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फ्रांस में बढ़ता इस्लामोफ़िया, 76 मस्जिदों की होगी जांच, मैक्रां सरकार का दोहरा रवैया, चरमपंथ के जन्मदाताओं से दोस्ती, पीड़ितों से दुश्मनी!

फ्रांस में बढ़ता इस्लामोफ़िया, 76 मस्जिदों की होगी जांच, मैक्रां सरकार का दोहरा रवैया, चरमपंथ के जन्मदाताओं से दोस्ती, पीड़ितों से दुश्मनी!

फ्रांस में इस समय इस्लामोफ़ोबिया अपने चरम पर है। मैक्रां सरकार लगातार इस देश के मुसलमानों और उनके पवित्र स्थलों को निशाना बना रहे हैं। इस बी फ्रांस में मौजूद 76 मस्जिदों की इस देश की सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। फ्रांसीसी सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि, देश के अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि क्या फ्रांस में मौजूद मस्जिदों में कट्टरपंथ की शिक्षा दी जा रही है।

बताया जाता है कि इस समय फ्रांस के अधिकारियों के निशाने पर कुल 76 मस्जिदें हैं। फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड डारमानिन ने कहा है कि अगर यह पता लगता है कि किसी भी मस्जिद में उग्रवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो उसे हम तुरंत बंद कर देंगे। मस्जिदों की जांच फ्रांस में अक्तूबर महीने में हुई दो घटनाओं को इस्लामी चरमपंथियों से जोड़ने के बाद उठाए गए मैक्रां सरकार के कदमों का हिस्सा हैं। पहली घटना 16 अक्तूबर को हुई थी जिसमें एक टीचर का सिर काट दिया गया था। उसने अपनी क्लास के छात्रों को पैग़म्बरे इस्लाम (स) से संबंधित अपमानजनक कार्टून दिखाए थे। दूसरी घटना 29 अक्तूबर को नीस की चर्च में हुई, जब एक व्यक्ति ने तीन लोगों की चाकू मार कर हत्या कर दी। फ्रांस के गृहमंत्री ने यह नहीं बताया है कि किन मस्जिदों की जांच होगी। क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुखों को भेजे गए पत्र में उन्होंने इनमें से 16 स्थान पेरिस की और 60 जगहें देश के बाक़ी हिस्सों की बताई हैं।

बुधवार को फ्रांस के गृहमंत्री ने अपने ट्विट के माध्यम से कहा था कि मस्जिदों पर "अलगाववाद" फैलाने का संदेह है। वहीं आजकल फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रां भी लगातार इस्लाम और मुसलमानों के ख़िलाफ़ आग उगल रहे हैं। वह देश में मुसलमान लड़कियों द्वारा हिजाब किए जाने का भी विरोध किया है। फ्रांसीसी गृहमंत्री ने फ्रेंच रेडियो आरटीएल से बातचीत में कहा कि फ्रांस के क़रीब 2,600 मुस्लिम धर्मस्थलों में से कुछ पर ही कट्टरपंथी नीतियों का प्रसार करने के संदेह है। इस देश के गृहमंत्री ने कहा इससे पता चलता है, "हम व्यापक तौर पर कट्टरपंथ फैलने की स्थिति से काफ़ी दूर हैं। फ्रांस के क़रीब सारे मुसलमान इस गणराज्य के क़ानूनों का आदर करते हैं और उन्हें कट्टरपंथ से दुख होता है।" इस बीच कई जानकारों का मानना है कि फ्रांस में जिस तरह मुसलमानों और मुस्लिम स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है उसके कई उद्देश्य हैं। उनमें से एक पूरे फ्रांस में लंबे समय से मैक्रां सरकार के ख़िलाफ़ जारी विरोध प्रदर्शनों की ओर से ध्यान को भटकना है। दूसरे फ्रांस की इस्राईल के साथ बढ़ती नज़दीकियां भी इसकी एक सबसे बड़ी वजह है। मैक्रां सरकार अपने ही देश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ लगातार दमनात्मक कार्यवाही कर रही है। 

याद रहे कि, पेरिस के एक स्कूल में अभिव्यक्ति की आज़ादी की क्लास में अपने छात्रों को पैग़म्बरे इस्लाम (स) का अपमानजनक कार्टून दिखाने वाले टीचर की हत्या ने फ्रांस में एक बार फिर इस्लामोफ़ोबिया को हवा दी है। वहीं मैक्रां सरकार को यह बहाना मिला है कि वह इस देश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ दमनात्मक कार्यवाही कर सकें। टीचर की हत्या के बाद फ्रांसीसी अधिकारियों ने दर्जनों इस्लामी संगठनों, खेल संगठनों और समासजेवी संगठनों पर चरमपंथ फैलाने के संदेह में छापा मारा। पेरिस के उपनगर पैन्टीन में एक बड़ी मस्जिद को अस्थायी रूप से बंद भी कर दिया गया। इस मस्जिद ने एक वीडियो जारी कर पैग़म्बरे इस्लाम (स) का अपमानजनक कार्टून दिखाने वाले टीचर को बुरा भला कहा था। मैक्रां सरकार ने कट्टरपंथ फैलने का आरोपी ठहराते हुए सैकड़ों की संख्या में शरणार्थियों को उनके देश भेजने का भी एलान किया है। इस बीच कई अंतर्राष्ट्रीय टीकाकारों का कहना है कि, कट्टरपंथ और चरमपंथ किसी भी देश के लिए बहुत ही बड़ी समस्या है, लेकिन इसको किसी धर्म विशेष से जोड़कर देखना सही नहीं है। टीकाकारों का मानना है कि दुनिया भर में किसी भी धर्म की पवित्र हस्तियों को अगर कोई बुरा-भला कहता है तो उस धर्म के लोगों की प्रतिक्रिया हमेशा तीव्र रहती है। ऐसे में अगर कोई मुसलमान पैग़म्बरे इस्लाम (स) का अपमान करने वालों के ख़िलाफ़ कोई प्रतिक्रिया देता है तो उसको तुरंत आतंकवाद और चरमपंथ से जोड़कर देखा जाने लगता है। टीकाकारों के अनुसार, यह पूरी दुनिया जानती है कि तकफ़ीरी आतंकवाद की जड़ सऊदी अरब है लेकिन यह सारे देश उसके साथ हर तरह का सहयोग करते दिखाई देते हैं, लेकिन वे देश जो लगातार आतंकवाद और चरमपंथ का शिकार हैं उनका सहयोग करने के बजाए यही पश्चिमी देश उनके ख़िलाफ़ प्रतिबंध और दूसरे तरह की कार्यवाहियां अंजाम देते हैं। 


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