम्मेदारी है जिसे उन्हें पूरी पारदर्शिता से करने की ज़रूरत है। एक बात जो उनके सबसे भरोसे के सहायकों को नहीं करना चाहिए वह सच्चाई को मिटाना है। इसे मिटाया नहीं जा सकता। 


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