बदला बदला सा पाकिस्तान, क्या हो रहा है ईरान व रूस से निकट, लेबनानी समाचार पत्र की समीक्षा

बदला बदला सा पाकिस्तान, क्या हो रहा है ईरान व रूस से निकट, लेबनानी समाचार पत्र की समीक्षा

लेबनान के समाचार पत्र " अलबेना" ने पाकिस्तान में नये परिवर्तन का एक अलग अंदाज़ में जायज़ा लिया है जो बहुत से लोगों के लिए रोचक हो सकता है।

 अखबार का कहना है कि पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जैसा रुख अपनाया है उससे पता चलता है कि पाकिस्तान एक नयी डगर पर बढ़ रहा है जो उसे अमरीकी वर्चस्व और सऊदी अरब की वहाबियत से दूर जाएगा और ईरान व रूस से नज़दीक करेगा।

     लेबनानी समाचार पत्र अलबेना के इस आलेख का शीर्षक है " पाकिस्तान के छुटकारा और सऊदी अरब की हार का दिन " और समाचार पत्र ने पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी की जीत का उल्लेख करते हुए लिखा है कि इमरान खान , पाकिस्तानी राजनीति के उस पारपंरिक राजनीतिक गलियारे से अलग हैं जो पिछले कई दशकों से सत्ता का बंटवारा करता रहा है और इस पूरी अवधि में उस पर अमरीका और सऊदी वहाबियत का पूरा प्रभाव रहा।

  पाकिस्तानी जनता ने इस देश में सत्ता के पारंपरिक ढांचे को निकाल बाहर किया क्योंकि वह अपने देश पर कई दशकों से पंजे गड़ाए वहाबियत से थक चुके थे और अब टीकाकारों का कहना है कि नया पाकिस्तान, इमरान खान से पहले वाले पाकिस्तान से बहुत भिन्न होगा।

     पाकिस्तान के हालिया चुनाव में हारने और जीतने वालों की सूचि पर नज़र डालने से भी पाकिस्तानी जनता के नये रुझान का पता चलता है क्योंकि इस चुनाव में दाइशी और चरमपंथियों के समर्थक और चरमपंथी विचार रखने वाले बड़े बड़े नेताओं और धर्मगुरुओं को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। इन में से अधिकांश नेता, वहाबी विचारधारा के प्रचारक और सऊदी अरब के सेवक थे।

लेबनानी समाचार पत्र के अनुसार पाकिस्तान में इमरान खान की जीत इस्लामाबाद में सऊद अरब के घटकों की बड़ी पराजय को ही नहीं दर्शाती बल्कि यह जीत, पाकिस्तान की नीति में बड़े परिवर्तन का चिन्ह और अमरीकी झंडे से निकल कर रूस चीन और ईरान के मोर्चे से निकट होने का संकेत भी है।

      इमरान खान , अमरीका की कड़ी आलोचना करते हैं, ईरान पर लगाए गये प्रतिबंधों और यमन के खिलाफ अन्यायपूर्ण युद्ध और उसमें अपने देश की भागीदारी के विरोधी हैं यही वजह है कि जीतने के बाद उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति रूहानी से टेलीफोनी वार्ता में बताया कि उनकी पहली विदेश यात्रा, ईरान होगी।

          इमरान खान , इस्राईल के कट्टर विरोधी हैं और यह भी सिद्ध कर दिया है कि वह अपने देश के शिया मुसलमानों से अच्छे संबंधों के इच्छुक हैं। लेखक ने लिखा है कि यह महसूस हो रहा है कि सन 2006 में ज़ायोनी शासन के खिलाफ हिज़्बुल्लाह की विजय की गूंज, सीरिया में आतंकवाद पर विजय के मैदान से होते हुए, अमरीकी वर्चस्ववाद के खिलाफ ईरान के रणक्षेत्र और यमन में सऊदी अतिक्रमण के सामने अभूतपूर्ण संघर्ष के मार्ग से इस्लामाबाद में सुनाई दे रही है। यह गूंज पूरे पाकिस्तान को बदल देगी,  फिर वह वही पाकिस्तान बन जाएगा जिसका उसके संस्थापक मुहम्मद अली जेनाह ने ख्वाब देखा था , कम से कम हमें यही आशा है। (Q.A.)  




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