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फ़िलिस्तीन में इस्राईल के विरुद्ध जारी प्रदर्शन और नेतनयाहू की नई समस्या

फ़िलिस्तीन में इस्राईल के विरुद्ध जारी प्रदर्शन और नेतनयाहू की नई समस्या

जहां एक ओर ग़ज़्ज़ा पट्टी और फ़िलिस्तीन के अन्य क्षेत्रों में ज़ायोनी शासन के विरुद्ध हर शुक्रवार को प्रदर्शनों का क्रम जारी है वहीं इस्राईली कूटनयिकों और राजदूतों के वेतनों और बजट में कमी, नेतनयाहू के लिए समस्या बन गयी है।

नेतनयाहू की समस्याएं कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। ज़ायोनी मंत्रीमंडल ने 2014 में ही विदेशमंत्रालय सहित सभी मंत्रालयों के बजट में कमी का फ़ैसला कर लिया था। ज़ायोनी कूटनयिकों और राजदूतों के बजट और वेतन में कमी के बाद, कूटनयिकों और राजदूतों ने एक पत्र लिखकर अपनी ज़िम्मेदारियों को ख़त्म करने की धमकी दे दी है। वर्ष 2014 से ही नेतनयाहू आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस्राईल में बढ़ती हुई निर्धनता, एक बड़ी सुरक्षा समस्या में परिवर्तित हो चुकी है और एक शोध के अनुसार हर पांच इस्राईलियों में से निर्धन रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहा है। 

जहां एक ओर बढ़ती हुई आर्थिक समस्या,नेतनयाहू के लिए समस्या बनी हुई है वहीं इस्राईल के विरुद्ध फ़िलिस्तीनियों के प्रदर्शनों ने भी ज़ायोनी अधिकारियों की नीदें उड़ा रखी हैं।

फ़िलिस्तीन के स्वास्थ मंत्रालय ने शुक्रवार की रात घोषणा की थी कि ग़ज़्ज़ा पट्टी में 76वें वापसी मार्च के दौरान इस्राईली सैनिकों की फ़ायरिंग में 97 फ़िलिस्तीनी घायल हो गये। वापसी मार्च के दौरान फ़िलिस्तीनी जनता ने इस्राईल के झंडा जलाया और इस्राईल के विरुद्ध जमकर नारे लगा।

प्रदर्शनों में शामिल लोगों ने अमरीका की डील आफ़ सेन्चुरी योजना का विरोध करते हुए समस्त फ़िलिस्तीनियों की स्वदेश वापसी की मांग की। फ़िलिस्तीनी जनता 30 मार्च 2018 से धरती दिवस के अवसर पर हर शुक्रवार को इस्राईल के विरुद्ध प्रदर्शन कर रही है।

इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक 310 से अधिक फ़िलिस्तीनी शहीद हो चुके हैं जबकि कम से कम 31 हज़ार लोग घायल हो चुके हैं। दूसरी ओर जार्डन नदी का पश्चिमी तट भी इस्राईल के विरुद्ध प्रदर्शनों का साक्षी रहा। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे फ़िलिस्तीनियों पर इस्राईलियों ने आंसू गैस के गोले फ़ायर किए और जीवित कारतूसों का धड़ल्ले से प्रयोग किया। प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 40 फ़िलिस्तीनियों के घायल होने की सूचना है। 

बहरहाल इस्राईल को भीतर से आर्थिक समस्या ने घेर रखा है जबकि फ़िलिस्तीनी, हिज़्बुल्लाह और हमास जैसे प्रतिरोध आंदोलनों ने उसकी नींदें उड़ा रखी हैं।


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